आज भी कार्तिक अमावस्या, दीपोत्सव का चौथा दिन:  सुबह तुलसी को चढ़ाएं जल, दोपहर में पितरों के लिए करें धूप-ध्यान, शाम को करें दीपदान
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आज भी कार्तिक अमावस्या, दीपोत्सव का चौथा दिन: सुबह तुलसी को चढ़ाएं जल, दोपहर में पितरों के लिए करें धूप-ध्यान, शाम को करें दीपदान

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8 मिनट पहले

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इस साल कार्तिक अमावस्या दो दिन (20 और 21 अक्टूबर) होने से दीपोत्सव छ: दिनों का है। कल लक्ष्मी पूजन था और आज (21 अक्टूबर) दीपोत्सव का चौथा दिन है, कार्तिक अमावस्या शाम करीब 5.30 बजे तक है। सुबह तुलसी पूजा करें, दोपहर में पितरों के लिए धूप-ध्यान करें। शाम को तुलसी के पास दीपदान करें। आज भी लक्ष्मी-विष्णु की पूजा कर सकते हैं। कल यानी 22 अक्टूबर को गोवर्धन पूजा है और 23 तारीख को भाई दूर मनाई जाएगी। ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की मूर्तियों पर पंचामृत अर्पित करें। दक्षिणावर्ती शंख में जल और दूध भरकर भगवान का अभिषेक करें। देवी-देवताओं को लाल और पीले रंग के चमकीले वस्त्र और पूजन सामग्री समर्पित करें। फूलों की माला और हार से उनका श्रृंगार करें। तुलसी के साथ मिठाई का भोग लगाएं। धूप और दीप जलाकर आरती करें। पूजा के अंत में भगवान से जाने-अनजाने हुई गलतियों के लिए क्षमा याचना करें। प्रसाद बांटें और स्वयं भी ग्रहण करें। पूजा के समय ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप करें। पितरों के लिए इस विधि से करें धूप-ध्यान पितरों के लिए धूप-ध्यान दोपहर में करना चाहिए, क्योंकि ये समय पितरों से जुड़े धर्म-कर्म करने के लिए श्रेष्ठ माना गया है। गाय के गोबर से बने उपले यानी कंडे जलाएं। जब कंडे से धुआं निकलना बंद हो जाए, तब अंगारों पर गुड़ और घी डालकर धूप दें। इस दौरान पितरों का ध्यान करते रहें। धूप के बाद हथेली में जल लें और अंगूठे की ओर से पितरों को जल अर्पित करें। यह धूप-ध्यान की सामान्य विधि मानी जाती है। कार्तिक अमावस्या पर कर सकते हैं ये शुभ कार्य अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है। यदि नदी में स्नान संभव न हो तो घर पर ही सभी तीर्थों और नदियों का ध्यान करते हुए स्नान करें। स्नान के जल में गंगाजल मिलाना भी पुण्यकारी होता है। यह तीर्थ-स्नान के समान फलदायक होता है। स्नान के बाद यदि आसपास कोई जरूरतमंद दिखाई दे तो उसे धन, वस्त्र अथवा अनाज का दान करें। किसी गौशाला में हरी घास या गायों की सेवा हेतु अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान अवश्य करें। शिवलिंग पर तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं और ‘ॐ नम: शिवाय’ मंत्र का जप करते रहें। चांदी के लोटे से शिवलिंग पर कच्चा दूध अर्पित करें, फिर शुद्ध जल से अभिषेक करें। शिवलिंग का श्रृंगार करें, तिलक लगाएं, बिल्व पत्र, धतूरा, फल और फूल चढ़ाएं। भगवान को मिठाई का भोग लगाएं और धूप-दीप जलाकर आरती करें। अमावस्या की सुबह स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें। जल अर्पण करते समय ‘ॐ सूर्याय नम:’ मंत्र का जप करें। यदि कुंडली में सूर्य से संबंधित दोष हों तो गुड़ का दान करें। कार्तिक अमावस्या पर चंद्र देव की विशेष पूजा करनी चाहिए। चंद्र ग्रह से संबंधित दोषों की शांति के लिए शिवलिंग पर दूध चढ़ाएं और जरूरतमंदों को दूध का दान करें। शिवलिंग के समक्ष दीपक जलाकर ‘ॐ सोमाय नम:’ मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें।

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