उज्जैन2 घंटे पहले
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उज्जैन समेत देशभर में 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी मनाई जाएगी। इसी दिन हरतालिका तीज का व्रत भी है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार तृतीया युक्त चतुर्थी का संयोग बन रहा है, जो धार्मिक दृष्टि से विशेष माना गया है। हरतालिका तीज पर पूजन-व्रत से सुख-सौभाग्य और पति की दीर्घायु की कामना की जाती है।
चतुर्थी से ही 10 दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत भी होगी। इस दौरान उज्जैन के प्रसिद्ध चिंतामन गणेश और बड़े गणेश मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना चलेगी, जिसमें देश-विदेश से आए श्रद्धालु शामिल होंगे।
तृतीया-चतुर्थी का संयोग विशेष फलदायी
ज्योतिषाचार्य अमर डिब्बावाला ने बताया कि शास्त्रीय मत में यदि हरतालिका तीज, चतुर्थी के साथ आती है तो इसे सामान्य से अधिक फलदायी माना जाता है। तृतीया युक्त चतुर्थी को सुख-सौभाग्य, परिवार की समृद्धि और पति की दीर्घायु के लिए विशेष माना गया है।

रात में चंद्र दर्शन न करें श्रद्धालु
ज्योतिषाचार्य डिब्बावाला के मुताबिक, पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 14 सितंबर को है। इसी दिन चतुर्थी का भी संयोग रहेगा। इस कारण हरतालिका तीज का व्रत तृतीया युक्त चतुर्थी के क्रम में होगा।
उन्होंने कहा- चतुर्थी पर पार्थिव गणेश की स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 11.30 बजे है। इस बार गणेश स्थापना ब्रह्म योग में होगी। शुभ मुहूर्त में मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा की स्थापना कर पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति की मान्यता है। मध्यरात्रि में किसी भी जातक को चंद्र दर्शन नहीं करना चाहिए।
10 दिन में 10 स्वरूपों की साधना करें
धर्मशास्त्रीय मत के अनुसार, इन 10 दिन में भगवान गणेश के 10 स्वरूपों की साधना की जा सकती है। प्रतिदिन 21 दूर्वा और मोदक अर्पित करते हुए गणेशजी के 10 नामों का क्रम से उच्चारण करने की परंपरा है।
ये नाम हैं- गणाधिप, उमापुत्र, अघनाशन, विनायक, ईशपुत्र, सर्वसिद्धिप्रदायक, एकदंत, इभवक्र, मूषकवाहन, कुमारगुरु।
अभीष्ट सिद्धि के लिए विशेष साधना का समय
जिनके विवाह या दूसरे मांगलिक कामों में बाधा आ रही है, वे गणेश सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ कर हवन-अनुष्ठान करें। 10 दिन तक गणेशजी को दूर्वा और मोदक अर्पित करने से विघ्न दूर होने और कार्य सिद्धि होने की मान्यता है।

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