एन. रघुरामन का कॉलम:  जब बच्चे टू-व्हीलर्स के लिए जिद करें, तो उन्हें जीवन के सबक भी दें
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एन. रघुरामन का कॉलम: जब बच्चे टू-व्हीलर्स के लिए जिद करें, तो उन्हें जीवन के सबक भी दें

Hindi News Opinion N Raghuraman Column | Bengaluru Parents Advice On Teen Two Wheeler Demand 54 मिनट पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु शुक्रवार को जब मैं बेंगलुरु में उस 7 किलोमीटर लंबे मार्ग से गुजर रहा था, जहां बायोकॉन पार्क, माइक्रो लैब्स लिमिटेड, एपोटेक्स रिसर्च, एचसीएल टेक्नोलॉजीज का सेज परिसर, कार्ल जेइस इंडिया, […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  क्यों आज की रात हम अर्जेंटीना और स्पेन- दोनों के लिए खुश होंगे
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एन. रघुरामन का कॉलम: क्यों आज की रात हम अर्जेंटीना और स्पेन- दोनों के लिए खुश होंगे

2026 में आईपीएल के 19वें संस्करण के समापन तक मेरी सर्वकालिक पसंदीदा टीमें चेन्नई सुपर किंग्स और मुंबई इंडियंस रही हैं। दोनों अब तक 41 बार एक-दूसरे का सामना कर चुकी हैं, जिनमें मुंबई ने 21 और चेन्नई ने 20 मुकाबले जीते हैं। हालांकि दोनों फ्रेंचाइजी पांच-पांच बार आईपीएल का खिताब जीत चुकी हैं- जिससे […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  चीजों को फेंकने से पहले खुद से पूछें कि वे क्या कहानी संजोए हैं
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एन. रघुरामन का कॉलम: चीजों को फेंकने से पहले खुद से पूछें कि वे क्या कहानी संजोए हैं

जुलाई 1969 में जब इंसान ने पहली बार चांद पर कदम रखा तो पूरी दुनिया ने हैरत के साथ यह पल देखा था। नील आर्मस्ट्रांग और बज एल्ड्रिन चांद की सतह पर उतरे। लेकिन इतिहास जहां इस मूनवॉक को सेलिब्रेट करता है, वहीं बहुत कम लोग इसके बाद आए जीवन-मरण के एक संकट के बारे […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  लग्जरी हमेशा डिग्निटी से जुड़ी हुई रहती है
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एन. रघुरामन का कॉलम: लग्जरी हमेशा डिग्निटी से जुड़ी हुई रहती है

जब कोई मेहमान होटल का सामान छिपाकर अपने बैग में रख लेता है तो कई हॉस्पिटैलिटी ब्रांड सख्त प्रोटोकॉल के साथ प्रतिक्रिया देते हैं। लेकिन असली लग्जरी इस बात से तय नहीं होती कि कोई ब्रांड अपनी संपत्ति की सुरक्षा कैसे करता है, बल्कि इससे तय होती है कि वह अपने मेहमान की डिग्निटी कैसे […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  हर विषय अपना खुद का ‘लिविंग म्यूजियम’ बना सकता है
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एन. रघुरामन का कॉलम: हर विषय अपना खुद का ‘लिविंग म्यूजियम’ बना सकता है

स्कूली बच्चों के लिए 12वीं कक्षा तक अधिकांश उच्च शिक्षण लगभग अनदेखे ही रहते हैं। आमतौर पर वे एडमिशन के समय ही वहां पहली बार जाते हैं। कल्पना कीजिए कि ये बच्चे 5वीं कक्षा से या उससे भी पहले कॉलेज कैंपस जाने लगें। आप पूछ सकते हैं कि उन्हें क्यों जाना चाहिए? मेरा जवाब होगा, […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  लोगों के दिमाग में आप कैसे ‘अनफॉर्गेटेबल’ बन सकते हैं?
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एन. रघुरामन का कॉलम: लोगों के दिमाग में आप कैसे ‘अनफॉर्गेटेबल’ बन सकते हैं?

रामायण में वर्णित निषादराज गुह से कौन-कौन प्रेरणा ले सकता है, जिन्होंने बिना किसी अपेक्षा के लोगों को नदी पार कराई? आधुनिक दौर में जरूरी नहीं कि कोई गुह जैसा नाविक ही बने। वे पुल भी बना सकते हैं। यदि वे ऐसा करते हैं तो लोगों को नदी के एक किनारे से दूसरे तक ही […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  भविष्य में ‘वीकेंड इकॉनमी’ लोगों का अधिक ध्यान खींच सकती है
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एन. रघुरामन का कॉलम: भविष्य में ‘वीकेंड इकॉनमी’ लोगों का अधिक ध्यान खींच सकती है

मैं ऐसे शेफ को जानता हूं, जो सोमवार और मंगलवार को घर ही रहते हैं। बुधवार को दिन में अलग-अलग जगह जाकर रिसर्च करते हैं और शाम को रेस्तरां पहुंचते हैं, ताकि हफ्ते के बीच आने वाले ग्राहकों को सेवा दे सकें। फिर गुरुवार से रविवार तक देर रात तक काम करते हैं। मुंबई में […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  कम पैसे देना बचत नहीं, बल्कि औसत दर्जे की चीजों में निवेश जैसा है
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एन. रघुरामन का कॉलम: कम पैसे देना बचत नहीं, बल्कि औसत दर्जे की चीजों में निवेश जैसा है

Hindi News Opinion N Raghuraman Column: Low Pay Isnt Saving, Its Investing In Mediocre Things 53 मिनट पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु कुछ महीने पहले हमने एक हाउस-हेल्प काम पर रखीं, क्योंकि पहले वाली शादी के बाद दूसरे शहर में शिफ्ट हो गईं। नई कर्मचारी मुश्किल हालात में थीं और उन्हें नौकरी की […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  बच्चों को ऐसी दुनिया से बचाइए, जो काम से ज्यादा दिखावे को महत्व देती है
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एन. रघुरामन का कॉलम: बच्चों को ऐसी दुनिया से बचाइए, जो काम से ज्यादा दिखावे को महत्व देती है

Hindi News Opinion N. Raghuraman’s Column – Protect Children From A World That Values ​​appearances Over Substance. 24 मिनट पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन मैनेजमेंट गुरु हमारे बच्चे और टीनेजर्स आज जितनी बड़ी संख्या में भावनात्मक तनावों का सामना कर रहे हैं, उनसे पार पाना मुश्किल लग सकता है। इनमें नींद की कमी, एकेडमिक प्रेशर […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  बच्चों को ऐसी दुनिया से बचाइए, जो काम से ज्यादा दिखावे को महत्व देती है
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एन. रघुरामन का कॉलम: बच्चों को ऐसी दुनिया से बचाइए, जो काम से ज्यादा दिखावे को महत्व देती है

Hindi News Opinion N. Raghuraman’s Column – Protect Children From A World That Values ​​appearances Over Substance. 6 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन मैनेजमेंट गुरु हमारे बच्चे और टीनेजर्स आज जितनी बड़ी संख्या में भावनात्मक तनावों का सामना कर रहे हैं, उनसे पार पाना मुश्किल लग सकता है। इनमें नींद की कमी, एकेडमिक प्रेशर […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  दिखावे के दौर में पैसे बचाना सबसे बड़ा हुनर
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एन. रघुरामन का कॉलम: दिखावे के दौर में पैसे बचाना सबसे बड़ा हुनर

Hindi News Opinion N. Raghuraman’s Column – Saving Money Is The Greatest Skill In An Era Of Ostentation. 12 मिनट पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु आने वाली 28 अगस्त को मेरे परिवार में एक शादी है। वेन्यू है चेन्नई से 300 किमी दूर कुंभकोणम। सभी रिश्तेदारों को दो महीने पहले ही बता दिया […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  दिखावे के दौर में पैसे बचाना सबसे बड़ा हुनर
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एन. रघुरामन का कॉलम: दिखावे के दौर में पैसे बचाना सबसे बड़ा हुनर

Hindi News Opinion N. Raghuraman’s Column – Saving Money Is The Greatest Skill In An Era Of Ostentation. 2 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु आने वाली 28 अगस्त को मेरे परिवार में एक शादी है। वेन्यू है चेन्नई से 300 किमी दूर कुंभकोणम। सभी रिश्तेदारों को दो महीने पहले ही बता दिया […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  हर दिन संडे जैसा एहसास- “पीक जेन’ को कैसे हासिल करें?
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एन. रघुरामन का कॉलम: हर दिन संडे जैसा एहसास- “पीक जेन’ को कैसे हासिल करें?

Hindi News Opinion N. Raghuraman’s Column – A Sunday like Feeling Every Day: How To Achieve ‘Peak Zen’? 4 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु रविवार की एक शांत सुबह की कल्पना कीजिए। आसमान में बादल छाए हैं, खिड़की पर हल्की फुहार दस्तक दे रही है और मौसम बिल्कुल सुहावना है। कोई जल्दी […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  प्लेटफॉर्माइजेशन’ बिजनेस को री-इन्वेंट करने का नया अवसर बन रहा है
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एन. रघुरामन का कॉलम: प्लेटफॉर्माइजेशन’ बिजनेस को री-इन्वेंट करने का नया अवसर बन रहा है

सैलरी आने के बाद पहला शनिवार है, कल्पना करें कि आज रात आप जीवनसाथी के साथ डिनर पर जा रहे हैं। आपके जीवनसाथी ने काफी सर्च के बाद नया रेस्तरां चुना, क्योंकि सर्च इंजन से पता चला कि नए रेस्तरांओं में वही सबसे पॉपुलर है। ग्राहकों ने इसे सर्वाधिक फाइव-स्टार रेटिंग दी है। लेकिन डिनर […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  ताल पढ़ाई है तो नदी डिग्री, लेकिन ज्ञान तो सागर में ही है
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एन. रघुरामन का कॉलम: ताल पढ़ाई है तो नदी डिग्री, लेकिन ज्ञान तो सागर में ही है

पिछले हफ्ते मेरे एक दोस्त ने वीडियो कॉल किया तो लग रहा था जैसे वह हरी-भरी पहाड़ियों वाली किसी घाटी में खड़ा हो। लेकिन वह एक माेनेस्ट्री की कक्षा में था। छात्र आंखें मूंदे फर्श पर पालथी मारकर बैठे थे। दूर कहीं घंटियां बज रही थीं, कमरे में सन्नाटा था और एक बौद्ध भिक्षु मेडिटेशन […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  मुलायम आंखें भारी सपना क्यों नहीं देख सकतीं?
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एन. रघुरामन का कॉलम: मुलायम आंखें भारी सपना क्यों नहीं देख सकतीं?

सहर बेखौफ होकर पिता की आंखों में देखती हुई कहती हैं कि ‘मैं फिल्मी म्यूजिक पर डांस करना चाहती हूं।’ पंडित हरिनारायण शर्मा की आंखें लाल हो जाती हैं और वे जवाब देते हैं, ‘नहीं, उनके म्यूजिक और डांस में ताल नहीं होती।’ सहर हाथ पकड़कर पूछती है, ‘बताइए, भला कोई म्यूजिक और डांस बिना […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  मुलायम आंखें भारी सपना क्यों नहीं देख सकतीं?
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एन. रघुरामन का कॉलम: मुलायम आंखें भारी सपना क्यों नहीं देख सकतीं?

सहर बेखौफ होकर पिता की आंखों में देखती हुई कहती हैं कि ‘मैं फिल्मी म्यूजिक पर डांस करना चाहती हूं।’ पंडित हरिनारायण शर्मा की आंखें लाल हो जाती हैं और वे जवाब देते हैं, ‘नहीं, उनके म्यूजिक और डांस में ताल नहीं होती।’ सहर हाथ पकड़कर पूछती है, ‘बताइए, भला कोई म्यूजिक और डांस बिना […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  शहरों का दिल कभी गांवों के जैसा नहीं हो सकता
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एन. रघुरामन का कॉलम: शहरों का दिल कभी गांवों के जैसा नहीं हो सकता

“नानी, मैं स्कूल जा रहा हूं!’ मैं दरवाजे से चिल्लाकर कहता था और हर सुबह, उनकी तेज लेकिन प्यार से भरी हुई आवाज लौटकर आती थी : “कितनी बार समझाऊं? ऐसा कभी नहीं कहते हैं कि मैं जा रहा हूं, कहो कि मैं स्कूल जाकर आता हूं।’ मैं उनकी ओर देखे बिना मन ही मन […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  सफाई से जुड़ी कुछ गलतियों में सुधार करना आसान है
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एन. रघुरामन का कॉलम: सफाई से जुड़ी कुछ गलतियों में सुधार करना आसान है

हममें से कितने लोग सचमुच जानते हैं कि जिन चीजों का इस्तेमाल हम दूसरी वस्तुओं की सफाई के लिए करते हैं, उन्हें भी सफाई की जरूरत होती है? मसलन, हम सोफे को वैक्यूम क्लीन करते हैं, कपड़े वॉशिंग मशीन में धोते हैं और ब्रश से टॉयलेट साफ करते हैं। लेकिन कितनी बार आपने इन चीजों […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  क्या मोबाइल ने इमरजेंसी में हमारी प्रतिक्रिया को बदल दिया है?
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एन. रघुरामन का कॉलम: क्या मोबाइल ने इमरजेंसी में हमारी प्रतिक्रिया को बदल दिया है?

Hindi News Opinion Mumbai Local Murder: Mobiles Role In Emergency Response? | Raghuraman Column 8 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु मेरे लिए साढ़े चार दशक पहले, डोंबिवली से वीटी (अब सीएसएमटी) का मुंबई लोकल ट्रेन का सफर सालों-साल एक आध्यात्मिक यात्रा जैसा रहा। वजह थी ट्रेन के डिब्बे में भजन गाने वाली […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  वैश्विक समस्याओं को पहचानकर टेक्नोलॉजी से निकालें समाधान
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एन. रघुरामन का कॉलम: वैश्विक समस्याओं को पहचानकर टेक्नोलॉजी से निकालें समाधान

44 साल की सारा लव के लिए ऐप बनाना आसान नहीं था। वजह? उनके लिए टेक्नोलॉजी काला अक्षर भैंस बराबर थी। उन्होंने एक दशक तक बीमा सेक्टर में काम किया था। लेकिन फिर उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से फुल-टाइम डेवलपर बनने का फैसला किया, ताकि वे कोडिंग की उलझाऊ दुनिया डीकोड कर सकें। […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  किसी दिन ‘कोडी’ कई बुजुर्गों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा होगा
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एन. रघुरामन का कॉलम: किसी दिन ‘कोडी’ कई बुजुर्गों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा होगा

अगर आपकी उम्र 60 से ज्यादा है और आपकी देखभाल करने के लिए कोई नहीं है, लेकिन आप किसी ओल्ड-एज होम में भी नहीं जाना चाहते हैं, और उसके बजाय अपने ही घर में रहना चाहते हैं तो ऐसा सोचने वाले आप अकेले नहीं हैं। अक्टूबर 2025 में दक्षिण कोरिया में हुआ अध्ययन कहता है […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  ‘फ्यूलिंग स्टेशनों’ को बचाने से इंसानों का भोजन भी बचेगा
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एन. रघुरामन का कॉलम: ‘फ्यूलिंग स्टेशनों’ को बचाने से इंसानों का भोजन भी बचेगा

Hindi News Opinion N. Raghuraman’s Column – Saving ‘Fueling Stations’ Will Also Save Food For Humans 1 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन मैनेजमेंट गुरु हममें से ज्यादातर लोग एक बार में 5 किमी से ज्यादा नहीं चल सकते। फिर भी, हम 42 किमी मैराथन दौड़ने वालों को विस्मय से देखते हैं। लेकिन वे भी […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  पिता कब आपके अच्छे दोस्त बन जाते हैं?
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एन. रघुरामन का कॉलम: पिता कब आपके अच्छे दोस्त बन जाते हैं?

बचपन में, मैं कभी उनके बैठने से पहले नहीं बैठता था। इसलिए उस दिन जब वे मेरे बाद बैठे, तो यह कुछ अजीब-सा लगा। लेकिन कोई विकल्प नहीं था। मुझे अपनी पहली कार- एक सेकंड-हैंड फिएट पार्किंग से निकालकर उनके पास लानी थी। उन्होंने अपना हाथ कार की छत पर ऐसे रखा, जैसे उसे आशीर्वाद […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  पिता कब आपके अच्छे दोस्त बन जाते हैं?
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एन. रघुरामन का कॉलम: पिता कब आपके अच्छे दोस्त बन जाते हैं?

बचपन में, मैं कभी उनके बैठने से पहले नहीं बैठता था। इसलिए उस दिन जब वे मेरे बाद बैठे, तो यह कुछ अजीब-सा लगा। लेकिन कोई विकल्प नहीं था। मुझे अपनी पहली कार- एक सेकंड-हैंड फिएट पार्किंग से निकालकर उनके पास लानी थी। उन्होंने अपना हाथ कार की छत पर ऐसे रखा, जैसे उसे आशीर्वाद […]