10 घंटे पहले
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आज रविवार, 21 जून को भानु सप्तमी है। इस तिथि पर भगवान सूर्य की विशेष पूजा करने की परंपरा है। ज्योतिष में रविवार का कारक ग्रह सूर्य को माना गया है और जब सप्तमी तिथि रविवार को पड़ती है, तो इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है। सूर्य ग्रह सिंह राशि का स्वामी है। पौराणिक मान्यता है कि शनि देव, यमराज, यमुना और मनु सूर्य देव की संतानें हैं।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, जिन लोगों की कुंडली में सूर्य की स्थिति ठीक नहीं है, उन्हें किसी भी काम में आसानी से सफलता नहीं मिल पाती है। सूर्य की अच्छी स्थिति की वजह से व्यक्ति को सफलता के साथ ही मान-सम्मान और अच्छा स्वास्थ्य मिलता है। इस ग्रह के दोषों को शांत करने के लिए रोज सुबह सूर्य को तांबे के लोटे से जल चढ़ाना चाहिए। आज भानु सप्तमी पर पूजा-पाठ के साथ ही दान-पुण्य भी जरूर करें।
एकमात्र प्रत्यक्ष दिखाई देने वाले देवता
सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता कहा गया है, क्योंकि वे प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देने वाले ऐसे देव हैं, जिनकी ऊर्जा से पूरा संसार संचालित हो रहा है। सूर्य जीवन, स्वास्थ्य, तेज, शक्ति और सफलता के प्रतीक माने जाते हैं। मान्यता है कि भानु सप्तमी पर की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता आती है और उसके कष्ट दूर होते हैं। सूर्य देव की कृपा से व्यक्ति को यश, सम्मान, स्वास्थ्य और मानसिक शांति मिलती है।

सूर्य पूजा की विधि
भानु सप्तमी स्नान के बाद घर के मंदिर में सबसे पहले प्रथम पूज्य भगवान गणपति का पूजन करें। गणेश पूजा के बाद सूर्य देव का ध्यान करें।
मंदिर में सूर्य देव का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें, दीपक और धूप जलाएं। लाल चंदन, चावल और लाल पुष्प अर्पित करें। इसके बाद सूर्य मंत्र ऊँ सूर्याय नम: का जप करें। आप चाहें, तो आदित्य हृदय स्तोत्र, सूर्य चालीसा या गायत्री मंत्र का भी जप भी कर सकते हैं। घर के मंदिर में पूजा के बाद सूर्य को अर्घ्य भी अर्पित करें।










