इंस्पायरिंग:  आप में धैर्य है, मेहनत कर सकते हैं, पॉजिटिव हैं, तो अपने सपनों को छोड़ें नहीं – संजू सैमसन
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इंस्पायरिंग: आप में धैर्य है, मेहनत कर सकते हैं, पॉजिटिव हैं, तो अपने सपनों को छोड़ें नहीं – संजू सैमसन

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14 मिनट पहले

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टी-20 विश्वकप के लगातार दो मुकाबलों में ‘मैन ऑफ द मैच’ रहे भारतीय क्रिकेटर संजू सैमसन की जीवन की प्रेरक बातें, उन्हीं की जुबानी… क्रिकेट की दुनिया में हर खिलाड़ी का सपना होता है कि वह भारत के लिए खेले, लेकिन उस सपने तक पहुंचने का रास्ता हर किसी के लिए अलग होता है। मेरी ऐसी ही यात्रा रही… उतार-चढ़ाव से भरी, लेकिन उम्मीद और विश्वास से मजबूत। जब मैंने 19 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया था, तब सबको लगा कि शायद अब सब बहुत जल्दी हो जाएगा। लेकिन क्रिकेट आपको सिखाता है कि जिंदगी में कोई भी चीज इतनी आसान नहीं होती। डेब्यू के बाद लगभग पांच साल तक मुझे लगातार मौके नहीं मिले। कई बार ऐसा लगा कि शायद मेरा समय अभी नहीं आया है। लेकिन मैंने कभी शिकायत नहीं की। मैं हमेशा सोचता था कि दुनिया में बहुत से ऐसे खिलाड़ी हैं, जो भारत के लिए खेलने का सपना देखते हैं, कड़ी मेहनत करते हैं, रन बनाते हैं, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिलता। इसलिए जब मुझे मौका मिला, तब मैंने पूरी मेहनत के साथ खेलने की कोशिश की। मेरे करियर में कई ऐसे पल आए, जब सब कुछ मेरे खिलाफ जाता दिखा। श्रीलंका दौरे पर मुझे ओपनिंग करने का मौका मिला और वहां लगातार दो मैचों में मैं शून्य पर आउट हो गया। इस दौर में तो सबसे सकारात्मक सोच रखने वाले व्यक्ति के मन में भी नकारात्मक विचार आ सकते हैं। लेकिन मैंने सीखा कि हम जीवन में सब कुछ नियंत्रित नहीं कर सकते। जो हमारे हाथ में है, वही महत्वपूर्ण है। जो हो चुका, उसे भूलकर जो कर सकते हैं उस पर ध्यान दें। अपनी तैयारी, मेहनत और अपनी क्षमता पर भरोसा रखो। जब कोई आप पर भरोसा करता है, तो आपका भी दिल चाहता है कि उस भरोसे को सही साबित किया जाए। हैदराबाद में जब मुझे मौका मिला, तो मेरे मन में एक ही बात थी कि मुझे किसी को निराश नहीं करना है। बांग्लादेश के खिलाफ टी20 सीरीज के शुरुआती मैचों में मैं बड़ा स्कोर नहीं बना पाया था। उस समय थोड़ा झिझक रहा था, कोच से आंख मिलाने में हिचक महसूस हो रही थी। लेकिन मैंने खुद से कहा- ‘अपना टाइम जरूर आएगा’। हैदराबाद में मैंने शतक लगाया, तो वह कई सालों की मेहनत, धैर्य और विश्वास का परिणाम था। जब देखा कोच ताली बजा रहे हैं, तो वह पल खास था। हर खिलाड़ी की यात्रा अलग होती है। अगर आप धैर्य रखते हैं, सकारात्मक हैं, मेहनत करते हैं, तो आपका समय जरूर आएगा। बस, अपने सपनों को छोड़ें मत। मेहनत करते रहें और विश्वास रखें।

मैदान में हों या बाहर, हर अनुभव मायने रखता है कई लोग समझते हैं कि खिलाड़ी सिर्फ मैदान में खेलकर सीखता है, लेकिन मेरे लिए डगआउट में बैठना भी एक बड़ी पाठशाला रहा। मैंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में करीब 50-60 मैच खेले, लेकिन लगभग 100 मैच डगआउट से भी देखे हैं। वहीं बैठकर मैंने देखा कि बड़े खिलाड़ी दबाव के समय अपने खेल को कैसे बदलते हैं और मैच को कैसे खत्म करते हैं। इन पलों ने मुझे खेल को समझने का नजरिया दिया। इसलिए हर अनुभव मायने रखता है, चाहे आप मैदान में हों या बाहर बैठकर सीख रहे हों। (तमाम इंटरव्यू में)



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