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टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट (IPO) करने और इसके मैनेजमेंट को लेकर विवाद बढ़ गया है। देश-विदेश के 6 बड़े पारसी संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर टाटा ट्रस्ट्स का समर्थन किया है। संगठनों ने पीएम से अपील की है कि टाटा ग्रुप के सालों पुराने मालिकाना हक और कामकाज के तरीके को बचाया जाए, ताकि उसकी समाज सेवा और परोपकार की परंपरा जारी रहे। संगठनों का कहना है कि इसे महज दो शेयरधारकों की लड़ाई न समझा जाए, क्योंकि इसका सीधा असर देश के सबसे बड़े और भरोसेमंद बिजनेस ग्रुप के भविष्य पर पड़ेगा। शेयर बाजार में लिस्टिंग का नुकसान पारसी संगठनों का कहना है कि टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट करना सिर्फ नियमों का मामला नहीं है। अगर यह बाजार में आती है, तो कंपनी पर हर 3 महीने में मुनाफा दिखाने और शेयर की कीमत बढ़ाने का दबाव रहेगा। इससे टाटा का सालों पुराना भरोसा और काम करने का तरीका कमजोर पड़ सकता है, जिससे वे भविष्य के बड़े प्रोजेक्ट्स और समाज सेवा से भटक सकते हैं। टाटा संस में 66% हिस्सेदारी चैरिटेबल ट्रस्ट्स की टाटा ग्रुप की मुख्य कंपनी ‘टाटा संस’ की 66% हिस्सेदारी टाटा के चैरिटेबल ट्रस्ट्स के पास है। इस वजह से कंपनियों से होने वाली कमाई का एक बड़ा हिस्सा सीधे समाज सेवा, अस्पतालों, शिक्षा और रिसर्च में खर्च होता है। पारसी संगठनों का कहना है कि इसी खास मॉडल की वजह से टाटा बिना किसी दबाव के देश के बड़े और लंबे समय वाले प्रोजेक्ट्स में पैसा लगा पाता है। देश के विकास में टाटा का योगदान पारसी संगठनों का कहना है कि टाटा ने सिर्फ कंपनियां ही नहीं बनाईं, बल्कि देश को टाटा मेमोरियल कैंसर अस्पताल और देश के बड़े रिसर्च संस्थान जैसे- IISc और TIFR भी दिए हैं। आज भी टाटा ग्रुप देश के बड़े और नए प्रोजेक्ट्स- जैसे सेमीकंडक्टर, डिफेंस, इलेक्ट्रिक गाड़ियां और साफ ऊर्जा- में भारी पैसा लगा रहा है। संगठनों के मुताबिक, भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने के लिए टाटा के इस सेवा भाव और काम करने के तरीके को बचाना बहुत जरूरी है।
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