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ज्यां द्रेज का कॉलम: मिलजुलकर काम करना और मुनाफा कमाना मुमकिन है

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3 घंटे पहले

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ज्यां द्रेज प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री व समाजशास्त्री - Dainik Bhaskar

ज्यां द्रेज प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री व समाजशास्त्री

पिछले महीने मेरा एक सपना सच हुआ : मुझे स्पेन के बास्क में मोंड्रागॉन वर्कर को-ऑपरेटिव्स (मजदूर सहकारी संस्थाओं) को देखने का मौका मिला। यह दुनिया के सबसे अहम आर्थिक प्रयोगों में से है। मोंड्रागॉन ग्रुप 100 से ज्यादा सहकारी संस्थाओं का एक संघ है। इनमें से कई औद्योगिक कंपनियां हैं।

वे साइकिल, लिफ्ट, ऑटो पार्ट्स और घरेलू उपकरण जैसे कई तरह के सामान बनाती हैं। अन्य सहकारिताएं वित्तीय सेवाएं, खान-पान की सेवाएं, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और बुजुर्गों की देखभाल जैसी सेवाएं प्रदान करती हैं। मोंड्रागॉन को-ऑपरेटिव्स में कुल मिलाकर लगभग 80,000 कर्मचारी काम करते हैं।

मोंड्रागॉन ग्रुप ने कई ऐसी सहायक संस्थाएं बनाई हैं, जो वर्कर को-ऑपरेटिव्स को फलने-फूलने में मदद करती हैं। मोंड्रागॉन यूनिवर्सिटी युवाओं को ट्रेनिंग देती है और सहकारी मूल्यों को बढ़ावा देती है। लाबोराल कुट्चा- जो एक सहकारी बैंक है- को-ऑपरेटिव्स को वित्तीय सेवाएं प्रदान करता है। लगुन-आरो मोंड्रागॉन के कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा का इंतजाम करती है। दिलचस्प बात यह है कि ये सभी संस्थाएं खुद भी को-ऑपरेटिव ही हैं- यहां तक कि यूनिवर्सिटी भी।

यह शानदार इको-सिस्टम जल्दी नहीं बना। इसे 70 सालों में धीरे-धीरे तैयार किया गया है। मोंड्रागॉन की कहानी 1956 में शुरू हुई, जब पांच युवा इंजीनियरों ने को-ऑपरेटिव मॉडल पर चूल्हा बनाने वाली कंपनी शुरू करने का फैसला किया।

उल्गोर नाम की यह कंपनी सफल रही और इसने दूसरी को-ऑपरेटिव्स को भी प्रेरित किया। समय के साथ, इन को-ऑपरेटिव्स को क्रेडिट, वैज्ञानिक रिसर्च और सामाजिक सुरक्षा जैसी सहायक सुविधाओं की जरूरत महसूस हुई। ये सहायक सुविधाएं एक-एक करके तैयार की गईं।

मोंड्रागॉन को-ऑपरेटिव्स का एक साझा संगठनात्मक ढांचा है। इनका मालिकाना हक कर्मचारियों के पास होता है। आम सभा (जनरल असेंबली) में हर कर्मचारी का एक वोट होता है। आम सभा एक संचालन समिति चुनती है। संचालन समिति प्रबंधकों की नियुक्ति करती है। प्रबंधक संचालन समिति और आम सभा के प्रति जवाबदेह होते हैं।

कभी-कभी मैनेजर बाहर से नियुक्त किए जाते हैं। लेकिन आम तौर पर, उन्हें सहकारिता के सदस्यों में से ही चुना जाता है। अंदर के मैनेजरों की नियुक्ति इसलिए संभव हो पाई है, क्योंकि मोंड्रागॉन ने शुरू से ही शिक्षा और प्रशिक्षण पर बहुत जोर दिया है।

इन को-ऑपरेटिव्स की आर्थिक सफलता वाकई उल्लेखनीय है। इनमें से कुछ न सिर्फ स्पेन, बल्कि पूरे यूरोप में अपने क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में गिनी जाती हैं। ये को-ऑपरेटिव्स मुश्किल हालात का सामना करने में भी बहुत मजबूत साबित हुई हैं।

इन्होंने 1970 के दशक के ऊर्जा संकट और 2008 के वित्तीय संकट जैसी गंभीर आर्थिक कठिनाइयों का भी डटकर सामना किया, जबकि उस समय स्पेन की कई कंपनियां बंद हो रही थीं। सिर्फ एक बड़ी असफलता हुई। 2013 में मोंड्रागॉन समूह की सबसे पुरानी सहकारी संस्था दिवालिया हो गई। मोंड्रागॉन ग्रुप के लिए यह एक बहुत ही दुखद घटना थी, लेकिन वह इससे उबरने में कामयाब रहा।

इसका यह मतलब नहीं है कि अब मोंड्रागॉन में सब कुछ ठीक-ठाक है। दुनिया भर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के दबाव के कारण वहां की सहकारी संस्थाओं को कुछ समझौते करने पड़े हैं। उदाहरण के लिए, मोंड्रागॉन की कुछ सहकारी संस्थाओं ने दूसरे देशों में अपनी शाखाएं खोली हैं, लेकिन वे सहकारी संस्थाएं नहीं हैं।

इसी तरह, कई सहकारी संस्थाओं ने अस्थायी मजदूर रखने शुरू कर दिए हैं, जो उन सहकारी संस्थाओं के सदस्य नहीं होते। कारोबार के बढ़ते आकार और जटिलता के कारण सहकारी संस्थाओं में प्रबंधकों का प्रभाव भी बढ़ गया है।

इस तरह, अभी भी कई चुनौतियां बाकी हैं। फिर भी, मोंड्रागॉन की सहकारी संस्थाओं ने एक बहुत महत्वपूर्ण काम करके दिखाया है। उन्होंने साबित किया है कि उद्योगों का मालिकाना हक मजदूरों के हाथ में हो सकता है और उन्हें मजदूरों के हित में चलाया जा सकता है, न कि किसी और के मुनाफे के लिए। यह सीख उन सभी लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जो पूंजीवाद से तंग आ चुके हैं।

इन सहकारी संस्थाओं ने एक महत्वपूर्ण काम कर दिखाया है। उन्होंने साबित किया है कि उद्योगों का मालिकाना हक मजदूरों के हाथ में हो सकता है और उन्हें मजदूरों के हित में चलाया जा सकता है, न कि किसी और के मुनाफे के लिए। (ये लेखक के अपने विचार हैं)

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