7 घंटे पहले
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माइक्रोसॉफ्ट सीईओ सत्या नडेला की सालाना कमाई बढ़कर 96.5 मिलियन डॉलर हो गई है। उनकी प्रेरक बातें, उन्हीं की जुबानी…
कभी -कभी मैं सोचता हूं क्या हम टेक्नोलॉजी को बना रहे हैं या टेक्नोलॉजी हमें बना रही है? अपने जीवन में मैंने एक बात बहुत गहराई से सीखी है कि हर नई टेक्नोलॉजी अपने साथ सिर्फ मौके ही नहीं लाती, जिम्मेदारी भी लाती है। हम सब मिलकर जो डिजिटल दुनिया बना रहे हैं, वो तभी सुंदर और सार्थक होगी, जब उसमें भरोसा, सुरक्षा और मानवता का संतुलन रहेगा। पहले हम कुछ बनाते थे और फिर सोचते थे कि उसका असर क्या होगा, लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब समय आया है कि हम पहले यह सोचें कि जो हम बना रहे हैं वह इंसान के लिए सही है या नहीं… और फिर उसे बनाएं। क्योंकि अंततः टेक्नोलॉजी तभी महान है, जब वह मानवता की सेवा में हो।
मुझे यह देखकर खुशी होती है कि दुनिया अब समझने लगी है कि सुरक्षा, निजता और भरोसा कोई विकल्प नहीं हैं, बल्कि ये ही विकास की बुनियाद हैं। चाहे अमेरिका हो, भारत हो या यूरोप… हर जगह यह चर्चा है कि प्रगति कैसी होनी चाहिए। प्रगति ऐसी हो जो सबको साथ लेकर चले। मुझे विश्वास है कि सुरक्षा और भरोसे के बिना कोई भी प्रोग्रेस टिकाऊ नहीं होती। हमें टेक्नोलॉजी से डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि जब तक इंसान अपने मूल्यों और विवेक को थामे रखता है, टेक्नोलॉजी कभी उसकी मालिक नहीं बन सकती। हमारा काम यह नहीं है कि चीजों को जटिल बनाएं, यह है कि जटिलता को सरल बनाएं और उससे दुनिया को बेहतर करें।
हम अलग-अलग देशों, भाषाओं और संस्कृतियों में रहते हैं, फिर भी क्या हम सच में इतने अलग हैं? जब मैं किसी भारतीय इंजीनियर, जर्मन वैज्ञानिक या अमेरिकी छात्र से बात करता हूं, तो हर कोई एक ही बात कहता है- मैं कुछ ऐसा बनाना चाहता हूं जो फर्क लाए। यही बात मुझे उम्मीद देती है, क्योंकि फर्क हमारी भाषा या संस्कृति में नहीं है, फर्क केवल इरादे की गहराई में है। यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है… एकजुटता। लोग कहते हैं समय कठिन है, लेकिन मैं मानता हूं कि कठिन समय ही सबसे रचनात्मक होता है। हर ठहराव के भीतर एक नई ऊर्जा छिपी होती है। कभी मत सोचें कि आप सब जानते हैं। टेक्नोलॉजी लगातार बदलती है। कभी पीसी का युग था, फिर इंटरनेट आया, फिर मोबाइल, अब एआई है। हर नई लहर हमें फिर स्टूडेंट बनाती है। आपने पहले भी बदलाव को अपनाया है और अब भी बहुत कुछ सीखना बाकी है। यही संतुलन हमें बेहतर इंसान और बेहतर लीडर बनाता है।
लोग कंपनियां नहीं छोड़ते, मैनेजर छोड़ते हैं कभी किसी ने मुझसे कहा था… लोग कंपनियां नहीं छोड़ते, लोग अपने मैनेजर छोड़ते हैं। यह बात मेरे दिल में बस गई। किसी भी इंसान को अपने साथियों से जुड़ाव ही टिकाए रखता है। जब वह जुड़ाव टूटता है, तब लोग दूसरी जगह देखते हैं। इसलिए हमारे लिए जरूरी है कि हम हर कर्मचारी के अनुभव को समझें, उसकी आकांक्षाओं को कंपनी के मिशन से जोड़ें। अगर कंपनी का हर कर्मचारी यह सोचेगा कि मैं कंपनी के लिए नहीं, कंपनी मेरे लिए काम करती है… तो क्या यह समीकरण संतुलित रहेगा? अगर जवाब ‘हां’ है, तो वही असली जुड़ाव है क्योंकि तब कंपनी आपके सपनों की साझेदार बन जाती है और आप उसके मिशन का हिस्सा। (तमाम इंटरव्यूज में)








