आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि आज से शुरू:  23 जुलाई तक करें मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा, देवी को चढ़ाएं नारियल, फूल और सुहाग का सामान
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आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि आज से शुरू: 23 जुलाई तक करें मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा, देवी को चढ़ाएं नारियल, फूल और सुहाग का सामान

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आज (15 जुलाई) आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (पहली तिथि) है और इस तिथि से गुप्त नवरात्रि की शुरुआत होती है। गुप्त नवरात्रि में देवी सती की दस महाविद्याओं की कृपा पाने के लिए तंत्र-मंत्र से जुड़े लोग विशेष साधना करते हैं। हिन्दी पंचांग में एक साल में चार बार नवरात्रियां आती हैं। पहली चैत्र मास में, दूसरी आषाढ़ में, तीसरी आश्विन में और चौथी माघ मास में। चैत्र और आश्विन मास में प्रकट नवरात्रि रहती है, जबकि आषाढ़ और माघ मास में आने वाली नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहते हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, गुप्त नवरात्रि में देवी सती की दस महाविद्याओं की कृपा पाने के लिए गुप्त साधनाएं की जाती हैं। इन महाविद्याओं में मां काली, तारा देवी, षोडषी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, और कमला देवी शामिल हैं। ये साधनाएं तंत्र-मंत्र से जुड़े साधक ही करते हैं। सामान्य भक्तों को इन दिनों में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की ही पूजा करनी चाहिए। आज 15 जुलाई को मां शैलपुत्री की पूजा के साथ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। इसके बाद मां ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा की जाएगी। पूजा करते समय दुर्गा सप्तशती का पाठ कर सकते हैं। कई भक्त इन नौ दिनों में व्रत भी करते हैं। दो ऋतुओं के संधिकाल में आती है नवरात्रि देवी पूजा के नौ दिवसीय उत्सव नवरात्रि का संबंध ऋतुओं से है। जब दो ऋतुओं का संधिकाल रहता है, उस समय देवी पूजा का यह उत्सव मनाया जाता है। संधिकाल यानी एक ऋतु के खत्म होने का और दूसरी ऋतु के शुरू होने का समय। चैत्र मास की नवरात्रि के समय बसंत ऋतु खत्म होती है और ग्रीष्म ऋतु शुरू होती है। आषाढ़ मास की नवरात्रि के समय ग्रीष्म ऋतु खत्म होती है और वर्षा ऋतु शुरू होती है। आश्विन नवरात्रि के समय वर्षा ऋतु खत्म होती है और शीत ऋतु शुरू होती है। माघ मास की नवरात्रि के समय शीत ऋतु खत्म होती है और बसंत ऋतु शुरू होती है। नवरात्रि में व्रत करने से मिलते हैं स्वास्थ्य लाभ आयुर्वेद के अनुसार व्रत-उपवास करने से हमारे पाचन तंत्र को आराम मिलता है। खान-पान में संयम रखने से हम पेट से जुड़ी कई बीमारियों से बचे रहते हैं। शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। जब हम खान-पान में संयम रखते हैं, तो आलस नहीं आता है और मन पूजा-पाठ में लगा रहता है। पूजा-पाठ के बाद एकाग्र मन के साथ किए गए अन्य कामों में भी सफलता मिलती है। नवरात्रि के दिनों में देवी मां के भक्त अन्न का त्याग करते हैं, इन दौरान शरीर को जरूरी ऊर्जा मिलती रहे, इसके लिए भक्त दिन में एक बार फलाहार करते हैं। देवी पूजा और साधनाओं से भक्तों का मन शांत होता है, नकारात्मक विचार दूर होते हैं।



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