आम ग्राहकों के लिए UPI फ्री ही रहेगा:  विवाद पर वित्त मंत्री की सफाई; ₹2,000 से ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट चार्ज संभव
ऑटो-ट्रांसपोर्ट

आम ग्राहकों के लिए UPI फ्री ही रहेगा: विवाद पर वित्त मंत्री की सफाई; ₹2,000 से ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट चार्ज संभव

Spread the love


नई दिल्ली1 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

भारत में रोजाना फल-सब्जी खरीदने से लेकर कैब के किराए तक के लिए करोड़ों लोग यूपीआई (UPI) का इस्तेमाल करते हैं। हाल ही में संसद में पेश हुए नए बिल के बाद एक बहस शुरू हो गई है कि क्या भविष्य में यूपीआई पेमेंट करने पर ग्राहकों को शुल्क देना होगा।

इस पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्थिति साफ की है। वित्त मंत्री ने कहा है कि आम ग्राहकों को डरने की कोई जरूरत नहीं है, यूपीआई उनके लिए फ्री ही रहेगा।

जानिए क्या है पूरा मामला, संसद में पेश नया बिल, एमडीआर का नियम और आम यूजर्स पर इसका क्या असर होगा…

सवाल: क्या आम ग्राहकों को अब UPI से पेमेंट करने पर कोई चार्ज देना होगा?

जवाब: नहीं, बिल्कुल नहीं। सरकार और आरबीआई दोनों ने साफ किया है कि आम ग्राहकों से यूपीआई पेमेंट पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। आप पहले की तरह ही किसी भी क्यूआर कोड को स्कैन करके फ्री में पैसों का ट्रांसफर और खरीदारी कर सकेंगे।

सवाल: फिर यूपीआई पर चार्ज लगने की चर्चा क्यों शुरू हुई?

जवाब: सरकार ने संसद में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल-2026 पेश किया है। इसमें पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट- 2007 की धारा 10A में संशोधन का प्रस्ताव है।

इसके तहत भविष्य में कुछ खास यूपीआई लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने का कानूनी ढांचा तैयार किया जा रहा है। इसी के बाद विपक्ष ने सवाल उठाए कि इससे आम जनता पर बोझ पड़ेगा।

सवाल: कांग्रेस और विपक्ष का इस नए संशोधन बिल पर क्या आरोप है?

जवाब: कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यह संशोधन उस कानूनी सुरक्षा को हटाता है जिसने अब तक यूपीआई ट्रांजेक्शन को पूरी तरह मुफ्त रखा है।

उनका आरोप है कि इससे भविष्य में यूपीआई पर एमडीआर लगाने का रास्ता साफ होगा और इसका अंतिम बोझ आम जनता पर ही पड़ेगा।

सवाल: विपक्ष के आरोपों पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने क्या सफाई दी?

जवाब: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विपक्ष के दावों को खारिज करते हुए X पर कहा कि एमडीआर केवल मर्चेंट्स (दुकानदारों/व्यापारियों) पर लागू होता है, न कि अंतिम उपभोक्ता या ग्राहकों पर।

इससे मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल बैंक और फिनटेक कंपनियां अपने इंफ्रास्ट्रक्चर, इनोवेशन और सिक्योरिटी को मजबूत करने में करेंगी, जिसका फायदा अंततः सभी यूपीआई यूजर्स को ही मिलेगा।

सवाल: क्या अभी से यूपीआई ट्रांजेक्शन पर एमडीआर लागू कर दिया गया है?

जवाब: नहीं, अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि संसद से बिल पास होने के बाद नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की ‘यूपीआई एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी’ इस पर अंतिम फैसला लेगी। अभी यह केवल एक प्रस्ताव के स्तर पर है।

सवाल: यह एमडीआर आखिर होता क्या है और यह कौन देता है?

जवाब: एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह फीस होती है जो कोई व्यापारी या दुकानदार डिजिटल पेमेंट प्रोसेस करने के बदले बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को देता है।

यह शुल्क ग्राहक की जेब से नहीं कटता, बल्कि दुकानदारों के डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने के बदले चुकाया जाता है। वर्तमान नियमों के तहत यूपीआई और रूपे डेबिट कार्ड पर एमडीआर 0% है।

सवाल: RBI गवर्नर का इस पूरे मुद्दे पर क्या रुख है?

जवाब: आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मॉनेटरी पॉलिसी के बाद कहा कि इस पर अभी से किसी नतीजे पर पहुंचना बहुत जल्दबाजी होगी। सरकार कानून में संशोधन कर रही है और चर्चा जारी है।

डिजिटल पेमेंट सिस्टम को चलाने का खर्च किसी न किसी को तो उठाना ही होगा। उन्होंने कहा कि आरबीआई की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल पेमेंट सुरक्षित, टिकाऊ और सभी के लिए किफायती बना रहे।

सवाल: प्रस्तावित योजना के तहत किन दुकानों और ट्रांजेक्शन पर चार्ज लग सकता है?

जवाब: विचाराधीन प्रस्ताव के अनुसार, ₹2,000 से ज्यादा के यूपीआई ट्रांजेक्शन पर 0.3% से 0.5% तक का एमडीआर (MDR) लगाया जा सकता है।

राहत की बात यह है कि यह नियम केवल ₹1.5 करोड़ से ज्यादा के सालाना टर्नओवर वाले बड़े मर्चेंट्स/दुकानदारों पर ही लागू करने का प्लान है। छोटे व्यापारी और सब्जी-किराना वाले इसके दायरे से बाहर रहेंगे।

सवाल: अगर एमडीआर लागू भी हो जाता है, तो दुकानदारों पर क्या असर पड़ेगा?

जवाब: अगर यह प्रस्ताव पास होता है, तो केवल ₹1.5 करोड़ से ज्यादा का टर्नओवर रखने वाले बड़े कारोबारियों को ही ₹2,000 से ज्यादा के यूपीआई लेन-देन पर 0.3% से 0.5% तक फीस देनी होगी। छोटे दुकानदारों और आम ग्राहकों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

सवाल: यूपीआई के भविष्य और इसकी फंडिंग को लेकर असली विवाद क्या है?

जवाब: भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल पेमेंट्स नेटवर्क का खर्च कौन उठाएगा। यह इस पूरे विवाद की मुख्य जड़ है। बैंक और फिनटेक कंपनियों का कहना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर और साइबर सुरक्षा बनाए रखने के लिए भारी लागत आती है।

सरकार चाहती है कि आम यूजर्स पर बोझ डाले बिना बैंकों को वित्तीय रूप से मजबूत बनाया जाए, ताकि यूपीआई सर्विस बिना किसी रुकावट के चलती रहे।

नॉलेज पार्ट: जानें क्या है पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट?

  • धारा 10A का नियम: भारत सरकार ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए इस कानून में धारा 10A जोड़ी थी, जिसके तहत यूपीआई और रूपे कार्ड लेन-देन पर किसी भी प्रकार का एमडीआर लगाने पर रोक लगा दी गई थी।
  • संशोधन की जरूरत क्यों: धारा 10A में संशोधन के बाद सरकार और एनपीसीआई (NPCI) को यह अधिकार मिल जाएगा कि वे जरूरत पड़ने पर बड़े व्यावसायिक लेन-देन पर सीमित शुल्क (MDR) तय कर सकें, ताकि डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर का खर्च निकाला जा सके।

ये खबर भी पढ़ें…

मैगी विवाद में दुकानदारों पर लगे सभी क्रिमिनल केस हटे: हाईकोर्ट बोला- लैब जांच में लेड लिमिट में मिला, अब केस का कोई आधार नहीं

दिल्ली हाईकोर्ट ने साल 2015 के मैगी विवाद में दुकानदारों के खिलाफ दर्ज सभी केस रद्द कर दिए हैं। यह सभी क्रिमिनल केस मैगी में लेड और मोनोसोडियम ग्लूटामेट की ज्यादा मात्रा पाए जाने के आरोपों के बाद दर्ज किए गए थे।

जस्टिस मधु जैन की बेंच ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट और सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (CFTRI) की जांच में मैगी के सैंपल सुरक्षित पाए जा चुके हैं, तो दुकानदारों पर मुकदमा चलाना उनके साथ अन्याय होगा। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *