8 घंटे पहले
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- एक्ट्रेस रश्मिका इन दिनों अपने नए प्रोजेक्ट ‘रश्मिका एंड रू’ के कारण चर्चा में हैं। उनकी शुरुआत से जुड़ी कुछ प्रेरक बातें, उन्हीं की जुबानी…
जब मैं कूर्ग पहुंचती हूं, सबसे पहले अपनी कार की खिड़कियां नीचे करती हूं और उस ताजी हवा में सांस लेती हूं, जिसमें मिट्टी पर ताजी बारिश की खुशबू और कॉफी के फूलों की महक मिली होती है। मुझे ये खुशबू बहुत पसंद है। जब मैं घर पहुंचती हूं, तो मेरे डॉग्स के भौंकने की आवाजें आती हैं और मम्मी-पापा दरवाजे पर खड़े होते हैं, उनके चेहरे पर खुशी होती है। मेरी छोटी बहन दौड़ती हुई आती है, दरवाजा खोलती है और हम सब एक ग्रुप-हग करते हैं। घर में आते ही मैं सबसे पहले अपने माथे पर कुमकुम लगवाती हूं और छोटी-सी प्रार्थना करती हूं। ये वो लोग हैं जिनकी वजह से ही मैं हूं। मेरी जिंदगी में जो भी लोग हैं, वे सभी जमीन से जुड़े रहने में विश्वास रखते हैं, आपका जमीन से जुड़ा रहना ही सफलता में अहम भूमिका निभाता है। मुझे लगता है मैं किस्मत की देन हूं। जीवन में ऐसे कई पड़ाव आते हैं जब आप सोचते हैं- मुझे एक्टर बनना है। लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि ये मुमकिन हो सकता है। मेरा सोचने का तरीका हमेशा यही था कि जो भी जीवन में मिले, उसमें बेस्ट करना है। सफलता के पीछे बहुत धैर्य, मेहनत, सीमाओं को पार करना, रोज कुछ नया सीखना और अपने काम का सम्मान करना शामिल है। मैं जो चाहती हूं, उसके लिए मेहनत जमकर करती हूं। पुराने दिनों की बात करूं, तो 17 साल की रश्मिका के पास कोई खास रूटीन नहीं था। वो बस उठती और कॉलेज चली जाती। कॉलेज में हमेशा किसी न किसी एक्स्ट्रा-करिकुलर एक्टिविटी में शामिल रहती थी। मुझे खेल और डांस बहुत पसंद था। क्लास में हमेशा पीछे की सीट पर बैठती थी, लेकिन शरारती नहीं थी। मुझे बोर्ड पर बुलाया जाना या सवालों के जवाब देना पसंद नहीं था। मैं चाहती थी कि टीचर मुझसे नजर न मिलाए। उसके बाद मैं डांस क्लास जाती, फिर घर आती और टाइम पास करती। अब सेट पर होती हूं तो सबकी एनर्जी को महसूस करती हूं। मैं खुद को लेकर काफी सहज हूं क्योंकि मुझे लगता है मेरी एनर्जी अच्छी है। जब आप किसी नई टीम से मिलते हैं और अगले 100 दिन उनके साथ काम करना है, तो सबसे जरूरी होता है उनकी एनर्जी को समझना, उन्हें जानना और दोस्त बनाना। टीम में मेरे लिए सबसे जरूरी है दयालुता, लेकिन उसके साथ एक-दूसरे का सम्मान करना भी जरूरी है। जब आप एक-दूसरे का सच्चे दिल से ख्याल रखते हैं और जिम्मेदारी लेते हैं, तो सब ठीक चलता है। सहानुभूति रखना, देखभाल करना, अच्छा दिल रखना और सच्चे इंसान होना… यही सब मायने रखता है। ऐसे भी पल आए जब मन में शक हुआ या लोगों ने मेरी काबिलियत पर सवाल उठाए। लेकिन मैंने हमेशा खुद पर भरोसा रखा और अपने लक्ष्य पर फोकस किया। मुश्किलों को पार किया और अपनी जगह बनाई।
चीजों का आनंद लें पर विनम्र बने रहें खुशकिस्मती से, मेरे लिए विनम्र बने रहना कोई अतिरिक्त कोशिश कभी नहीं रही है। मेरा दिमाग वैसा ही बना है… मुझे पता है कि जिन चीजों को हम पसंद करते हैं, जिनका हम आनंद लेते हैं, ये सारी ऐशो-आराम की चीजें… ये सब कभी भी आ सकती हैं या कभी भी जा सकती हैं। यही सोच जमीन और जड़ों से जोड़े रखती है। (तमाम इंटरव्यूज में अभिनेत्री रश्मिका मंदाना)








