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चेतन भगत का कॉलम: ‘मेरा बेटा इंजीनियर बनेगा!’ पर उसके बाद क्या करेगा?

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6 घंटे पहले

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चेतन भगत, अंग्रेजी के उपन्यासकार - Dainik Bhaskar

चेतन भगत, अंग्रेजी के उपन्यासकार

माइक्रोसॉफ्ट ने हाल ही में अपने लगभग 60 हजार कर्मचारियों को स्वैच्छिक रूप से नौकरी छोड़ने के बदले विशेष पैकेज देने की पेशकश की है।

जरूरी नहीं कि ये सभी कर्मचारी नौकरी छोड़ दें, लेकिन यह खबर अपने आप में चौंकाने वाली है। हमारे देश में भी टेक सेक्टर- जो लंबे समय से नई नौकरियां पैदा करने के सबसे भरोसेमंद स्रोतों में से एक रहा है- चिंताजनक रुझान दिखा रहा है।

स्टाफिंग कंपनी हान डिजिटल के अनुसार, भारत के आईटी-बीपीएम क्षेत्र में भर्ती किए नए स्नातकों की संख्या 2021-22 में अनुमानित 4 लाख से घटकर 2025-26 में 1.75 लाख रह गई।

तकनीकी उद्योग में सृजित नई नौकरियों की संख्या भी 2021-22 के 4.45 लाख से घटकर 2025-26 में 1.35 लाख रह गई। यह 70 प्रतिशत की गिरावट है।

और इसके बावजूद भारतीय मध्यवर्ग का अपने बच्चों को इंजीनियर बनाने का सपना कम नहीं हो रहा। एडकॉम रिसर्च द्वारा अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के आधिकारिक डैशबोर्ड के आंकड़ों के आधार पर किए विश्लेषण के अनुसार, इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में नए दाखिलों की संख्या 2021-22 के 9.2 लाख से बढ़कर 2025-26 में 13.5 लाख हो गई। जबकि आज यह स्थिति है कि इंजीनियरिंग में दस दाखिले होते हैं, तब जाकर एक को टेक-सेक्टर की नौकरी मिलती है।

बेशक, इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने वाला हर स्नातक आईटी सेक्टर में नौकरी नहीं करता। लेकिन पहले यह क्षेत्र इंजीनियरिंग स्नातकों के बड़े हिस्से को रोजगार देता था। अब आईटी सेक्टर में जॉब की संभावनाएं घट रही हैं। और इसके बावजूद इंजीनियरिंग में दाखिले लगातार बढ़ रहे हैं। ‘मेरा बेटा इंजीनियर बनेगा!’ वाला सपना आज भी जिंदा है। कोई भी यह नहीं पूछ रहा कि ‘उसके बाद क्या करेगा?’

आईटी में नए स्नातकों के लिए जो थोड़ी-बहुत नौकरियां बची हैं, उनमें वेतन कोई खास आकर्षक नहीं है। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की बड़ी आईटी सेवा कंपनियों में नए कर्मचारियों को मिलने वाला सामान्य शुरुआती वेतन वर्षों से तीन से चार लाख रुपये सालाना के आसपास बना हुआ है। यह समस्या केवल आईटी क्षेत्र तक सीमित नहीं है।

दफ्तरों में काम करने वाले पेशेवरों के रोजगार से जुड़े कई दूसरे उद्योग भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। इसकी वजह यह है कि नए कर्मचारियों को आमतौर पर जो काम सौंपे जाते हैं, वे अपेक्षाकृत तयशुदा प्रक्रियाओं पर आधारित होते हैं। और इन्हें एआई बड़ी आसानी से कर सकता है।

मिसाल के तौर पर, एआई सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में बुनियादी कोडिंग, डीबगिंग, टेस्टिंग जैसे काम कर सकता है। कानूनी क्षेत्र में अनुबंधों की समीक्षा और मुकदमों से संबंधित शोध कर सकता है। कंसल्टिंग क्षेत्र में प्रजेंटेशन तैयार कर सकता है और ग्राहक सेवा में रोजमर्रा के सवालों के जवाब दे सकता है। इसका दूसरा पहलू भी है।

जब आज के वरिष्ठ कर्मचारी सेवानिवृत्त होंगे, तब उनकी जगह लेने के लिए पर्याप्त अनुभवी कर्मचारी नहीं होंगे। अगर आप नए स्नातकों को नौकरी ही नहीं देंगे, तो उन्हें काम का अनुभव कैसे मिलेगा?

आर्थिक उदारीकरण के बाद से भारतीय परिवार सफलता के एक जाने-पहचाने फॉर्मूले पर चलते आए हैं। मन लगाकर पढ़ाई करो। अच्छे अंक लाओ। अच्छे कॉलेज में दाखिला लो। डिग्री हासिल करो।

कैम्पस प्लेसमेंट में नौकरी पाओ। वेतन कमाओ और आत्मनिर्भर बन जाओ। लेकिन अब एआई ने इस दौड़ के नियम बदल दिए हैं। ऐसे में हमें अपनी सोच और करियर की योजना में बदलाव लाने होंगे।

पहला बदलाव यह कि हर दिन एक घंटा एआई की दुनिया में हो रहे नए डेवलपमेंट्स को समझने में लगाएं। इस क्षेत्र की अग्रणी कंपनियों की गतिविधियों पर नजर रखें।

नवीनतम एआई टूल्स का इस्तेमाल करके कुछ प्रोडक्टिव काम करें। इस उभरती इंडस्ट्री के अनुरूप स्किल्स विकसित करें। आने वाले समय में एआई का क्षेत्र बड़ी तादाद में नई नौकरियां पैदा करने वाला है।

दूसरे, इंजीनियरिंग की डिग्री पाने का जुनून छोड़ें। पहले इंजीनियरिंग की डिग्री आपको नौकरी और प्रतिष्ठा दिलाती थी, लेकिन अब इसकी गारंटी नहीं रह गई है। और तीसरे, ब्लू-कॉलर जॉब्स को हिकारत की नजर से ना देखें।

हर कोई ऑफिस में बैठकर काम करने वाली नौकरी करना चाहता है, जबकि यही नौकरियां एआई के कारण सबसे अधिक खतरे में हैं। हम ऐसे दौर की ओर बढ़ रहे हैं, जब एक प्लम्बर की नौकरी किसी प्रोग्रामर की नौकरी से ज्यादा सुरक्षित है।

खुद ही सोचें कि बेहतर स्थिति में कौन है? हर महीने 80 हजार कमाने वाला एक ऑटोमोबाइल रिपेयर टेक्नीशियन या इंजीनियरिंग की डिग्री लेकर घर में बैठा बेरोजगार नौजवान?

एआई क्रांति हमें यह सबक सिखाने जा रही है कि अपने हाथों से काम करना कम्प्यूटर पर काम करने से कमतर नहीं है। जो बात मायने रखती है, वो ये है कि आपके पास कोई उपयोगी हुनर हो, आप उसमें दक्ष हों और उसके जरिये सम्मानजनक आजीविका कमा सकें। (ये लेखक के अपने विचार हैं)

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