अमेरिकी कोर्ट ने ट्रम्प के ज्यादातर टैरिफ को गैर-कानूनी बताया:  फिलहाल रोक नहीं; ट्रम्प बोले- टैरिफ हटे तो अमेरिका बर्बाद हो जाएगा
ऑटो-ट्रांसपोर्ट

अमेरिकी कोर्ट ने ट्रम्प के ज्यादातर टैरिफ को गैर-कानूनी बताया: फिलहाल रोक नहीं; ट्रम्प बोले- टैरिफ हटे तो अमेरिका बर्बाद हो जाएगा

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वॉशिंगटन डीसी12 घंटे पहले

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ट्रम्प ने अगस्त से दुनिया के ज्यादातर देशों पर टैरिफ लागू कर दिया है। - Dainik Bhaskar

ट्रम्प ने अगस्त से दुनिया के ज्यादातर देशों पर टैरिफ लागू कर दिया है।

अमेरिका की एक अपील कोर्ट ने ट्रम्प के ज्यादातर टैरिफ को गैरकानूनी बताया है। कोर्ट का कहना है कि ट्रम्प ने इन टैरिफ को लागू करने के लिए जिस कानून का सहारा लिया, वह उन्हें यह अधिकार नहीं देता।

कोर्ट ने कहा कि ट्रम्प के पास हर आयात पर टैरिफ लगाने की असीमित शक्ति नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने इस फैसले को अक्टूबर तक लागू करने से रोक दिया है, ताकि ट्रम्प सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकें।

ट्रम्प ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर ये टैरिफ हटे, तो अमेरिका बर्बाद हो जाएगा।

कोर्ट बोला- टैरिफ लगाने की शक्ति संसद के पास

ट्रम्प ने चीन, कनाडा, मेक्सिको जैसे देशों पर व्यापार घाटे और अन्य कारणों से टैरिफ लगाए थे। उन्होंने तर्क दिया था कि अमेरिका का व्यापार घाटा ही राष्ट्रीय आपातकाल है।

ट्रम्प ने इन कानूनों को अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (IEEPA) के तहत सही ठहराया था। उनका कहना था कि व्यापार असंतुलन अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है और इसलिए उन्होंने व्यापार पर ‘नेशनल इमरजेंसी’ घोषित कर टैरिफ लगाए।

अब कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया और कहा कि शुल्क लगाना राष्ट्रपति के अधिकार में नहीं आता, यह शक्ति केवल संसद के पास है।

7-4 के बहुमत से दिए गए इस फैसले में अदालत ने साफ लिखा कि 1977 में जब कांग्रेस ने IEEPA कानून बनाया था, तब उसका मकसद राष्ट्रपति को बिना सीमा के शुल्क लगाने की ताकत देना नहीं था।

ट्रम्प सरकार ने कोर्ट में दलील दी थी कि टैरिफ हटाने पड़े तो 159 अरब डॉलर (लगभग 13 लाख करोड़ रुपए) की वसूली वापस करनी पड़ सकती है। इससे अमेरिकी खजाने को बड़ा झटका लगेगा।

ट्रम्प सरकार ने कोर्ट में दलील दी थी कि टैरिफ हटाने पड़े तो 159 अरब डॉलर (लगभग 13 लाख करोड़ रुपए) की वसूली वापस करनी पड़ सकती है। इससे अमेरिकी खजाने को बड़ा झटका लगेगा।

150 दिन के लिए 15% टैरिफ ही लगा सकते हैं

यह फैसला छोटे व्यवसायों और अमेरिकी राज्यों के गठबंधन द्वारा दायर मुकदमों पर आया है।

कोर्ट ने कहा कि ट्रम्प 150 दिनों तक 15% टैरिफ लगा सकते हैं, लेकिन इसके लिए ठोस कारण चाहिए।

फैसले में कहा गया कि IEEPA में ‘टैरिफ’ शब्द का कहीं जिक्र नहीं है और न ही इसमें राष्ट्रपति के अधिकारों पर कोई स्पष्ट सीमा तय की गई है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि जब संसद चाहती है कि राष्ट्रपति को शुल्क लगाने का अधिकार दिया जाए, तो वह इसे कानून में साफ-साफ लिखती है।

भारत पर ट्रम्प ने 50% टैरिफ लगाया

ट्रम्प प्रशासन ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया है, जो 27 अगस्त से लागू हो गया है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के मुताबिक, यह नया टैरिफ भारत के लगभग ₹5.4 लाख करोड़ के एक्सपोर्ट को प्रभावित कर सकता है।

50% टैरिफ से अमेरिका में बिकने वाले कपड़े, जेम्स-ज्वेलरी, फर्नीचर, सी फूड जैसे भारतीय प्रोडक्ट्स महंगे हो जाएंगे। इससे इनकी मांग में 70% की कमी आ सकती है।

चीन, वियतनाम और मेक्सिको जैसे कम टैरिफ वाले देश इन सामानों को सस्ते दाम पर बेचेंगे। इससे भारतीय कंपनियों की अमेरिकी बाजार में हिस्सेदारी कम होगी।

रूसी तेल खरीद की वजह से टैरिफ लगा

ट्रम्प ने 6 अगस्त को रूस से तेल खरीद पर जुर्माने के तौर पर इस टैरिफ का ऐलान किया था। वहीं, व्यापार घाटे का हवाला देकर 7 अगस्त से भारत पर 25% टैरिफ लगा दिया था।

भारत, चीन के बाद रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है। यूक्रेन युद्ध से पहले भारत रूस से सिर्फ 0.2% (68 हजार बैरल प्रतिदिन) तेल इम्पोर्ट करता था।

मई 2023 तक यह बढ़कर 45% (20 लाख बैरल प्रतिदिन) हो गया, जबकि 2025 में जनवरी से जुलाई तक भारत हर दिन रूस से 17.8 लाख बैरल तेल खरीद रहा है।

पिछले दो साल से भारत हर साल 130 अरब डॉलर (11.33 लाख करोड़ रुपए) से ज्यादा का रूसी तेल खरीद रहा है।

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