एक साल में 10% गिर चुका है मारुति का शेयर:  मारुति सुजुकी ने बेचीं 6 लाख से ज्यादा गाड़ियां, फिर भी चौथी तिमाही में मुनाफा घटा
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एक साल में 10% गिर चुका है मारुति का शेयर: मारुति सुजुकी ने बेचीं 6 लाख से ज्यादा गाड़ियां, फिर भी चौथी तिमाही में मुनाफा घटा

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मुंबई8 घंटे पहले

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ऑटोमोबाइल कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही में 42,431 करोड़ रुपए की कुल कमाई की है। यह पिछले साल के मुकाबले 7% ज्यादा है। पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी ने 39,655 करोड़ रुपए की कमाई की थी।

कुल कमाई में से सैलरी, टैक्स, कच्चे माल की कीमत जैसे खर्चे निकाल दें तो कंपनी के पास 3,911 करोड़ रुपए शुद्ध मुनाफे (कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट) के रूप में बचे। यह 2024 के जनवरी-मार्च तिमाही से 1% कम है। पिछले साल कंपनी को 3,952 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था।

रेवेन्यू 6.37% बढ़कर ₹40,920 करोड़ रहा

चौथी तिमाही में कंपनी को प्रोडक्ट और सर्विस बेचकर 40,920 करोड़ रुपए का राजस्व यानी रेवेन्यू हासिल हुआ। सालाना आधार पर यह 6.37% बढ़ा है। जनवरी-मार्च 2024 में कंपनी ने 38,471 करोड़ रुपए का रेवेन्यू जनरेट किया था।

नतीजों में निवेशकों के लिए क्या?

नतीजों के साथ मारुति सुजुकी ने अपने शेयरधारकों के लिए 135 रुपए प्रति शेयर डिविडेंड यानी लाभांश देने का ऐलान किया है। कंपनियां अपने मुनाफे का कुछ हिस्सा शेयरहोल्डर्स को देती हैं, इसे लाभांश कहा जाता है।

कंपनी की कमाई और मुनाफा मार्केट एनालिस्ट की उम्मीद से कम रहा है। ऐसे में शॉर्ट टर्म में शेयरों में गिरावट देखी जा सकती है।

  • शॉर्ट टर्म (1-4 हफ्ते): प्रॉफिट में गिरावट और मार्जिन में कमी के कारण शेयर को ₹11,500-11,900 के आसपास डाउनवर्ड प्रेशर या कंसॉलिडेशन का सामना करना पड़ सकता है। ₹11,600 से नीचे आने पर शेयर ₹11,200 तक जा सकता है। वहीं अगर मैनेजमेंट की तरफ से कोई पॉजिटिव न्यूज आती है तो शेयर को ऊपर ₹11,940 पर रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ सकता है। इस लेवल को तोड़ने पर शेयर ₹12,000-12,400 का लेवल दिखा सकता है।
  • मीडियम टर्म (1-6 महीने): यदि मारुति सुजुकी वॉल्यूम ग्रोथ को बनाए रखती है, मार्जिन में सुधार करती है और ई-विटारा लॉन्च का लाभ उठाती है, तो शेयर विश्लेषकों के लक्ष्य ₹14,050-14,858 की ओर बढ़ सकता है। यानी, करेंट लेवल से 20-27% की तेजी देखने को मिल सकती है। रिस्क की बात करें तो लगातार हाई कॉस्ट, अपेक्षा से कम मांग (विशेष रूप से मिनी/कॉम्पैक्ट सेगमेंट में), या एडवर्स ग्लोबल ट्रेड पॉलिसीज (जैसे, टैरिफ) शामिल हैं।
  • लॉन्ग टर्म (6-12 महीने): मारुति के मजबूत फंडामेंटल (करीब कर्ज मुक्त स्थिति, ₹88,969 करोड़ रिजर्व, 45% बाजार हिस्सेदारी) और स्ट्रैटजिक ईवी/एसयूवी फोकस इसे एक सॉलिड लॉन्ग टर्म बेट बनाते हैं। एनालिस्टों को लगता है कि 6-12 महीनों में कंपनी का शेयर 15,000 के लेवल को पार कर सकता है। स्टॉक के प्रीमियम वैल्यूएशन (पी/ई 25.37 बनाम सेक्टर पी/ई 18.58) को जस्टिफाई करने के लिए कंसिसटेंट अर्निंग ग्रोथ की आवश्यकता है।

एक साल में 10% गिरा मारुति सुजुकी का शेयर

चौथी तिमाही के नतीजों के बाद मारुति सुजुकी का शेयर 25 अप्रैल को 2% गिरकर 11,658 पर बंद हुआ। बीते 6 महीनों से कंपनी के शेयर में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है।

वहीं, इस साल यानी 1 जनवरी से अब तक कंपनी का शेयर 4% ही बढ़ा है। वहीं, बीते एक साल में इसमें 10% की गिरावट हुई है। मारुति सुजुकी का मार्केट कैप 3.7 लाख करोड़ रुपए है।

चौथी तिमाही में गाड़ियों की बिक्री 3.5% बढ़ी

चौथी तिमाही में मारुति सुजुकी ने कुल 6,04,635 गाड़ियां बेचीं। यह किसी भी एक तिमाही में सबसे ज्यादा सेल है। घरेलू मार्केट में कंपनी की सेल इस दौरान 2.8% ज्यादा रही जबकि एक्सपोर्ट 8.1% ज्यादा रही। इसके चलते कंपनी की ओवरऑल ग्रोथ 3.5% रही। डोमेस्टिक मार्केट में कंपनी ने 5,19,546 गाड़ियां बेचीं। जबकि 85,089 गाड़ियों को एक्सपोर्ट किया।

अब कंपनी का इतिहास जानें

मारुति सुजुकी की स्थापना 24 फरवरी 1981 को भारत सरकार के स्वामित्व में मारुति इंडस्ट्रीज लिमिटेड रूप में हुई थी। 1982 में कंपनी ने जापान की सुजुकी कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर जॉइंट वेंचर ‘मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड’ बनाई।

भारतीयों के लिए पहली बजट कार 1983 में मारुति 800 लॉन्च हुई। 47,500 रुपए की एक्स शोरूम कीमत पर कंपनी ने देश के एक बड़े तबके को कार खरीदने के लिए सक्षम बनाया था। मारुति सुजुकी पिछले 40 साल में देश में करीब 3 करोड़ गाड़ियां बेच चुकी है।

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