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गजब: जहां पढ़ाई जानी हैं संस्कृत, वहां बनाए जा रहे जूते; दो अन्य विद्यालयों की हालत तो आपको चौंका देगी

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संस्कृत विद्यालय में जूता इकाई का संचालन हो रहा है। जिले में संस्कृत शिक्षा की बदहाली की यह तस्वीर व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। कभी हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा देने वाले संस्कृत विद्यालय आज जर्जर भवनों और शिक्षकाें की कमी के चलते छात्रों की घटती संख्या से जूझ रहे हैंं।

जिले में 5 संस्कृत विद्यालयों में से दो बंद हो चुके हैं। टैहू, कैलाश के विद्यालयों में पढ़ाई बंद है, जबकि चंद्रपुर, कुकथला और अरेला में किसी प्रकार शिक्षण कार्य चल रहा है। अव्यवस्थाओं के चलते ये तीन विद्यालय भी बंदी की कगार पर हैं। हालत यह है कि जो स्कूल बंद हो चुके हैं उन्हें कागजों से भी गायब कर दिया गया है। इसके अलावा श्री रामकृष्ण संस्कृत महाविद्यालय खंदारी पहले ही बंद हो चुका है। दूसरी ओर, वर्ष 1985 में स्थापित श्री विद्याधर्म वर्द्धनी संस्कृत महाविद्यालय में प्राचार्य समेत चार स्वीकृत पदों में से केवल एक शिक्षक कार्यरत है। वह भी वर्ष 2027 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

 





Shoe Unit Operating on Sanskrit College Premises, Two Schools Shut in Agra

संस्कृत विद्यालय
– फोटो : अमर उजाला


गुड़ की मंडी स्थित श्री विद्याधर्म वर्द्धनी संस्कृत महाविद्यालय में ही उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद विद्यालय चलता था, जो वर्तमान में बंद है। महाविद्यालय के शिक्षक ही माध्यमिक के विद्यार्थियों को पढ़ाते थे। विद्यालय परिसर में जूता इकाई संचालित है। महाविद्यालय के कार्यवाहक प्राचार्य हरि गोपाल ने बताया कि संबंधित विद्यालय वर्ष 2022 से पहले ही बंद हो चुका था। पहले यहां करीब 30 विद्यार्थी थे। यह फैक्टरी किसी बाहरी व्यक्ति को परिसर किराये पर देकर नहीं चलाई जा रही, बल्कि प्रबंधन से जुड़े लोगों की ही है।

 


Shoe Unit Operating on Sanskrit College Premises, Two Schools Shut in Agra

संस्कृत विद्यालय
– फोटो : अमर उजाला


कैलाश स्थित ऋषिकुल ब्रह्मचर्य उपक्षम संस्कृत विद्यालय भी बंद हो चुका है। विद्यालय से जुड़े लोगों ने बताया कि शिक्षकों की कमी और विद्यार्थियों के घटने से विद्यालय का संचालन मुश्किल होता गया और आखिरकार इसे बंद करना पड़ा।

 


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संस्कृत विद्यालय
– फोटो : अमर उजाला


वर्ष 1911 में स्थापित विद्यालय में कभी थे 62 नियमित शिक्षकों के पद

उच्चतर माध्यमिक संस्कृत विद्यालय, चंद्रपुर भी संस्कृत शिक्षा में आई बदहाली की गवाही दे रहा है। विद्यालय के प्रबंधक युगल किशोर चतुर्वेदी ने बताया कि वर्ष 1911 में स्थापित विद्यालय कभी हजारों विद्यार्थियों से गुलजार था। यहां नियमित शिक्षकों के 62 पद थे। विद्यालय संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से संबद्ध रहा है। बाद में लखनऊ संस्कृत शिक्षा परिषद से संचालित है। वर्ष 2018 तक यहां शिक्षक कार्यरत थे। नए शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने से विद्यार्थियों की संख्या घटती गई। नवंबर 2021 में मानदेय पर 3 शिक्षकों की नियुक्ति के बाद यहां 55 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। भवन जर्जर है। इसकी मरम्मत के लिए संबंधित विभाग को पत्र लिखा गया था। ग्रामीण अभियंत्रण सेवा को भवन की मरम्मत की जिम्मेदारी दी गई थी। दो बार एस्टीमेट तैयार होने के बावजूद भवन की स्थिति सुधारने के लिए अब तक काम नहीं हुआ है।

 


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संस्कृत विद्यालय
– फोटो : अमर उजाला


ये हैं जिले के संस्कृत विद्यालय और महाविद्यालय

1- संस्कृत मा.वि. चंद्रपुर कमतरी बाह

2- भारतीय शिक्षा सुधार समिति उ.मा.वि. कुकथला

3- पाश्वनार्थ दिगंबर जैन संस्कृत विद्यालय टैहू ( बंद)

4- ऋषिकुल ब्रह्मचर्य उपक्षम संस्कृत विद्यालय ( बंद)

5- श्री रामकृष्ण संस्कृत महाविद्यालय खंदारी (बंद)

6-श्री विद्याधर्म वर्द्धनी संस्कृत महाविद्यालय

जेडी राकेश कुमार ने बताया कि जो स्कूल बंद हो गए हैं उनके नाम सूची से हटा दिए गए हैं। डीआईओएस को निर्देश देंगे की मौके पर जा कर निरीक्षण करें कि स्कूल परिसर में कैसे फैक्टरी संचालित है। जांच के बाद ही कोई कार्रवाई कर सकते हैं। वहीं संस्कृत विद्यालयों के जीर्णोद्धार के लिए प्रयास कर रहे हैं।




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