उत्तराखंड के बागेश्वर में नवरात्रि के छठे दिन शक्तिपीठ मां भगवती का मंदिर जल गया है। यहां मां ने निशुम्भ नाम के दैत्य का वध किया था। मंदिर के अंदर रखी मां की प्रतिमा और पूरा पंडाल जल गया है। घटना के बाद से लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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मंदिर का ज्यादातर हिस्सा लकड़ी से बना हुआ है, जिस कारण आग तेजी से भड़क गई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, लोगों ने दीये में लंबी बाती लगा दी थी और उसे गलत जगह रख दिया था, जिस कारण आग लग गई।
अभी आधिकारिक तौर पर आग लगने का कारण पता नहीं चल पाया है। निशुम्भ के वध की मान्यता के कारण इस क्षेत्र को पहले ‘वधकोट’ कहा जाता था, जो बाद में बदियाकोट नाम से प्रचलित हुआ। SDM अनिल चन्याल ने बताया कि आग के कारणों की जांच की जा रही है। फायर और पुलिस टीम मौके पर मौजूद है।
तस्वीरें देखिए-

बदियाकोट गांव के प्रसिद्ध मां भगवती मंदिर में नवरात्रि के पावन पर्व (छठे दिन) पर अचानक भीषण आग लग गई।

आग लगने से पहले मां भगवती का मंदिर ऐसा दिखाई देता था।

अंदर से ऐसा दिखता था मां भगवती का मंदिर।
निशुम्भ का वध कर मां ने बचाई थी देवताओं की जान
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, निशुम्भ एक शक्तिशाली दैत्य था, जो अपने भाई शुम्भ के साथ मिलकर देवताओं पर अत्याचार करता था। दोनों भाइयों ने अपनी शक्ति के बल पर देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था।
इसके बाद देवताओं को स्वर्ग से वंचित होना पड़ा और वे अपनी रक्षा के लिए मां आदिशक्ति की शरण में पहुंचे। देवताओं की प्रार्थना पर मां भगवती ने दैत्यों के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने और धर्म की स्थापना के लिए युद्ध किया। देवी महात्म्य की कथा के अनुसार, मां दुर्गा ने युद्ध में निशुम्भ और उसके भाई शुम्भ का वध किया था।

मंदिर के अंदर मां भगवती की प्रतिमा ऐसी थी।
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1. नवरात्रि के छठे दिन सुबह की घटना- बागेश्वर जिले की कपकोट तहसील से करीब 50 किलोमीटर दूर उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित सीमांत बदियाकोट गांव के प्रसिद्ध मां भगवती मंदिर में नवरात्रि के पावन पर्व (छठे दिन) पर अचानक भीषण आग लग गई।
मंदिर का मुख्य ढांचा और परिसर पारंपरिक हिमालयी वास्तुकला के तहत मुख्य रूप से लकड़ी और पत्थरों से बना था। लकड़ी की संरचना होने के कारण आग ने तेजी से विकराल रूप ले लिया और पूरे परिसर को अपनी चपेट में ले लिया।
2. माता की प्रतिमा और पंडाल जला- आग की इस भयावह घटना में मंदिर के अंदर रखी मां भगवती की प्रतिमा, मुख्य भवन और पूरा पूजा पंडाल जलकर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। मंदिर लकड़ी पर की गई बेहद सुंदर, बारीक और मनमोलक काष्ठ नक्काशी के लिए जाना जाता था, जो कत्यूर-कुमाऊं घाटी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अनमोल प्रतीक था।
इस अग्निकांड से क्षेत्र की स्थापत्य व सांस्कृतिक धरोहर को भारी नुकसान पहुंचा है।
3. आग लगने के संभावित कारण दीया या शॉर्ट सर्किट की आशंका- स्थानीय स्तर पर कयास लगाए जा रहे हैं कि पूजा-अर्चना के दौरान दीये में लंबी बाती लगाकर उसे गलत स्थान पर रख देने से लकड़ी ने आग पकड़ ली होगी।
स्थानीय निवासी आन सिंह के अनुसार, मंदिर में बिजली की व्यवस्था भी थी। इसलिए दीपक से आग फैलने या फिर बिजली के शॉर्ट सर्किट होने दोनों की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, प्रशासन और स्थानीय लोगों के अनुसार अभी आग लगने के सटीक और वास्तविक कारणों का आधिकारिक पता नहीं चल पाया है।

लकड़ी की बेजोड़ नक्काशी से बना था मंदिर। घटना के बाद की तस्वीर।
4. दूरस्थ क्षेत्र होने से राहत कार्य में चुनौती- बदियाकोट कपकोट से 50 किमी दूर विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाला क्षेत्र है, जहां फायर ब्रिगेड की सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इस कारण आग पर समय रहते काबू पाना बेहद चुनौतीपूर्ण रहा।
कपकोट के पूर्व ब्लॉक प्रमुख गोविंद सिंह दानू और ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से अग्निकांड के कारणों की उच्चस्तरीय जांच कराने और नुकसान का सटीक आकलन करने की मांग की है।
5. ‘वधकोट’ से ‘बदियाकोट’ नाम पड़ा- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां भगवती ने इसी स्थान पर दैत्य ‘निशुम्भ’ का वध किया था। निशुम्भ वध के कारण इस स्थान का नाम पहले ‘वधकोट’ पड़ा, जो कालांतर में बदियाकोट के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
दानपुर घाटी का यह मंदिर कुमाऊं और गढ़वाल दोनों क्षेत्रों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां हर 8 साल में ‘घर आंठियों’, हर 12 साल में ‘नंदकुंड उपजात यात्रा’ और पारंपरिक ‘सल्पाती मेले’ का आयोजन होता है। 134 परिवारों वाले इस बदियाकोट गांव (जनसंख्या: 322 पुरुष, 315 महिलाएं) सहित पूरे क्षेत्र में नवरात्रि के दौरान हुए इस हादसे से गहरा शोक और दुख का माहौल है।
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उत्तराखंड को यूं ही देवभूमि नहीं कहा जाता। यहां के मंदिरों से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं और लोगों की गहरी आस्था पीढ़ियों से चली आ रही हैं। हल्द्वानी के गौलापार में घने जंगलों के बीच स्थित सिद्धपीठ कालीचौड़ धाम भी ऐसा ही एक धार्मिक स्थल है। (पढ़ें पूरी खबर)







