प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच टकराव जारी है। सोमवार सुबह अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- केशव मौर्य की नहीं चल रही है, वरना वो कब के आते हमें नहला कर चले गए होते। केशव प्रसाद ने बयान भी दिया है कि हमसे कहा जाएगा तब हम जाएंगे
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इससे पहले रविवार रात यूपी के डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने शंकराचार्य से विवाद खत्म करने की अपील की है। उन्होंने कहा- मुख्यमंत्री ने मामले का संज्ञान लिया है। जब मुझसे बात करने को कहा जाएगा, जरूर करूंगा। मैं उनके चरणों में शीश झुकाकर निवेदन करता हूं कि संगम में स्नान कर विवाद खत्म करें।
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा-
औरंगजेब ही हैं वे, जिन्होंने मंदिर तोड़े हैं। बड़ा आश्चर्य होता है कि जब CM के लिए औरंगजेब शब्द का इस्तेमाल करते हैं तो अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष को पीड़ा होती है, लेकिन जब हमारे मंदिरों के अंदर की मूर्तियां तोड़ी जा रही थीं, तब उनका कोई बयान नहीं आया। हमने औरंगजेब कहा है। क्या गलत कह रहे हैं, बताइए।

फिलहाल, शंकराचार्य 8 दिनों से अपने शिविर में प्रवेश नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक प्रशासन उनसे माफी नहीं मांगता, तब तक वे शिविर के बाहर ही रहेंगे।

अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों ने शिविर के चारों ओर सुरक्षा घेरा बना दिया है। अंदर जाने के सभी रास्ते ब्लॉक कर दिए हैं।
अब तक क्या हुआ, जानिए- 18 जनवरी को मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान के लिए जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोककर पैदल जाने को कहा। विरोध पर शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई। इसके बाद वे शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए।
प्रशासन ने 48 घंटे में दो नोटिस दिए। पहले में शंकराचार्य की पदवी लिखने पर और दूसरे में मौनी अमावस्या के विवाद पर सवाल पूछे गए। चेतावनी दी गई कि माघ मेले से बैन किया जा सकता है। अविमुक्तेश्वरानंद ने दोनों नोटिसों का जवाब दे दिया।
24 जनवरी की रात उनके शिविर में कट्टर सनातनी सेना के 8–10 युवक नारे लगाते पहुंचे और घुसने की कोशिश की। ‘आई लव बुलडोजर बाबा’ और ‘योगी जिंदाबाद’ के नारे लगाए। शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई। इस पर अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- जितना जुल्म होगा, उतनी मजबूती से कदम उठाऊंगा।
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