एन. रघुरामन का कॉलम:  क्या वाकई में शादी की कोई सही उम्र होती है?
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एन. रघुरामन का कॉलम: क्या वाकई में शादी की कोई सही उम्र होती है?

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7 घंटे पहले

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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

ज्यादातर शनिवारों को यह पार्क ठसाठस भरा रहता है। कुछ तो पार्क के गलियारे में खड़े रहते हैं। उनके पैरों के पास खुला छाता रखा रहता है। ये छाते दरअसल डिस्प्ले स्टैंड की जुगाड़ हैं। इन छातों की दो घुमावदार छड़ियों से बने हिस्से के बीच, छाता मालिक अपने कुंवारे बच्चों की प्रोफाइल चिपका देते हैं।

छाता घुमाते जाइए और संभावित दूल्हे या दुल्हन की जानकारी मिलती जाएगी। छाते के सामने दिख रहे हिस्से में दुल्हन के परिवार को आकर्षित करने के लिए ‘ऊंचाई 5 फुट 7 इंच, खुद का घर-कार, मार्केटिंग में नौकरी और आय लगभग xxxxx युआन सालाना’ जैसी जानकारी होती है।

कुछ प्रोफाइलों में, छाते के आखिरी हिस्से में ऐसी जानकारियां होती हैं, जिन्हें उच्च वर्ग में निषिद्ध माना जाता है, जैसे वजन या माता-पिता की पेंशन। प्रोफाइलों में तस्वीर या नाम नहीं होते। जब कोई प्रोफाइल ध्यान खींचती है, तो दोनों पक्ष एक-दूसरे से वीचैट (चीनी मैसेजिंग ऐप) पर जुड़ जाते हैं और बात आगे बढ़ाते हैं।

आपका स्वागत है दक्षिण-पश्चिमी चीन के शहर चॉन्गकिंग के हिलटॉप पार्क में। यह हर शुक्रवार-शनिवार किसी मेट्रोमनी ऐप की तरह हो जाता है। यहां बड़ी संख्या में रिटायर्ड बुजुर्ग पहुंचते हैं, जो अपने बच्चों के लिए जीवनसाथी तलाश रहे हैं। अकसर मैरिज मार्केट से जुड़ी सफलता की कहानियां कम ही सुनने में आती हैं, फिर भी यहां बहुत लोग पहुंचते हैं।

आपने सुना ही होगा कि इन दिनों बच्चे समय पर शादी नहीं कर रहे। चीन में स्थिति और खराब है, जहां एक अरब से ज्यादा आबादी होने के बावजूद, 2024 में सिर्फ 61 लाख जोड़ों ने शादी रजिस्टर कराई। यह संख्या 2023 की तुलना में 21% कम है।

चीन की एक संतान नीति की वजह से कुंवारे लोग एक अनोखी समस्या का सामना कर रहे हैं। पुरुषों की संख्या महिलाओं से ज्यादा है। इकलौती संतान होने के कारण महिलाएं अक्सर बेहतर शिक्षा प्राप्त करती हैं और वे उस हिसाब से ही बेहतर पार्टनर की उम्मीद रखती हैं। ऐसे कई पुरुष हैं, जो 40 की उम्र तक जीवनसाथी तलाशते रहते हैं। इसके बाद कई अकेले ही रहना पसंद करते हैं।

देर से शादी का एक कारण सामंजस्य की समस्या भी है। शादी को लेकर आज की पीढ़ी की धारणा अलग है। बीते दौर में लोग काफी चीजों से सामंजस्य बैठाते थे। लेकिन आज की पीढ़ी कहती है, ‘हम अपनी पसंद से समझौता क्यों करें?’

इसलिए कई दादा-दादी नहीं समझ पाते कि उनके पोते-पोतियों की अब तक शादी क्यों नहीं हुई? उधर चीन के चॉन्गकिंग में देशभर से लोग पहुंचते हैं क्योंकि वहां बाकी प्लेटफॉर्म की तुलना में सफलता मिलने की संभावना ज्यादा है।

अक्सर शादी की ‘सही’ उम्र, 25 से 35 वर्ष मानी जाती है। इसमें शादी जरूरी है क्योंकि इस उम्र में ज्यादा भावनात्मक परिपक्वता और वित्तीय स्थायित्व होता है और शादी की जिम्मेदारियां लेने से पहले, खुद को समझने का मौका मिल जाता है।

हालांकि भारतीयों में अब देर से शादी का चलन बढ़ रहा है। भले ही कुछ पारंपरिक तौर-तरीके अब भी हैं, लेकिन यह बदलाव शिक्षा, करियर और वित्तीय स्वतंत्रता पर फोकस के साथ सामाजिक उम्मीदों में आए परिवर्तन के कारण हो रहा है, खासतौर पर महिलाओं के लिए।

फंडा यह है कि शादी करना व्यक्तिगत फैसला होता है, लेकिन जोड़ों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जीवन के इस पड़ाव में संतुलन हो। जहां उनके जीवन में इतना स्थायित्व हो कि वे जिम्मेदार बन सकें, वहीं वे इतने युवा भी हों कि उनमें स्वस्थ वैवाहिक जीवन जीते हुए, बच्चों के पालन-पोषण और भविष्य की योजनाएं बनाने की ऊर्जा बरकरार रहे।

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