इंस्पायरिंग:  खूब मेहनत करें, लेकिन सबसे जरूरी यह है कि खुद से कभी झूठ मत बोलें – दिलजीत दोसांझ
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इंस्पायरिंग: खूब मेहनत करें, लेकिन सबसे जरूरी यह है कि खुद से कभी झूठ मत बोलें – दिलजीत दोसांझ

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1 घंटे पहले

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सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ के सिडनी परफॉर्मेंस में उन्होंने टिकट बिक्री के रिकॉर्ड तोड़े हैं। दिलजीत का सफर और सीख, उन्हीं की जुबानी…

मेरा बचपन पंजाब रोडवेज की बसों के बीच बीता। पिता वहीं काम करते थे और मां घर संभालती थीं। हमारे हालात आसान नहीं थे। पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी। मेरे माता-पिता ने मुझे दो सबसे कीमती बातें सिखाईं… मेहनत और विनम्रता। यही वो चीजें हैं, जो मेरी जिंदगी की जड़ हैं। लुधियाना, ये शहर मेरे दिल के बहुत करीब है। यहीं मैंने पहली बार पंजाबी लोक संगीत से मोहब्बत की थी। लुधियाना की मिट्टी ने न जाने कितने दिग्गज कलाकार दिए हैं… मोहम्मद सिद्दीक, अमर सिंह चमकीला, लाल चंद यमला जट… जिनकी तुंबी की आवाज आज भी आत्मा को छूती है। वही तुंबी जो बाद में 60, 70 और 80 के दशक के भांगड़ा गानों की जान बनी। यही लोक संगीत मेरी रूह में बसा हुआ है और यही प्रेरणा मेरे तमाम म्यूजिक एल्बम की नींव बनी। मुझे याद है, मेरे म्यूजिक टीचर शर्माजी ने पहली बार मुझमें आत्मविश्वास जगाया था। उन्होंने कहा था, तू एक बार ये कविता गा के दिखा। जब उन्होंने मेरी आवाज सुनी, उनके चेहरे का भाव नहीं भूला। उस दिन लगा… यही है मेरा रास्ता। वैसे जिंदगी आसान नहीं रही। फिल्में और म्यूजिक, दोनों को साथ निभाना हमेशा एक चुनौती रहा है। लेकिन मैंने कभी किसी एक को छोड़ा नहीं। शूटिंग के बीच मैं अपनी म्यूजिक टीम के साथ बैठकर नए सुरों की तलाश करता हूं। लॉकडाउन के वक्त जब शूटिंग रुकी, तो मैंने पूरा ध्यान संगीत पर लगाया। उस समय मेरा 16 ट्रैक वाला डबल एल्बम बना। वो मेरी जिंदगी की सबसे प्यारी रचना है। जब मैं परफॉर्म करता हूं और हजारों चेहरे एक साथ मुस्कराते हैं, गाते हैं, तो लगता है ईश्वर ने मेरा सपना पूरा किया। कई बार लोग मोटरसाइकिलों पर मेरे पीछे घर तक चले आते हैं। दिल भर आता है। हर फैन मेरे लिए अनमोल है। जब मैंने ऑकलैंड एरीना, सैन फ्रांसिस्को में परफॉर्म किया, तो सपना हकीकत बन गया। मुझे इस बात पर गर्व है कि मैंने कभी अपनी पहचान से समझौता नहीं किया। करियर की शुरुआत में बहुत लोगों ने कहा कि पगड़ी पहनकर एक्टर बनना मुश्किल है। उनसे मैंने कहा, अगर मैं अपनी पहचान छोड़ दूं, तो रह क्या जाऊंगा? आज मैं गर्व से कहता हूं कि मैं अपनी संस्कृति और जड़ों को साथ लेकर आगे बढ़ा। मेरी पगड़ी ने रास्ता नहीं रोका, रास्ते खोले हैं। मुझे जिंदगी ने सिखाया कि मेहनत करो, सच्चे रहो और सबसे जरूरी यह कि खुद से कभी झूठ मत बोलो।

जिंदगी से बड़ा कोई स्कूल नहीं हो सकता हर अनुभव, चाहे वह छोटा हो या बड़ा, अगर आपने उसे जिया और झेला है, तो वही आपके लिए सृजन का आधार बनेगा। जो चांदी का चम्मच लेकर पैदा होते हैं, उनकी यात्रा अधिक कठिन होती है, क्योंकि उन्होंने जीवन में कम चीजें देखी होती हैं। उनके पास सीखने और महसूस करने के लिए सीमित साधन होते हैं। जिंदगी सबसे बड़ा स्कूल है, वो हमें बहुत सिखाती है। कठिन हालात भाव और अभिव्यक्ति सिखाते हैं। (तमाम इंटरव्यूज में…)



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