जरूरत की खबर- ब्लड टेस्ट करवाने जा रहे हैं:  जानें टेस्ट से पहले क्या करें, क्या नहीं, मामूली गलती से भी बदल सकती है रिपोर्ट
महिला

जरूरत की खबर- ब्लड टेस्ट करवाने जा रहे हैं: जानें टेस्ट से पहले क्या करें, क्या नहीं, मामूली गलती से भी बदल सकती है रिपोर्ट

Spread the love


54 मिनट पहलेलेखक: मनीषा पांडेय

  • कॉपी लिंक

बीमारी को पहचानने और उसका इलाज करने का मुख्य आधार है- ब्लड टेस्ट। लेकिन अगर टेस्ट से पहले सही तैयारी न की जाए, तो रिपोर्ट प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट प्रभावित होने से इलाज भी प्रभावित हो सकता है।

जानकारी न होने से कई बार लोग बिना जरूरत के भी फास्टिंग कर लेते हैं, या फास्टिंग वाले टेस्ट से पहले चाय-कॉफी पी लेते हैं या दवा खा लेते हैं।

इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में हम बात करेंगे कि ब्लड टेस्ट कराने का सही तरीका क्या है। साथ ही जानेंगे कि-

  • ब्लड टेस्ट से पहले क्या करें और क्या न करें?
  • कौन-सी दवाइयां, विटामिन्स और सप्लीमेंट्स न खाएं।

एक्सपर्ट- डॉ. मनीषा अग्रवाल, कंसल्टेंट- क्लिनिकल पैथोलॉजी, नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर

सवाल- क्या हर ब्लड टेस्ट के लिए फास्टिंग जरूरी होती है?

जवाब- नहीं। हर ब्लड टेस्ट के लिए फास्टिंग (खाली पेट रहना) जरूरी नहीं होती। कई जांचें बिना फास्टिंग के भी उतनी ही सटीक होती हैं।

इसलिए ब्लड टेस्ट से पहले खुद से फास्टिंग करने या न करने का फैसला न करें। जो टेस्ट कराना है, उसके लिए डॉक्टर या लैब के द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करें।

सवाल- किन टेस्ट के लिए 8-12 घंटे फास्टिंग जरूरी होती है?

जवाब- पूरी लिस्ट नीचे ग्राफिक में देखें-

सवाल- किन टेस्ट के लिए फास्टिंग जरूरी नहीं होती?

जवाब- पूरी लिस्ट नीचे ग्राफिक में देखें-

सवाल- क्या फास्टिंग के दौरान पानी पी सकते हैं?

जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझें-

  • हां। फास्टिंग के दौरान सादा पानी पीना सुरक्षित है।
  • इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होती और नस से ब्लड सैंपल लेना भी आसान होता है।
  • हालांकि पानी में चीनी, नमक, नींबू या कोई फ्लेवर मिलाकर नहीं पीना चाहिए।
  • अगर डॉक्टर ने किसी विशेष टेस्ट के लिए अलग निर्देश दिए हों, तो उन्हीं का पालन करें।

सवाल- क्या फास्टिंग के दौरान चाय, कॉफी या जूस पी सकते हैं?

जवाब- नहीं। अगर किसी ब्लड टेस्ट के लिए फास्टिंग की सलाह दी गई है, तो चाय, कॉफी, जूस, दूध, सॉफ्ट ड्रिंक या कोई भी कैलोरी वाला पेय नहीं पीना चाहिए। ये ब्लड शुगर, इंसुलिन और कुछ अन्य जांचों के परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं। फास्टिंग के दौरान सिर्फ सादा पानी ही पिएं।

सवाल- क्या ब्लड सैंपल देने से पहले सुबह थायरॉइड की दवा ले सकते हैं?

जवाब- आमतौर पर नहीं। यदि थायरॉइड फंक्शन टेस्ट (TSH, T3, T4) कराना है तो ब्लड सैंपल देने के बाद थायरॉइड की दवा लेना बेहतर है। दवा पहले लेने से कुछ थायरॉइड हॉर्मोन का स्तर अस्थाई रूप से बदल सकता है, जिससे रिपोर्ट प्रभावित हो सकती है।

हालांकि अगर किसी दूसरे ब्लड टेस्ट के लिए सैंपल दे रहे हैं और थायरॉइड का टेस्ट नहीं होना है, तो सुबह थायरॉइड की दवा ले सकते हैं।

सवाल- ब्लड टेस्ट से पहले क्या करें?

जवाब- पॉइंटर्स से समझें-

  • डॉक्टर या लैब के निर्देशों का पालन करें।
  • जिस टेस्ट के लिए फास्टिंग जरूरी हो, उतने समय तक खाली पेट रहें।
  • सादा पानी पर्याप्त मात्रा में पीते रहें।
  • टेस्ट से एक रात पहले अच्छी और पर्याप्त नींद लें।
  • अपनी सभी दवाओं और सप्लीमेंट्स की जानकारी डॉक्टर या लैब को दें।
  • यदि डॉक्टर ने कहा हो तो कुछ दवाएं सैंपल देने के बाद ही खाएं।
  • पहले की जांच रिपोर्ट साथ लेकर जाएं, ताकि जरूरत पड़ने पर तुलना की जा सके।
  • टेस्ट के लिए समय पर पहुंचें और घबराहट या जल्दबाजी से बचें।

सवाल- ब्लड टेस्ट से पहले क्या न करें?

जवाब- पॉइंटर्स से समझें-

  • फास्टिंग के दौरान चाय, कॉफी, जूस या अन्य कैलोरी वाले पेय न लें।
  • टेस्ट से 24 घंटे पहले शराब न पिएं।
  • टेस्ट से ठीक पहले सिगरेट न पिएं, तंबाकू न खाएं।
  • ब्लड सैंपल देने से पहले भारी एक्सरसाइज या जिम न करें।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना विटामिन, हर्बल या अन्य सप्लीमेंट्स न लें।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना नियमित दवाएं बंद या शुरू न करें।
  • फास्टिंग वाले टेस्ट से पहले च्युइंग गम, कैंडी या माउथ फ्रेशनर न लें।
  • एक रात पहले लंबा ट्रैवल न करें, रात भर जागें नहीं।

सवाल- कौन-कौन सी दवाएं रिपोर्ट बदल सकती हैं?

जवाब- पॉइंटर्स से समझिए-

स्टेरॉयड- ब्लड शुगर, WBC (व्हाइट ब्लड सेल्स) और अन्य पैरामीटर बदल सकते हैं।

थायरॉइड की दवा- थायरॉइड फंक्शन टेस्ट प्रभावित हो सकता है।

आयरन सप्लीमेंट- आयरन प्रोफाइल रिपोर्ट प्रभावित हो सकती है।

बायोटिन (हेयर-स्किन-नेल सप्लीमेंट)- थायरॉइड, ट्रोपोनिन समेत कई इम्यूनो टेस्ट की रिपोर्ट गलत आ सकती है।

विटामिन बी 12 और विटामिन D सप्लीमेंट- इनके स्तर की जांच प्रभावित हो सकती है।

डायबिटीज की दवाएं और इंसुलिन- ब्लड शुगर की रिपोर्ट बदल सकती है।

ब्लड थिनर (खून पतला करने वाली दवाएं)- खून जमने से जुड़े टेस्ट प्रभावित हो सकते हैं।

सवाल- एक्सरसाइज करने के बाद ब्लड टेस्ट कराने से क्या नुकसान हो सकता है?

जवाब- पॉइंटर्स से समझें-

  • ब्लड शुगर के स्तर में बदलाव आ सकता है।
  • क्रिएटिन किनेज (CK/CPK) बढ़ सकता है, जिससे मांसपेशियों की चोट का भ्रम हो सकता है।
  • लैक्टेट का स्तर बढ़ सकता है।
  • लिवर एंजाइम (AST, ALT) अस्थाई रूप से बढ़ सकते हैं।
  • व्हाइट ब्लड सेल (WBC) की संख्या कुछ समय के लिए बढ़ सकती है।
  • क्रिएटिनिन का स्तर हल्का बढ़ सकता है।
  • शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) होने पर कुछ रिपोर्ट प्रभावित हो सकती हैं।

सलाह: ब्लड टेस्ट से कम से कम 24 घंटे पहले भारी वर्कआउट से बचें। सामान्य टहलने या हल्की गतिविधि से समस्या नहीं है।

सवाल- क्या शराब पीने से रिपोर्ट बदल सकती है?

जवाब-हां। ब्लड टेस्ट से पहले शराब पीने से कई जांचों के नतीजे प्रभावित हो सकते हैं, जैसेकि-

  • लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) के परिणाम बदल सकते हैं।
  • ब्लड शुगर का स्तर बढ़ या घट सकता है।
  • ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर बढ़ सकता है।
  • डिहाइड्रेशन की वजह से कुछ ब्लड पैरामीटर प्रभावित हो सकते हैं।
  • यूरिक एसिड का स्तर बढ़ सकता है।
  • कुछ मामलों में इलेक्ट्रोलाइट्स के स्तर पर भी असर पड़ सकता है।

सलाह: बेहतर और सटीक रिपोर्ट के लिए ब्लड टेस्ट से कम-से-कम 24 घंटे पहले शराब न पिएं।

सवाल- क्या सिगरेट पीने से रिपोर्ट बदल सकती है?

जवाब- हां। ब्लड टेस्ट से ठीक पहले सिगरेट या अन्य तंबाकू उत्पादों का सेवन कुछ जांचों के परिणामों को प्रभावित कर सकता है, जैसेकि-

  • ब्लड शुगर का स्तर बढ़ सकता है।
  • ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट अस्थाई रूप से बढ़ सकते हैं।
  • स्ट्रेस हार्मोन (कैटेकोलामाइन्स और कॉर्टिसोल) का स्तर बढ़ सकता है।
  • व्हाइट ब्लड सेल (WBC) की संख्या प्रभावित हो सकती है।
  • कुछ मामलों में लिपिड प्रोफाइल के परिणाम भी प्रभावित हो सकते हैं।

सलाह: बेहतर और सटीक रिपोर्ट के लिए ब्लड सैंपल देने से कम-से-कम 1-2 घंटे पहले धूम्रपान न करें। यदि फास्टिंग टेस्ट है, तो फास्टिंग के दौरान धूम्रपान से पूरी तरह बचें।

सवाल- क्या नींद पूरी न होने से भी रिपोर्ट प्रभावित हो सकती है?

जवाब- हां। पूरी नींद न लेने से कुछ ब्लड टेस्ट के नतीजों पर असर पड़ सकता है, जैसेकि-

  • ब्लड शुगर का स्तर बढ़ सकता है।
  • कॉर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) बढ़ सकता है।
  • ब्लड प्रेशर अस्थाई रूप से बढ़ सकता है।
  • इन्फ्लेमेशन से जुड़े कुछ मार्कर प्रभावित हो सकते हैं।
  • व्हाइट ब्लड सेल (WBC) की संख्या में हल्का बदलाव आ सकता है।

सलाह: सटीक रिपोर्ट के लिए ब्लड टेस्ट से पहले 7-8 घंटे अच्छी नींद लेने की कोशिश करें।

सवाल- क्या पीरियड्स के दौरान महिलाओं की रिपोर्ट प्रभावित हो सकती है?

जवाब- हां। पीरियड्स के दौरान कुछ ब्लड टेस्ट के नतीजों पर असर पड़ सकता है, जैसेकि-

  • हीमोग्लोबिन (Hb) का स्तर हल्का कम आ सकता है, खासकर ज्यादा ब्लीडिंग होने पर।
  • आयरन और फेरिटिन का स्तर प्रभावित हो सकता है।
  • ईएसआर (ESR) सामान्य से थोड़ा बढ़ सकता है।
  • कुछ हॉर्मोन टेस्ट (जैसे FSH, LH, Estradiol, Progesterone) इस पर निर्भर करते हैं कि पीरियड्स के किस दिन सैंपल लिया गया है।
  • ज्यादा दर्द, तनाव या अस्वस्थता भी कुछ पैरामीटर पर हल्का असर डाल सकती है।

सलाह: अगर हार्मोन संबंधी जांच करानी है, तो डॉक्टर द्वारा बताए गए मासिक चक्र के सही दिन ही टेस्ट कराएं। लैब को यह जरूर बताएं कि आपके पीरियड्स चल रहे हैं। बाकी जेनेरिक CBC टेस्ट पीरियड्स के दौरान न करवाना ही बेहतर है।

सवाल- क्या ब्लड टेस्ट सुबह ही कराना बेहतर होता है?

जवाब- यह टेस्ट पर निर्भर करता है। हर ब्लड टेस्ट सुबह कराना जरूरी नहीं होता, लेकिन कुछ जांचें सुबह और तय समय पर कराने से ज्यादा सटीक रिजल्ट मिलता है। इसे पॉइंटर्स से समझें-

  • फास्टिंग ब्लड शुगर और लिपिड प्रोफाइल आमतौर पर सुबह फास्टिंग के बाद कराना अच्छा रहता है।
  • कॉर्टिसोल जैसे हार्मोन टेस्ट सुबह ही कराए जाते हैं, क्योंकि दिन भर इनका स्तर बदलता रहता है।
  • जिन टेस्ट के लिए फास्टिंग जरूरी नहीं है, वे अक्सर दिन में किसी भी समय कराए जा सकते हैं।

सलाह: यदि किसी टेस्ट को बार-बार कराना हो, तो हर बार लगभग एक ही समय पर जांच कराना बेहतर होता है, ताकि रिपोर्ट की तुलना सही तरीके से की जा सके।

सवाल- क्या हर बार एक ही लैब से टेस्ट कराना चाहिए?

जवाब- जरूरी तो नहीं है, लेकिन अगर किसी बीमारी की नियमित मॉनिटरिंग हो रही है, तो हर बार एक ही विश्वसनीय और मान्यता प्राप्त लैब से टेस्ट कराना बेहतर माना जाता है।

इससे अलग-अलग मशीनों, जांच तकनीकों और रेफरेंस वैल्यू की वजह से होने वाले छोटे-मोटे अंतर से बचा जा सकता है। इससे रिपोर्ट की तुलना करना आसान होता है।

अगर लैब बदलनी पड़े, तो रिपोर्ट दिखाते समय डॉक्टर को यह जरूर बताएं कि जांच अलग लैब में कराई गई है।

………………….

जरूरत की ये खबर भी पढ़िए

जरूरत की खबर- क्या कोलेस्ट्रॉल सचमुच हमारा दुश्मन है?: डॉक्टर से समझें गुड-बैड कोलेस्ट्रॉल का साइंस, ये कब जरूरी और कब खतरनाक

कोलेस्ट्रॉल का नाम सुनते ही अक्सर दिमाग में एक ही बात आती है, यह शरीर के लिए नुकसानदायक है। लेकिन कहानी इतनी सीधी भी नहीं है। कोलेस्ट्रॉल हमारी कोशिकाओं, हार्मोन और विटामिन D के निर्माण के लिए जरूरी है। परेशानी तब शुरू होती है, जब शरीर में इसका संतुलन बिगड़ जाता है और खासतौर पर LDL यानी बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने लगता है। पूरी खबर पढ़िए…

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *