राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने मांग की है कि उपभोक्ताओं से हो रही 10 फीसदी ईंधन अधिभार की वसूली तत्काल बंद की जाए। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं से अनाधिकृत तौर पर वसूली की जा रही है। क्योंकि नियामक आयोग ने इसे नियमों के विपरीत करार दिया है।
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजते हुए कहा कि 15 जून को होने वाली समीक्षा बैठक में यह पावर कार्पोरेशन के अधिकारियों से यह भी पूछा जाए कि वे किस नियम के तहत वसूली कर रहे हैं। क्योंकि अभी तक कार्पोरेशन की ओर से नियामक आयोग में वसूली से जुड़े दस्तावेज दाखिल नहीं किया गया है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि ईंधन अधिभार शुल्क वसूली से उपभोक्ताओं में असंतोष है। नियामक आयोग इस मामले में विद्युत निगम से बार-बार आंकड़े और गणना संबंधी दस्तावेज की मांग रहा है।
नियामक आयोग का रुख
उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने विद्युत निगम के आदेश को अपने विनियमों के अनुरूप नहीं पाया है। आयोग ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है। वह विद्युत निगम से लगातार आंकड़े, गणनाएं और अभिलेख मांग रहा है। आयोग के समक्ष इस वसूली की वैधता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इसके बावजूद उपभोक्ताओं से ईंधन अधिभार शुल्क की वसूली जारी है।
ऊर्जा मंत्री का बयान और परिषद की मांगें
प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ने भी कहा है कि उन्हें 10 फीसदी ईंधन अधिभार शुल्क की जानकारी सामाजिक माध्यम से मिली। उनसे इस मसले पर कोई राय नहीं ली गई थी। उपभोक्ता परिषद ने विद्युत निगम की मनमानी पर रोक लगाने की मांग की है। परिषद ने मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप करने और वसूली पर रोक लगाने की अपील की है। लाखों उपभोक्ताओं से अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा है, जबकि इसके आधार पर विवाद है।








