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रेल मार्ग पर दम तोड़ रही जिंदगी: सात महीने में 155 लोगों की मौत, राजामंडी बना ‘डेथ पॉइंट’; आंकड़े चौंका देंगे

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यात्रा के दौरान ट्रेन की चपेट में आने से मौतों का सिलसिला आगरा मंडल में लगातार बढ़ता जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक 1 जनवरी से 31 जुलाई के बीच 155 लोगों की ट्रेन से कटकर मौत हो गई। अधिकांश हादसे अनधिकृत रूप से ट्रैक पार करने, जल्दबाजी में ट्रेन में चढ़ने, मोबाइल-ईयरफोन के इस्तेमाल और प्लेटफॉर्म से नीचे उतरकर रेल पटरी क्रॉस करने के दौरान हुए।

सबसे अधिक चिंता राजामंडी रेलवे स्टेशन क्षेत्र की है। इसे मंडल का सबसे बड़ा डेथ पॉइंट माना गया है। हाल के महीनों में भी पवन कुमारी, रेखा, इंदू शर्मा, आकाश समेत कई लोगों की जान जा चुकी है। स्थानीय रिकॉर्ड के अनुसार चार वर्षों में यहां 43 लोग ट्रैक पर दम तोड़ चुके हैं। रेलवे एक्ट की धारा 147 के तहत ट्रैक को अनधिकृत रूप से पार करना दंडनीय अपराध है, जिसमें 6 महीने तक की सजा और 1,000 रुपये जुर्माने का प्रावधान है। इसके बावजूद लोग जान जोखिम में डालकर रेल पटरी पार करते आसानी से देखे जा सकते हैं।

ये है आरोप

स्थानीय लोगों का आरोप है कि ट्रैक पार करने वालों के खिलाफ प्रभावी चालान और रोकथाम अभियान पर्याप्त स्तर पर नहीं चलाए जा रहे हैं। उधर, रेलवे ने आगरा मंडल में 289 किलोमीटर ट्रैक पर बाउंड्रीवाल व फेंसिंग का कार्य कराया है, जबकि आगरा कैंट पर 600 मीटर स्क्रीन फेंसिंग का काम जारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि फेंसिंग, सख्त निगरानी, नियमित चालान और व्यापक जागरूकता अभियान ही इन मौतों के बढ़ते ग्राफ को रोक सकते हैं।

जनसंपर्क अधिकारी आगरा मंडल संजय कुमार गौतम ने बताया कि इस बारे में जागरूकता की कमी को दूर करने के लिए समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। आरपीएफ और जीआरपी को इसके लिए निर्देश दिए गए हैं। अनधिकृत रूप से ट्रैक पार करने वाले लोगों पर जुर्माने की कार्रवाई भी की जाती है।



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