एन. रघुरामन का कॉलम:  आपकी पानी की बोतल भी असुरक्षित हो सकती है
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एन. रघुरामन का कॉलम: आपकी पानी की बोतल भी असुरक्षित हो सकती है

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3 घंटे पहले

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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

उत्तर भारत के कई इलाकों जैसे नागपुर, भोपाल के अलावा और भी कई शहरों में पारा 42 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया है, लेकिन महाराष्ट्र के अकोला जिले के एक गांव में स्थिति और भी गंभीर हो गई है, यहां पानी की टंकियों पर लोग ताला लगा रहे हैं! अकोला से महज 11 किमी दूर उगवा गांव में लोग ऐसा करने को मजबूर हैं।

इस गांव में पानी अब पैसे से भी ज्यादा कीमती हो गया है। हर घर में लोग बड़े प्लास्टिक के बैरल और टैंकों में पानी जमा कर रहे हैं, जो लगभग एक महीने तक चल सके। कुछ लोगों का कहना है कि आसपास के गांवों में भी यही स्थिति है। नगर निगम की पाइपलाइनों से पानी की आपूर्ति 45 से 60 दिनों में एक बार होती है। इस वजह से लोग पानी जमा करने और उसकी चोरी से बचाने के लिए मजबूर हैं।

हालांकि यहां पानी के टैंकरों का कारोबार जोर-शोर से फल-फूल रहा हैै, लेकिन पानी की कमी ने शादी योग्य युवाओं के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। परिवारों को दुल्हन नहीं मिल रही हैं क्योंकि परिवार पानी की भारी कमी का हवाला देकर रिश्ते करने से मना कर रहे हैं। पर जो एक बात मुझे सता रही है कि भीषण गर्मी में प्लास्टिक के ड्रमों में महीनों तक रखा पानी कितना सुरक्षित है?

जैसे ही गर्मी सताती है या पारा चढ़ता है, हम शहरी लोग भी एक चीज की तुरंत मांग करते हैं- एक बोतल ठंडा पानी। चाहे ट्रैफिक में फंसे हों या मीटिंग्स के बीच भागदौड़ में, बोतलबंद पानी सबसे सुरक्षित और हाइड्रेट रहने का सबसे स्वच्छ विकल्प लगता है। लेकिन क्या ये बोतलें वास्तव में उतनी सुरक्षित हैं जितना हम सोचते हैं? बेंगलुरु के खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग की रिपोर्ट ने इस सवाल को और गंभीर बना दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, आईटी पेशेवरों से भरे हुए इस शहर बेंगलुरु में एकत्र किए गए 72% बोतलबंद पानी के नमूने सुरक्षा परीक्षण में फेल हो गए हैं। ये नमूने माइक्रोबायोलॉजिकल और केमिकल एनालिसिस में गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। परीक्षण में बोतलों में कीटनाशक अवशेष, फ्लोराइड और अतिरिक्त कैल्शियम जैसे रासायनिक संदूषक पाए गए।

कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने कहा कि “अब तक के परिणामों के आधार पर, वर्तमान स्थिति में बोतलबंद पानी सुरक्षित नहीं लगता।”आपको अच्छा लगे या नहीं, लेकिन प्लास्टिक की पानी की बोतलें हमारे जीवन का हिस्सा बन चुकी हैं। प्लास्टिक, जीवाश्म ईंधन या पेट्रोकेमिकल्स से बने रसायनों से बनता है और इसका उत्पादन हमारी धरती और प्लास्टिक उत्पादन इकाइयों के आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

“बियॉन्ड प्लास्टिक्स” संगठन के अनुसार, हर मिनट दुनिया भर में दस लाख प्लास्टिक बोतलें खरीदी जाती हैं और हर साल आधे ट्रिलियन से अधिक प्लास्टिक बोतलें बेची जाती हैं। अधिकांश सिंगल-यूज प्लास्टिक पानी की बोतलें पॉलीइथिलीन टेरेफ्थेलेट (पीईटी या प्लास्टिक 1) से बनी होती हैं। यह प्लास्टिक केवल एक बार उपयोग के लिए होता है। भले इसे विनाइल (प्लास्टिक 3) की तुलना में ‘सुरक्षित’ प्लास्टिक माना जाता है, लेकिन फिर भी यह पानी में लगातार प्लास्टिक के छोटे टुकड़े (माइक्रो- और नैनोप्लास्टिक्स) छोड़ता रहता है।

एक हालिया अध्ययन के अनुसार प्लास्टिक की बोतल में एक लीटर पानी में लगभग 2,40,000 छोटे प्लास्टिक के टुकड़े होते हैं! क्या यह चौंकाने वाला नहीं है? धूप, गर्म तरल पदार्थ, हीटिंग और माइक्रोवेव में रखने से प्लास्टिक बिखरता या टूटता है। गर्मी के मौसम में भी यही होता है। गर्मी के चलते इसके रासायनिक तत्व उसमें रखे किसी भी सामान में मिल जाते हैं। सामान रखने का समय भी प्लास्टिक बोतलों से रासायनिक प्रवास की मात्रा को प्रभावित कर सकता है। लंबे समय तक भंडारण और उच्च गर्मी का मतलब है अधिक रासायनिक लीचिंग और अधिक प्लास्टिक का माइक्रोप्लास्टिक्स में विघटन।

फंडा यह है कि जाहिर तौर पर इस भीषण गर्मी में घर से बिना पानी की बोतल लिए कोई भी नहीं निकल सकता। लेकिन हम कम से कम यह तो कर सकते हैं कि बोतलें कांच या स्टेनलेस स्टील की हों। यहां तक कि फ्लास्क भी स्वास्थ्य के लिए ठीक है, जो पानी को ठंडा भी रखते हैं।

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