एन. रघुरामन का कॉलम:  प्लेटफॉर्माइजेशन’ बिजनेस को री-इन्वेंट करने का नया अवसर बन रहा है
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एन. रघुरामन का कॉलम: प्लेटफॉर्माइजेशन’ बिजनेस को री-इन्वेंट करने का नया अवसर बन रहा है

सैलरी आने के बाद पहला शनिवार है, कल्पना करें कि आज रात आप जीवनसाथी के साथ डिनर पर जा रहे हैं। आपके जीवनसाथी ने काफी सर्च के बाद नया रेस्तरां चुना, क्योंकि सर्च इंजन से पता चला कि नए रेस्तरांओं में वही सबसे पॉपुलर है। ग्राहकों ने इसे सर्वाधिक फाइव-स्टार रेटिंग दी है। लेकिन डिनर […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  ताल पढ़ाई है तो नदी डिग्री, लेकिन ज्ञान तो सागर में ही है
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एन. रघुरामन का कॉलम: ताल पढ़ाई है तो नदी डिग्री, लेकिन ज्ञान तो सागर में ही है

पिछले हफ्ते मेरे एक दोस्त ने वीडियो कॉल किया तो लग रहा था जैसे वह हरी-भरी पहाड़ियों वाली किसी घाटी में खड़ा हो। लेकिन वह एक माेनेस्ट्री की कक्षा में था। छात्र आंखें मूंदे फर्श पर पालथी मारकर बैठे थे। दूर कहीं घंटियां बज रही थीं, कमरे में सन्नाटा था और एक बौद्ध भिक्षु मेडिटेशन […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  मुलायम आंखें भारी सपना क्यों नहीं देख सकतीं?
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एन. रघुरामन का कॉलम: मुलायम आंखें भारी सपना क्यों नहीं देख सकतीं?

सहर बेखौफ होकर पिता की आंखों में देखती हुई कहती हैं कि ‘मैं फिल्मी म्यूजिक पर डांस करना चाहती हूं।’ पंडित हरिनारायण शर्मा की आंखें लाल हो जाती हैं और वे जवाब देते हैं, ‘नहीं, उनके म्यूजिक और डांस में ताल नहीं होती।’ सहर हाथ पकड़कर पूछती है, ‘बताइए, भला कोई म्यूजिक और डांस बिना […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  मुलायम आंखें भारी सपना क्यों नहीं देख सकतीं?
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एन. रघुरामन का कॉलम: मुलायम आंखें भारी सपना क्यों नहीं देख सकतीं?

सहर बेखौफ होकर पिता की आंखों में देखती हुई कहती हैं कि ‘मैं फिल्मी म्यूजिक पर डांस करना चाहती हूं।’ पंडित हरिनारायण शर्मा की आंखें लाल हो जाती हैं और वे जवाब देते हैं, ‘नहीं, उनके म्यूजिक और डांस में ताल नहीं होती।’ सहर हाथ पकड़कर पूछती है, ‘बताइए, भला कोई म्यूजिक और डांस बिना […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  शहरों का दिल कभी गांवों के जैसा नहीं हो सकता
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एन. रघुरामन का कॉलम: शहरों का दिल कभी गांवों के जैसा नहीं हो सकता

“नानी, मैं स्कूल जा रहा हूं!’ मैं दरवाजे से चिल्लाकर कहता था और हर सुबह, उनकी तेज लेकिन प्यार से भरी हुई आवाज लौटकर आती थी : “कितनी बार समझाऊं? ऐसा कभी नहीं कहते हैं कि मैं जा रहा हूं, कहो कि मैं स्कूल जाकर आता हूं।’ मैं उनकी ओर देखे बिना मन ही मन […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  सफाई से जुड़ी कुछ गलतियों में सुधार करना आसान है
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एन. रघुरामन का कॉलम: सफाई से जुड़ी कुछ गलतियों में सुधार करना आसान है

हममें से कितने लोग सचमुच जानते हैं कि जिन चीजों का इस्तेमाल हम दूसरी वस्तुओं की सफाई के लिए करते हैं, उन्हें भी सफाई की जरूरत होती है? मसलन, हम सोफे को वैक्यूम क्लीन करते हैं, कपड़े वॉशिंग मशीन में धोते हैं और ब्रश से टॉयलेट साफ करते हैं। लेकिन कितनी बार आपने इन चीजों […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  क्या मोबाइल ने इमरजेंसी में हमारी प्रतिक्रिया को बदल दिया है?
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एन. रघुरामन का कॉलम: क्या मोबाइल ने इमरजेंसी में हमारी प्रतिक्रिया को बदल दिया है?

Hindi News Opinion Mumbai Local Murder: Mobiles Role In Emergency Response? | Raghuraman Column 8 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु मेरे लिए साढ़े चार दशक पहले, डोंबिवली से वीटी (अब सीएसएमटी) का मुंबई लोकल ट्रेन का सफर सालों-साल एक आध्यात्मिक यात्रा जैसा रहा। वजह थी ट्रेन के डिब्बे में भजन गाने वाली […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  वैश्विक समस्याओं को पहचानकर टेक्नोलॉजी से निकालें समाधान
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एन. रघुरामन का कॉलम: वैश्विक समस्याओं को पहचानकर टेक्नोलॉजी से निकालें समाधान

44 साल की सारा लव के लिए ऐप बनाना आसान नहीं था। वजह? उनके लिए टेक्नोलॉजी काला अक्षर भैंस बराबर थी। उन्होंने एक दशक तक बीमा सेक्टर में काम किया था। लेकिन फिर उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से फुल-टाइम डेवलपर बनने का फैसला किया, ताकि वे कोडिंग की उलझाऊ दुनिया डीकोड कर सकें। […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  किसी दिन ‘कोडी’ कई बुजुर्गों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा होगा
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एन. रघुरामन का कॉलम: किसी दिन ‘कोडी’ कई बुजुर्गों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा होगा

अगर आपकी उम्र 60 से ज्यादा है और आपकी देखभाल करने के लिए कोई नहीं है, लेकिन आप किसी ओल्ड-एज होम में भी नहीं जाना चाहते हैं, और उसके बजाय अपने ही घर में रहना चाहते हैं तो ऐसा सोचने वाले आप अकेले नहीं हैं। अक्टूबर 2025 में दक्षिण कोरिया में हुआ अध्ययन कहता है […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  ‘फ्यूलिंग स्टेशनों’ को बचाने से इंसानों का भोजन भी बचेगा
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एन. रघुरामन का कॉलम: ‘फ्यूलिंग स्टेशनों’ को बचाने से इंसानों का भोजन भी बचेगा

Hindi News Opinion N. Raghuraman’s Column – Saving ‘Fueling Stations’ Will Also Save Food For Humans 1 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन मैनेजमेंट गुरु हममें से ज्यादातर लोग एक बार में 5 किमी से ज्यादा नहीं चल सकते। फिर भी, हम 42 किमी मैराथन दौड़ने वालों को विस्मय से देखते हैं। लेकिन वे भी […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  पिता कब आपके अच्छे दोस्त बन जाते हैं?
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एन. रघुरामन का कॉलम: पिता कब आपके अच्छे दोस्त बन जाते हैं?

बचपन में, मैं कभी उनके बैठने से पहले नहीं बैठता था। इसलिए उस दिन जब वे मेरे बाद बैठे, तो यह कुछ अजीब-सा लगा। लेकिन कोई विकल्प नहीं था। मुझे अपनी पहली कार- एक सेकंड-हैंड फिएट पार्किंग से निकालकर उनके पास लानी थी। उन्होंने अपना हाथ कार की छत पर ऐसे रखा, जैसे उसे आशीर्वाद […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  पिता कब आपके अच्छे दोस्त बन जाते हैं?
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एन. रघुरामन का कॉलम: पिता कब आपके अच्छे दोस्त बन जाते हैं?

बचपन में, मैं कभी उनके बैठने से पहले नहीं बैठता था। इसलिए उस दिन जब वे मेरे बाद बैठे, तो यह कुछ अजीब-सा लगा। लेकिन कोई विकल्प नहीं था। मुझे अपनी पहली कार- एक सेकंड-हैंड फिएट पार्किंग से निकालकर उनके पास लानी थी। उन्होंने अपना हाथ कार की छत पर ऐसे रखा, जैसे उसे आशीर्वाद […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  महीने में कम से कम एक बार अपने ‘कैफे ऑफ मिस्टेकन ऑर्डर्स’ में जाइए
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एन. रघुरामन का कॉलम: महीने में कम से कम एक बार अपने ‘कैफे ऑफ मिस्टेकन ऑर्डर्स’ में जाइए

उन्होंने मुझसे पूछा, ‘तुम कॉफी लोगे या चाय?’ मैंने जवाब दिया, ‘मुझे कॉफी ज्यादा पसंद है।’ वह रसोई में गईं और चाय लेकर आ गईं। मैं मुस्कुरा दिया। उन्हें लगा कि कुछ गड़बड़ है तो उन्होंने चिंतित होकर पूछा कि ‘क्या यह अच्छी नहीं है?’ मैंने उन्हें भरोसा दिलाया, ‘बहुत अच्छी है। मुझे चाय पसंद […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  कार्य में जब मात्रा बढ़ती है तो प्रतिक्रिया की रफ्तार तेजी से घट जाती है।
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एन. रघुरामन का कॉलम: कार्य में जब मात्रा बढ़ती है तो प्रतिक्रिया की रफ्तार तेजी से घट जाती है।

आधुनिक इमरजेंसी हेल्पलाइन अब आधिकारिक तौर पर सॉफिस्टिकेटेड टॉर्चर डिवाइस बन चुकी हैं। कल्पना कीजिए, एक व्यक्ति ने बैंक धोखाधड़ी में जीवनभर की बचत गंवा दी हो। घबराहट में वह अपने बैंक फोन करता है, लेकिन उधर से इतनी शांत आवाज अभिवादन करती है कि लगता है अपमान कर रही हो। ‘इसके लिए 1 दबाएं, […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  एआई इंसानों की ‘ड्यूरेबल स्किल्स’ की नकल कभी नहीं कर सकता
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एन. रघुरामन का कॉलम: एआई इंसानों की ‘ड्यूरेबल स्किल्स’ की नकल कभी नहीं कर सकता

मैं जितना ज्यादा अस्पतालों में जाता हूं, उतने ही ज्यादा आत्मविश्वास से बाहर निकलता हूं। क्योंकि जब मैं किसी मरीज और नर्स के बीच बातचीत देखता हूं, जिसमें बॉडी लैंग्वेज को समझने और अनकही बातों को भी ‘बिटवीन द लाइन्स’ पढ़ने की स्किल दिखती है तो मेरा भरोसा यह सोचकर और बढ़ जाता है कि […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  दुनिया अपने रेगुलर स्नैक्स में अधिक सेहतमंद विकल्प तलाश रही है
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एन. रघुरामन का कॉलम: दुनिया अपने रेगुलर स्नैक्स में अधिक सेहतमंद विकल्प तलाश रही है

दुनिया में टेक कंपनियां लगातार हमें स्लीप स्कोर, हार्ट रेट बता रही हैं और हमारी बायोलॉजी को उस डैशबोर्ड जैसा बना रही हैं, जिसे देखकर हम रोजाना चिंता करें। ऐसे में फूड कंपनियां बिना शरीर की बात किए कैसे चुप रहतीं? हमारी बायोलॉजी को आंकड़ों में बदलकर इन टेक कंपनियों ने न सिर्फ सेल्फ-ऑप्टिमाइजेशन को […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  माइक्रोगार्डनिंग के बड़े फायदे हैं
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एन. रघुरामन का कॉलम: माइक्रोगार्डनिंग के बड़े फायदे हैं

बेंगलुरु की अनामिका बिष्ट 2016 में अपनी व्यस्त कॉरपोरेट लाइफ छोड़कर कुछ सुकूनभरा करना चाहती थीं, और वह थी खेती। वे चाहती थीं कि लोग फिर से मिट्‌टी को अनुभव करें। इसी भाव से ‘विलेज स्टोरी’ का जन्म हुआ, जो आज भारतीय सिलिकॉन सिटी का सबसे प्रख्यात कम्युनिटी फार्मिंग एक्सपेरिमेंट है। कुछ वर्कशॉप्स से शुरू […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  सुविधाओं के आदी लोगों के लिए ‘फ्रिक्शन मैक्सिंग’ करना मुश्किल है!
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एन. रघुरामन का कॉलम: सुविधाओं के आदी लोगों के लिए ‘फ्रिक्शन मैक्सिंग’ करना मुश्किल है!

Hindi News Opinion N. Raghuraman Column: Friction Mixing Tough For Comfort Addicted People 35 मिनट पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु अधिक उम्र के कई लोगों को याद होगा कि उस दौर की गर्मियों में टेबल फैन ही हवा का एकमात्र साधन हुआ करता था। मेरे बचपन में हमारे घर में उषा कंपनी का […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  क्या लेट प्रेंगनेंसी के फायदों पर उससे जुड़ी समस्याएं भारी पड़ रही हैं!
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एन. रघुरामन का कॉलम: क्या लेट प्रेंगनेंसी के फायदों पर उससे जुड़ी समस्याएं भारी पड़ रही हैं!

53 साल के एक शानदार परफॉर्मर ने दो दशक से अधिक समय पूरी निष्ठा से काम किया। सहकर्मियों की तुलना में वह कहीं तेजी से कॉर्पोरेट के पायदान चढ़े और आखिरकार बिजनेस के शीर्ष पद तक पहुंचे। लेकिन बीते दो वर्षों में कंपनी के प्रमोटर्स ने उनकी परफॉर्मेंस में गिरावट देखी। वह बेहद दबाव में […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  एआई की दुनिया में असलियत में लोगों से मिलना अब भी फायदेमंद है
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एन. रघुरामन का कॉलम: एआई की दुनिया में असलियत में लोगों से मिलना अब भी फायदेमंद है

‘गूगल… एयरपोर्ट पर रो रहे बच्चे को कैसे संभालें?’ यह सवाल उन क्रिकेटप्रेमियों को जाना-पहचाना लगेगा, जिन्होंने हाल ही में आईपीएल मैच देखे थे। इससे शायद आपको ओपनएआई के चैटजीपीटी वाले उस विज्ञापन की याद आए, जिसमें फ्लाइट लेट होने की वजह से दो लोग एयरपोर्ट पर फंसे हैं। समय बिताने को वे वॉइस कमांड […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  कला को पनपना है तो अमीरों को सहायता और शिक्षितों को प्रोत्साहन देना चाहिए
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एन. रघुरामन का कॉलम: कला को पनपना है तो अमीरों को सहायता और शिक्षितों को प्रोत्साहन देना चाहिए

Hindi News Opinion N Raghuraman Column: Art Needs Rich Support & Educated Encouragement 11 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु आईपीएल पूरा होने की वजह से लंबे समय बाद किसी रविवार की शाम मुझे लगा कि मेरे पास करने के लिए कुछ नहीं था। परिवार ने एकाएक तय किया कि मुंबई के बांद्रा […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  सेहतमंद बने रहने के लिए आपको यह ‘फीवर’ होना जरूरी है!
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एन. रघुरामन का कॉलम: सेहतमंद बने रहने के लिए आपको यह ‘फीवर’ होना जरूरी है!

Hindi News Opinion N. Raghuraman’s Column – To Stay Healthy, You Need To Have This “fever”! 40 मिनट पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन मैनेजमेंट गुरु इस रविवार हमारे कई बुजुर्गों ने भानु सप्तमी मनाई। यह भगवान सूर्य की पूजा का महत्वपूर्ण पर्व है। बुजुर्गों ने समृद्धि, सौभाग्य और अच्छी सेहत की भी कामना की। लेकिन […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  पेट्स में हीलिंग पावर होती है; हमारे साथ रहने वाले जानवर हमारे शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छे होते हैं
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एन. रघुरामन का कॉलम: पेट्स में हीलिंग पावर होती है; हमारे साथ रहने वाले जानवर हमारे शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छे होते हैं

वह किसी तालाब के किनारे बैठी अपने ख्यालों में डूबी थी। अचानक पानी में चार घुड़सवारों की परछाइयां दिखाई देती हैं। वह तत्काल मुड़कर उठती है और चिल्लाती है- ‘चल धन्नो!’ और घोड़ी भी तुरंत मुड़कर उसकी ओर देखती है, मानो वह अपनी मालकिन पर मंडरा रहे खतरे को समझ गई हो। उसके तांगे पर […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  मेडिकल इमरजेंसी का अंदाजा लगाना मुश्किल, लेकिन तैयार रहना आसान
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एन. रघुरामन का कॉलम: मेडिकल इमरजेंसी का अंदाजा लगाना मुश्किल, लेकिन तैयार रहना आसान

Hindi News Opinion N. Raghuraman’s Column: Predicting A Medical Emergency Is Difficult, But Being Prepared Is Easy 10 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन मैनेजमेंट गुरु इस सोमवार रात करीब 9 बजे जालंधर के उद्योगपति दीपक पुजारा अपने बैडमिंटन खेल के बीच में थे। बीते पांच वर्षों से वे उस शहर के कई लोगों की […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  शिक्षित बेटी पूरी अगली पीढ़ी को शिक्षित और आर्थिक रूप से सुरक्षित करती है
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एन. रघुरामन का कॉलम: शिक्षित बेटी पूरी अगली पीढ़ी को शिक्षित और आर्थिक रूप से सुरक्षित करती है

लैपटॉप के सामने बैठी गृहिणी स्पष्टत: उत्साह से भरी आवाज में अपने पति को आवाज देती है, ‘भास्कर, हमारा पहला ऑर्डर।’ पति स्क्रीन की ओर दौड़ते हैं, जैसे उन्हें सुनी हुई बात पर यकीन न हो। उनके नए चटनी के कारोबार को पहला ऑनलाइन ऑर्डर मिला है। यह दृश्य कल समाप्त हुए आईपीएल के दौरान […]