संतान की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना के लिए माताएं अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर को रखेंगी। अहोई माता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करेंगी और शाम को तारों को अर्घ्य देकर संतान की मंगलकामना करेंगी।
भागवताचार्य आचार्य सीपूजी महाराज ने बताया कि अहोई अष्टमी का व्रत मातृत्व, श्रद्धा और संतान के प्रति समर्पण का प्रतीक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन अहोई माता की पूजा और तारों को अर्घ्य देने का विशेष महत्व है। इस वर्ष अष्टमी तिथि एक नवंबर को दोपहर 2:51 बजे शुरू होकर दो नवंबर को दोपहर 1:10 बजे तक रहेगी।
78 मिनट तक पूजा का शुभ मुहूर्त
पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:36 से 6:54 बजे तक है। तारों के दर्शन शाम लगभग 5:22 से छह बजे के बीच होंगे। आचार्य सीपूजी ने बताया कि माताएं अपनी पारिवारिक परंपरा और शास्त्रीय विधान के अनुसार पूजा-अर्चना करें।