आज से शुरू हुई आदि कैलाश यात्रा:  6 महीने बाद खुले शिव-पार्वती मंदिर के कपाट, पहले दिन 200 श्रद्धालु रवाना – Pithoragarh News
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आज से शुरू हुई आदि कैलाश यात्रा: 6 महीने बाद खुले शिव-पार्वती मंदिर के कपाट, पहले दिन 200 श्रद्धालु रवाना – Pithoragarh News

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समुद्र तल से 5,945 मीटर ऊंचाई पर स्थित आदि कैलाश।

उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में स्थित शिव-पार्वती मंदिर के कपाट आज विधि-विधान के साथ खोल दिए गए हैं। इसके साथ ही आदि कैलाश यात्रा का औपचारिक शुभारंभ हो गया है। लंबे इंतजार के बाद कपाट खुलते ही व्यास घाटी में एक बार फिर श्रद्धालुओं की आवाजाही श

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धारचूला से प्रशासन की निगरानी में यात्रा की शुरुआत कराई गई। एसडीएम आशीष जोशी ने हरी झंडी दिखाकर करीब 200 यात्रियों के पहले जत्थे को रवाना किया। यह जत्था करीब 140 किलोमीटर का सफर तय कर आदि कैलाश पहुंचेगा, जहां श्रद्धालु पार्वती सरोवर और आदि कैलाश के दर्शन करेंगे।

यात्रा के शुभारंभ के दौरान पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। शिवभक्तों ने “हर-हर महादेव” के जयकारों के साथ यात्रा शुरू की। प्रशासन की ओर से सुरक्षा, स्वास्थ्य और यातायात से जुड़ी सभी जरूरी व्यवस्थाएं पहले से ही सुनिश्चित की गई हैं ताकि श्रद्धालु सुरक्षित यात्रा कर सकें। 2025 में करीब 35 हजार श्रद्धालुओं ने आदि कैलाश के दर्शन किए थे।

तस्वीरें देखिए…

कपाट खोलने के लिए मंदिर की तरफ बढ़ते पुजारी।

कपाट खोलने के लिए मंदिर की तरफ बढ़ते पुजारी।

माइनस 1 डिग्री तापमान में खुले शिव पार्वती मंदिर के कपाट।

माइनस 1 डिग्री तापमान में खुले शिव पार्वती मंदिर के कपाट।

कपाट खुलने के समय मौके पर मौजूद आईटीबीपी के जवान।

कपाट खुलने के समय मौके पर मौजूद आईटीबीपी के जवान।

धारचूला से ज्योलिंगकांग तक बढ़ी हलचल

यात्रा शुरू होते ही धारचूला, गुंजी, कुटी और ज्योलिंगकांग तक गतिविधियां तेज हो गई हैं। स्थानीय स्तर पर टूर ऑपरेटर, होटल व्यवसायी और होमस्टे संचालकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। सीमांत गांवों में जहां पहले सन्नाटा रहता था, वहां अब यात्रियों की आवाजाही से रौनक लौट आई है। स्थानीय लोग इस यात्रा को अपनी आजीविका से जोड़कर देख रहे हैं और बेहतर सीजन की उम्मीद कर रहे हैं।

आदि कैलाश के लिए रवाना हुआ श्रद्धालुओं का पहला जत्था।

आदि कैलाश के लिए रवाना हुआ श्रद्धालुओं का पहला जत्था।

5 से 7 दिन में पूरी होती है यात्रा, खर्च 25 हजार से 1 लाख

आदि कैलाश यात्रा को कैलाश मानसरोवर के भारतीय विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। जहां पारंपरिक यात्रा लंबी और कठिन होती है, वहीं आदि कैलाश की यात्रा 5 से 7 दिनों में पूरी हो जाती है। यात्रा के लिए 25 हजार से लेकर 1 लाख रुपए तक के पैकेज उपलब्ध हैं, जिनमें ठहरने, खाने और परमिट की सुविधा शामिल होती है। अलग-अलग बजट के हिसाब से यात्री अपनी योजना बना सकते हैं।

ऊंचाई पर यात्रा, स्वास्थ्य जोखिम भी

आदि कैलाश यात्रा 3,000 से 5,500 मीटर की ऊंचाई तक जाती है, जहां ऑक्सीजन की कमी और हाई एल्टीट्यूड सिकनेस का खतरा बना रहता है। प्रशासन ने यात्रियों के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट और इनर लाइन परमिट अनिवार्य किया है। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है। हेलीकॉप्टर सेवाओं और बढ़ती पर्यटक संख्या के कारण पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई जा रही है, खासकर कचरा प्रबंधन और ग्लेशियर क्षेत्र में मानवीय गतिविधियों को लेकर।

शिव पार्वती मंदिर का ड्रोन व्यू।

शिव पार्वती मंदिर का ड्रोन व्यू।

मोदी दौरे के बाद तेजी से बढ़ा आकर्षण

अक्टूबर 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के बाद आदि कैलाश की पहचान तेजी से बढ़ी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, तीन साल पहले तक यहां पर्यटकों की संख्या 2 हजार से भी कम थी, जो अब 30 हजार के पार पहुंच चुकी है। इस साल 40 से 50 हजार पर्यटकों के आने का अनुमान लगाया जा रहा है। कम भीड़, प्राकृतिक सौंदर्य और कम समय में पूरी होने वाली यात्रा के कारण युवा वर्ग में इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है।

अक्टूबर 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आदि कैलाश गए थे।

अक्टूबर 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आदि कैलाश गए थे।

सीमांत गांवों की बदली तस्वीर

गुंजी, कुटी और नाबी जैसे गांवों में पर्यटन के चलते आर्थिक बदलाव साफ नजर आ रहा है। जहां पहले पलायन बड़ी समस्या थी, वहीं अब लोग वापस लौटने लगे हैं। होमस्टे, टैक्सी और गाइड सेवाओं के जरिए स्थानीय लोगों की आय में बढ़ोतरी हुई है। राज्य सरकार ने क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के लिए करीब 17 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं। वहीं, बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) ने गुंजी से ज्योलिंगकांग तक सड़क को बेहतर बनाया है, जिससे यात्रा पहले की तुलना में आसान हो गई है।

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