8 घंटे पहले
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- उद्योगपति कुमार मंगलम बिरला हाल ही में ‘आइकन ऑफ द ईयर’ सम्मान से नवाजे गए। उनके सफर की खास बातें, उन्हीं की जुबानी…
मेरा बचपन खूब मजे में गुजरा। हाई एनर्जी, खूब सकारात्मकता, परिवार का जुड़ाव… सब था। मुंबई में स्कूल गया और आठवीं तक बढ़िया स्टूडेंट था, उसके बाद उतना खास नहीं। 70 के दशक का दौर था, उस वक्त का एकमात्र तनाव मुझे याद है, जो दसवीं के एग्जाम का था। बहुत हौवा था, दसवीं का। मैंने पहली बार खुद को दबाव में इसी क्लास में महसूस किया। यह डरावना था। मुझे यह अहसास आज होता है कि डरना किसी चीज से नहीं चाहिए। डर आपके व्यक्तित्व को तबाह करता है। डर तब होना चाहिए जब आप कुछ गलत कर रहे हों। आज के जमाने में तो डर नाम की चीज की जगह मैं जिंदगी में देखता ही नहीं। मैं कोशिश करता हूं कि हमेशा आपे में रहूं। बीते 29 साल में मुझे याद है 18 बार हुआ है जब मैंने आपा खोया है। आप सोच सकते हैं कि मुझे यह आंकड़ा कैसे इस कदर याद है? वो इसलिए कि मेरे लिए यह ब्लैक मार्क के समान है। काम की जगह पर तो यह अस्वीकार्य है। बतौर लीडर भी यह ठीक नहीं है कि मैं उन लोगों पर गुस्सा करूं जो अपना सब कुछ मेरे दफ्तर में दे रहे हैं। वक्त से लेकर समझ तक… सब काम पर लगाते हैं, तो मुझे यह ठीक नहीं लगता। इसीलिए मुझे यह आंकड़ा याद रहता है। कह सकता हूं कि दस साल पहले के मुकाबले मैं आज बेहतर इंसान हूं। मुझे लगता है कि किसी भी नौजवान के लिए एक ग्रेट टीम बनाना बड़ी टास्क है। ऐसा आप तभी कर पाते हैं कि जब आप वो काम करें जिससे आपको प्यार है। एक अच्छी टीम के साथ ही आप ग्रेट लीडर हो सकते हैं। मैं हर बार अपनी टीम को ही सफलता का श्रेय देता हूं। मैं अगर ऊंचा और अलग नजर आता हूं तो वो टीम के कारण ही है। एक और बात जो नौजवानों को हमेशा ध्यान में होना चाहिए, वो है कंसिस्टेंसी (निरंतरता)। निरंतरता अगर आप सीखने में ले आएं तो कमाल हो जाए। हर वक्त नया सीखने की ललक बनाए रखना बेहद जरूरी है। आप नया जानेंगे तो ही जमाने के साथ चल पाएंगे, नए दौर के व्यापार शुरू कर पाएंगे और नई पीढ़ी को सर्व कर पाएंगे। वक्त के साथ चलते रहेंगे तो आपसे कभी कोई मौका मिस नहीं होगा और आपको पता होगा यह दौर किस काम को करने का है। आपको आगे बढ़ना है, तो यह सब पता होने के साथ टीम में जोश भरना भी आना चाहिए। टीम में जोश नहीं है तो आपकी सफलता संदेह में ही रहेगी। मैं नहीं मानता कि कोई काम ऐसा है जो आप कर नहीं सकते। मैं मानता हूं आप अभी उस काम को करने के हालात में पहुंचे नहीं हैं। जब कुछ नया आपको रोमांचित करेगा तब आप पंख फैला पाएंगे। बिजनेस को चलाना भी क्रिएटिविटी ही है किसी भी व्यापार को चलाना और उसे लगातार आगे बढ़ाना आसान नहीं होता है। मैं व्यापार को चलाना भी इंसान की क्रिएटिविटी का ही हिस्सा मानता हूं। जैसे-जैसे आपका बिजनेस बड़ा होता चला जाता है, वैसे-वैसे आपको भी पहले से ज्यादा क्रिएटिव होने की आवश्यकता हो सकती है। आपको ‘आउट ऑफ बॉक्स’ सोचने की जरूरत हो सकती है और इसके लिए आपको भी क्रिएटिव होना होगा। बिजनेस चलाना भी क्रिएटिविटी है। (विभिन्न इंटरव्यूज़ में कही बातों से)








