डॉ. राम चरण का कॉलम:  मीटिंग करना भी एक स्किल है, इस पर ठीक से काम करें
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डॉ. राम चरण का कॉलम: मीटिंग करना भी एक स्किल है, इस पर ठीक से काम करें

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दुनिया के तमाम संस्थानों में बैठकें होती हैं, लेकिन यह किसी से छुपा नहीं है कि बैठकों में बहुत समय नष्ट होता है। इससे लोग फ्रस्ट्रेट होते हैं। ऊब जाते हैं। एक जैसे विषयों पर बार-बार चर्चाएं होती रहती हैं, जो किसी नतीजे पर नहीं पहुंचतीं। यह समय के साथ ऊर्जा की भी बर्बादी है। और इससे लोगों की मानसिकता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसका समाधान कैसे करें? डिजिटलीकरण के इस युग में सूचनाएं सीधे आपके पास उसी फॉर्मेट में उपलब्ध होती हैं, जिनमें आप उन्हें चाहते हैं। एआई ने यह सम्भव बना दिया है। ऐसे में अब आपको भौतिक रूप से किसी बैठक की आवश्यकता नहीं है। दुनिया भर की यात्रा करने की प्रतीक्षा भी न करें। आज तमाम सूचनाएं आपकी सुविधा के अनुसार, किसी भी समय, किसी भी रूप में उपलब्ध हैं। ऐसे में हमें बैठकों की आवश्यकता संयुक्त अभ्यास के लिए होती है- किन्हीं निर्णयों पहुंचने के लिए। मैं इन्हें जॉइंट प्रैक्टिस सेशन्स कहता हूं। मनुष्यों के द्वारा आपसी सहयोग का सबसे प्राचीन प्रयास खेल हैं। खेलों में सूचनाएं निरंतर प्रवाहित होती हैं और उनमें पूरी पारदर्शिता होती है। किसी भी मैच की तैयारी के लिए खिलाड़ी शारीरिक रूप से साथ अभ्यास करते हैं। वे क्षण भर में निर्णय लेते हैं। बार-बार का अभ्यास उनमें ये इंस्टिंक्ट्स और इंट्यूशन विकसित करता है कि सहयोग कैसे करना है। बैठकों का उद्देश्य भी किसी मुद्दे, प्रश्न या चुनौती पर संयुक्त अभ्यास का होना चाहिए। उनका एजेंडा भी उसी के अनुरूप तय होना चाहिए। बैठक में एक लीडर होना चाहिए- जिसके पास उसे संचालित करने का कौशल हो। सूचनाओं का विश्लेषण पहले से कर लिया जाना चाहिए। कुछ सरल बातों पर विचार करें : जैसे यह मुद्दा क्यों सामने आया है? इसके विकल्प क्या हैं? इसको लेकर क्या आइडियाज़ हैं? इसमें क्या जोखिम हैं? लोगों से मिलने वाले इनपुट्स को लीड करें, उनकी चिंताओं को सम्बोधित करें और निर्णय लें कि किसी दिशा में कैसे आगे बढ़ा जाए। इस बारे में पहला नियम यह है कि जिस मुद्दे, प्रश्न या चुनौती पर निर्णय लिया जाना है, उसको लेकर पूरी स्पष्टता होनी चाहिए। दूसरा यह कि मीटिंग-रूम में सही संख्या में लोग होने चाहिए। न अधिक, न कम। लेकिन विविधता बहुत जरूरी है। तीसरा यह कि सुनिश्चित करें लोग दूरगामी और तात्कालिक दोनों विकल्पों की तलाश करें। उनकी सोच का विस्तार करें। विजुअल्स की मदद लें, व्हाइटबोर्ड या फ्लिप चार्ट पर लिखें, इसे दोहराएं। इससे लोगों की क्षमताएं बढ़ेंगी। फिर आप तय करेंगे कि कौन-सा विकल्प बेहतर है और क्यों। और उसे अमल में लाने में क्या कठिनाइयां हैं? लिखित रूप में दर्ज करें कि किन-किन विकल्पों पर विचार किया गया, किसे चुना गया, क्यों चुना गया और कौन-से समझौते किए गए। बैठक समाप्त करने से पहले यह सब लिखित रूप में होना चाहिए। लोगों को स्पष्ट दायित्व सौंपे जाएं कि वे क्या करेंगे और आगे की कार्रवाई कैसे सुनिश्चित की जाएगी। जैसे-जैसे आप इन संयुक्त अभ्यास सत्रों का अभ्यास करेंगे, बैठकों की संख्या घटेगी। आप अपने-अपने तरीकों से प्रैक्टिस करेंगे। और उससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि आपकी क्षमताएं बढ़ेंगी। दस से अधिक लोगों वाला कोई भी संस्थान तरह-तरह की बैठकें करता है। समस्याओं के समाधान के लिए बैठकें होती हैं। परियोजनाओं के रिव्यू के लिए बैठकें होती हैं। बोर्ड मीटिंग्स होती हैं। परफॉर्मेंस की समीक्षा के लिए बैठकें होती हैं। वन-टु-वन मीटिंग्स होती हैं। अप्रेजल के लिए मीटिंग्स होती हैं। कुछ बैठकें किसी विशिष्ट संकट से संबंधित होती हैं। कुछ दीर्घकालिक रणनीतिक योजनाओं से जुड़ी होती हैं। हर तरह की बैठक के लिए अलग नजरिया जरूरी है। ब्रेनस्टॉर्मिंग वाली बैठकों के लिए अनौपचारिकता महत्वपूर्ण है। मैं मुम्बई में व्यावसायिक जगत के लोगों को सुबह की सैर पर साथ जाते और बिजनेस पर चर्चा करते देखता हूं- वह भी ब्रेनस्टॉर्मिंग है। इसके लिए देखें कि बैठक में शामिल होने वाले लोग कौन हैं, अनौपचारिकता का स्तर क्या है और उसका संचालन कौन कर रहा है। लेकिन हर मीटिंग में एक कैप्टेन होना चाहिए। उस कैप्टेन को यह स्पष्ट होना चाहिए कि बैठक का नतीजा क्या निकलना चाहिए। तैयारी करने, सही स्ट्रक्चर बनाने, एजेंडा तय करने, आवश्यक जानकारी जुटाने, बातचीत को दिशा देने और विचारों को इंटीग्रेट करने की जिम्मेदारी उसी की होती है। मैं इसलिए उन्हें कप्तान कहना पसंद करता हूं, क्योंकि वे उपस्थित लोगों की मनोस्थिति और समय- दोनों के लिए उत्तरदायी होते हैं। बैठकों की भाषा सरल रखें। स्पष्ट रखें। यदि स्पष्टता न हो, तो अपनी बात को दोहराएं। अपनी बैठकों को सुधारिए। आपका संगठन उससे अधिक मजबूत होगा। बैठकों का उद्देश्य किसी मुद्दे, प्रश्न या चुनौती पर संयुक्त अभ्यास का होना चाहिए। उनका एजेंडा भी उसी के अनुरूप तय होना चाहिए। बैठक में एक कैप्टेन का होना जरूरी है- जिसके पास उसे संचालित करने का कौशल हो।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)



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