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सोनिया गांधी की किताब नहीं छापेगा पेंगुइन इंडिया: कहा- फैसला किसी प्रेशर की वजह से नहीं लिया, राइटर्स की टीम से सहमति नहीं बनी

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नई दिल्ली6 घंटे पहले

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 ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ किताब में सोनिया गांधी ने अपने संस्मरण लिखे हैं। 10 नवंबर को लॉन्च होगी। - Dainik Bhaskar

‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ किताब में सोनिया गांधी ने अपने संस्मरण लिखे हैं। 10 नवंबर को लॉन्च होगी।

पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने सोनिया गांधी की किताब ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ प्रकाशित नहीं करने केके फैसले पर फिर सफाई दी है। पब्लिशर ने कहा कि इस फैसले के पीछे कोई बाहरी दबाव नहीं था, बल्कि पर चर्चा के दौरान एक खास मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी।

हालांकि पेंगुइन ने उस मुद्दे के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। पब्लिशर ने इसके लिए समझौते और लेखक की गोपनीयता का हवाला दिया है।

यह सफाई कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के संस्मरण के भारत में प्रकाशन को लेकर चल रहे विवाद के बीच आई है। प्रकाशन इससे पहले भी सफाई दे चुका है।

सोनिया गांधी के मेमोइर का कवर पेज।

सोनिया गांधी के मेमोइर का कवर पेज।

पेंगुइन ने बाहरी दबाव की बात खारिज की

पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (PRHI) की प्रवक्ता पल्लवी नारायण ने PTI से कहा, किताब की सामग्री गोपनीय है और अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। इसलिए इस मामले में किसी भी तरह का बाहरी दबाव नहीं था।

उन्होंने कहा, ‘पांडुलिपि सामान्य संपादकीय प्रक्रिया से गुजरी थी। इस दौरान कई मुद्दे उठाए गए और सोनिया गांधी के प्रतिनिधियों के साथ उन पर चर्चा की गई।’

‘प्रकाशक के मुताबिक, कुछ मुद्दों पर बदलाव के लिए सहमति बनी और कुछ मामलों में लेखक का पक्ष स्वीकार किया गया। हालांकि, अंत में एक खास मुद्दे पर समझौता नहीं हो सका।’

3 दिन पहले भी कहा था- हम किताब पब्लिश नहीं कर रहे

पेंगुइन ने 28 अगस्त को कहा था, वह बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ की प्रकाशक नहीं है। यह कहना सही नहीं है कि लेखक ने संपादकीय बदलावों से इनकार करने के कारण पेंगुइन ने प्रकाशित नहीं करने का फैसला किया।

कांग्रेस नेताओं ने कहा- सोनिया की किताब पर आपत्ति क्यों

  • अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि किताब में नरेंद्र मोदी, RSS और मोदी सरकार के दौरान चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र पर कथित कब्जे से जुड़े हिस्सों को हटाने के लिए दबाव डाला गया। उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की हत्या बताया और सवाल किया कि जो किताब दुनिया में मूल रूप में प्रकाशित हो सकती है, उसे भारत में क्यों बदला जाना चाहिए।
  • कमलनाथ ने कहा कि यह बेहद चिंता का विषय है कि क्या कोई प्रकाशक यह तय करेगा कि सोनिया गांधी जैसी वरिष्ठ नेता अपनी किताब में क्या लिखें और क्या न लिखें।
  • लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने कहा, पेंगुइन RSS से जुड़ी किताबें प्रकाशित कर सकता है, तो सोनिया गांधी की किताब के मामले में ऐसा क्या है जिसे लेकर इतनी आपत्ति है।

सोनिया पहले लिख चुकी हैं 4 किताबें

  • राजीव (1992): राजीव गांधी के जीवन, पारिवारिक पलों, राजनीति और हत्या तक के सफर पर सोनिया गांधी का निजी संस्मरण।
  • राजीव्स वर्ल्ड (1995): राजीव गांधी द्वारा खुद खींची गई दुर्लभ तस्वीरों का संग्रह, जिसे सोनिया गांधी ने संकलित किया।
  • फ्रीडम’स डॉटर (1989): 1922 से 1939 के बीच जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के पत्रों का संकलन, जिसका संपादन सोनिया ने किया।
  • टू अलोन, टू टूगेदर (1992/2004): नेहरू और इंदिरा के बीच 1922 से 1964 तक के ऐतिहासिक व निजी पत्राचार का संपादित संग्रह।

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