24 मिनट पहले
- कॉपी लिंक

अब भारत में ही एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) का इंजन बनेगा। इसके लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और रॉल्स-रॉयस ने शुक्रवार को पार्टनरशिप की है।
दोनों कंपनियां मिलकर एक स्पेशल एयरोस्पेस गैस टर्बाइन कॉमप्लेक्स बनाएगी। इसमें पूरी तरह स्वदेशी और सॉवरेन इंजन का डिजाइन, डेवलपमेंट, टेस्टिंग, मैन्युफैक्चरिंग और डिलीवरी करेंगी। साथ ही लाइफटाइम सपोर्ट भी शामिल दिया जाएगा।
भारत में जेट इंजनों का स्पेशल सेंटर बनेगा
रिलायंस और रॉल्स-रॉयस मिलकर भारत में एक ‘एयरोस्पेस गैस टर्बाइन कॉम्प्लेक्स’ बनाने की तैयारी में हैं। यह देश में इंजनों की नई टेक्नोलॉजी तैयार करने वाले सबसे बड़े सेंटर की तरह काम करेगा।
इसके बनने से भारत को हाई-टेक फाइटर जेट इंजन बनाने के मामले में पूरी दुनिया में एक नई मजबूती मिलेगी।
अनंत बोले- भारत आत्मनिर्भर बनेगा
रिलायंस इंडस्ट्रीज के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनंत अंबानी ने कहा कि देश की सुरक्षा और मजबूती के लिए भारत के पास अपनी खुद की तकनीक होना बहुत जरूरी है।
रॉल्स-रॉयस के साथ मिलकर हम भारत में ही फाइटर जेट के इंजन बनाने का सिस्टम तैयार करेंगे। इससे भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर तो बनेगा ही, साथ ही दुनिया के बाजारों को टक्कर भी दे सकेगा। यह आत्मनिर्भर भारत मिशन के सपने को पूरा करने में हमारा एक योगदान है।

रॉल्स-रॉयस के CEO बोले- भारत के लिए मील का पत्थर
रॉल्स-रॉयस के सीईओ तुफान एर्गिनबिल्गिक ने कहा कि रिलायंस के साथ यह पार्टनरशिप बेहद अहम है। इसके जरिए रॉल्स-रॉयस की इंजनों को बनाने की 100 साल पुरानी तकनीक और रिलायंस की ताकत एक साथ आएंगे।
इससे भारत में ही विमानों के इंजन बनाने का एक मजबूत और आत्मनिर्भर सिस्टम तैयार होगा, जो देश के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।
डिफेंस के साथ आम हवाई जहाजों को भी फायदा मिलेगा
दोनों कंपनियों ने साफ किया है कि यह पार्टनरशिप सिर्फ सेना के लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं रहेगी। आने वाले समय में इसके जरिए आम पैसेंजर प्लेन और नए पावर सिस्टम्स बनाने के क्षेत्र में भी मिलकर काम किया जाएगा।
इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भविष्य में भारत के घरेलू पैसेंजर जहाजों को भी देश में बने ‘मेड इन इंडिया’ इंजनों का विकल्प मिल सकेगा।
5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान भारत में ही बन रहा
भारत में बनने वाले 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान यानी AMCA के प्रोडक्शन मॉडल को पिछले साल मई में मंजूरी मिली थी, जिस पर काम किया जा रहा है। AMCA को इंडियन एयरफोर्स और नेवी में तैनात किए जाने की योजना है। यह 2035 तक उपलब्ध हो सकेगा।









