एन. रघुरामन का कॉलम:  मेडिकल इमरजेंसी का अंदाजा लगाना मुश्किल, लेकिन तैयार रहना आसान
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एन. रघुरामन का कॉलम: मेडिकल इमरजेंसी का अंदाजा लगाना मुश्किल, लेकिन तैयार रहना आसान

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10 घंटे पहले

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एन. रघुरामन
मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar

एन. रघुरामन मैनेजमेंट गुरु

इस सोमवार रात करीब 9 बजे जालंधर के उद्योगपति दीपक पुजारा अपने बैडमिंटन खेल के बीच में थे। बीते पांच वर्षों से वे उस शहर के कई लोगों की तरह फिट रहने के लिए रायजादा हंसराज बैडमिंटन स्टेडियम में कुछ घंटे खेल और मनोरंजन में बिताते थे। एक शॉट खेलते समय उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया और वे गिर पड़े।

दूसरे कोर्ट पर खेल रहे उसी शहर के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. नीतीश गर्ग उन्हें गिरता देखकर मदद के लिए दौड़े। उन्होंने कार्डियक मसाज दी, लेकिन दीपक ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। हालांकि अस्पताल स्टेडियम से सिर्फ दो मिनट के ड्राइविंग डिस्टेंस पर था, लेकिन डॉ. गर्ग को लगा कि दीपक इतनी-सी दूरी तक भी नहीं जा सकेंगे।

उन्होंने स्टेडियम की फर्स्ट-एड किट से एक इमरजेंसी गोली देने के बाद सीपीआर जारी रखा। साथ ही वे स्टाफ की मदद से मेडिकल उपकरण और एम्बुलेंस की व्यवस्था में भी लगे रहे, ताकि जल्द अस्पताल पहुंचा जा सके। जब स्टाफ दिल को बिजली का झटका देने वाला जीवनरक्षक उपकरण ‘डिफिब्रिलेटर’ लाया तो उन्होंने झटका दिया और दिल धड़कने लगा। फिर दीपक को अस्पताल ले जाया गया, जहां जांच में 90% और 99% के दो बड़े ब्लॉकेज मिले, जिनमें स्टेंट डाले गए।

सुना है कि कि दीपक अब ट्रीटमेंट के प्रति रेस्पॉन्ड कर रहे हैं और स्वस्थ हो रहे हैं। इससे मुझे 2018 में दीपावली के ठीक दूसरे दिन की एक घटना याद आ गई। उज्जैन के नानाखेड़ा स्थित महानंदानगर स्पोर्ट्स एरिना में कुछ डॉक्टर रिलैक्स होने के लिए बैडमिंटन खेल रहे थे। खेल के बाद फोटोशूट के दौरान उनमें से एक डॉक्टर कुछ ही सेकंड में गिर पड़े।

फोटो लेने वाले ने देखा कि पहली फोटो में डॉक्टर मुस्करा रहे थे, दूसरी में उनके मुंह की स्थिति बदल गई, तीसरी में वे आगे झुक गए और चौथी फोटो में जमीन पर गिर गए। वहां मौजूद ऑस्ट्रेलिया के जाने-माने कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. निलेश मेहता ने स्थिति संभाली और उज्जैन के सीएचएल अस्पताल के तत्कालीन प्रमुख डॉ. निलेश शर्मा को भी मदद के लिए बुलाया गया।

चूंकि वहां खेल रहे बहुत-से लोग डॉक्टर थे और जिन्हें हार्ट अटैक आया वे भी डॉक्टर थे, इसलिए तत्काल कार्रवाई से उनकी जान बच गई। फिर 2023 में जब मैं जलगांव स्थित जैन इरिगेशन गया तो वहां मैंने देखा कि उनका चिकित्सा विभाग सभी कर्मचारियों को एक छोटा प्लास्टिक कंटेनर बांट रहा था और उनसे आग्रह किया जा रहा था कि वे जहां भी जाएं, इसे साथ रखें।

अपने एक सीनियर अधिकारी की नियमित ब्रिस्क वॉक के दौरान हार्ट अटैक से मृत्यु के बाद उन्होंने यह निर्णय किया। कार्डियक अरेस्ट में हर सेकंड मायने रखता है। कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) देने की प्रक्रिया जानने पर आप मदद पहुंचने तक पीड़ित के महत्वपूर्ण अंगों तक रक्त प्रवाह बनाए रख सकते हैं।

यह जांच लेना भी बेहतर है कि क्या आपके स्पोर्ट्स क्लब, जिम या वर्कप्लेस पर ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर (एईडी) है या नहीं। उसकी जगह पहले से पता हो तो कई कीमती मिनट बच सकते हैं। यदि आपको दिल की कोई बीमारी नहीं भी है, तब भी हर समय अपने साथ इमरजेंसी दवाएं रखने के बारे में डॉक्टर से सलाह लें।

जाहिर है कि आप मौके पर किसी डॉक्टर को वो दवाएं देकर उनकी अतिरिक्त मदद कर सकते हैं। इन सभी घटनाओं से बड़ा सबक यह मिलता है कि अचानक होने वाली कार्डियक समस्या किसी के साथ, कहीं भी हो सकती है। ऐसे में जीवन का बचना पूरी तरह तत्काल कार्रवाई पर निर्भर करता है। आप मेडिकल इमरजेंसी का अंदाजा तो नहीं लगा सकते, लेकिन उसके लिए तैयार रह सकते हैं।

फंडा यह है कि एक अच्छा डॉक्टर दोस्त हमेशा बेहतर होता है, क्योंकि वह किसी भी स्वास्थ्य समस्या पर निष्पक्ष राय देता है। लेकिन वही डॉक्टर आपका स्पोर्ट्स पार्टनर भी हो तो यह दोनों हाथों में लड्‌डू होने जैसा है।

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