एन. रघुरामन का कॉलम:  संवाद में कुशल होने के लिए भाषा में महारती होना जरूरी नहीं
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एन. रघुरामन का कॉलम: संवाद में कुशल होने के लिए भाषा में महारती होना जरूरी नहीं

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1 घंटे पहले

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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

“साड़ी लेके जाना, पड़ोसन को जलाना…’ मार्केट में जब आप ऐसी कोई आवाज सुनते हैं, तो भले ही ये खरीदें या नहीं या फिर करोड़ों की लिमोजिन में ही क्यों न बैठे हों, एक बार मुड़कर जरूर देखेंगे कि आवाज कहां से आ रही है।

जैसे ही कार आगे बढ़ेगी, आपके चेहरे पर एक मुस्कान होगी। जैसे ही आप धीरे-धीरे उस वीकली मार्केट में आगे बढ़ते हैं, एक और मजेदार लाइन सुनाई देती है, “वॉव, टी-शर्ट ले जाओ, इंस्टाग्राम पे रील बनाओ, वायरल हो जाओ।’

अगर आप एक व्यापारी हैं और कार उस भीड़भाड़ वाले बाजार में धीरे-धीरे चल रही है, तो मैं गारंटी देता हूं कि आप कार से उतरकर ड्राइवर को आगे बढ़ने के लिए कहेंगे और खुद वहां जाकर इन मजेदार अनाउंसमेंट को सुनेंगे।

आप जानते हैं क्यों? क्योंकि सामान बेचने की मजेदार पिच के लिए किसी बड़े बजट के विज्ञापन अभियान, चमकदार होर्डिंग्स या आक्रामक मार्केटिंग टूल्स की जरूरत नहीं। ये सरल और चतुराई से बनाई लाइनें होती हैं, जिनमें से कई तुरंत बनाई जाती हैं, जो राहगीरों को उनके ठेले की ओर खींचती हैं और लोगों के पर्स से पैसे निकलवा देती हैं।

क्या आप विश्वास कर सकते हैं कि कोई, लेडीज पर्स बेचते हुए कहे, “पर्स टांगो सिंपल, चेहरे पे नहीं आएगी पिंपल।’ ये सुनकर एक महिला ने कहा, “कुछ भी बोल रहा है,’ फिर भी वह आवाज लगाने वाले स्टॉल पर गईं और पर्स खरीद लिया। वो इसलिए क्योंकि उन पांच मिनटों में जब वह वहां खड़ी थीं, उन्होंने कई मजेदार लाइनें सुनीं।

सेल्स बढ़ाने के लिए ऐसी लाइनें बोलने वाला कोई भी मैनेजमेंट ग्रेजुएट नहीं हैं, कई तो कभी स्कूल भी नहीं गए। भोपाल से लखनऊ तक के कुछ वीकली मार्केट में ऐसी कई मजेदार सेल्स पिच सुनी जा सकती हैं। ऐसे संवाद बिक्री से कहीं अधिक होते हैं।

ये अक्सर रिश्ते बनाने, इससे जुड़ा ज्ञान साझा करने और उत्पाद के स्रोत से जुड़ने के बारे में होता है। इन बाजारों में विक्रेता जानते हैं कि ग्राहकों से कैसे जुड़ना है, ताकि ये सामान्य लेनदेन होकर न रह जाए, बल्कि ग्राहकों को इससे जुड़ी तैयारी की सलाह देते हैं, मौसमी विविलाएंं बताते हैं और यहां तक कि उनके उत्पादों के पीछे की भावनात्मक कहानियां भी बताते हैं।

बताइए, जब एक फल विक्रेता कहता है, “देखो कैसे ये अनार का दाना आपके हार से ज्यादा चमकता है दीदी, अगर आप और आपके पति-बच्चे इस अनार को खाएंगे, तो उनकी सेहत गहनों की तरह चमकेगी।’ तो क्या आप अपनी मुस्कान रोक सकते हैं?

यहां कुछ कारण हैं कि ये संवाद क्यों अनोखे हैं:

1. सीधा संबंध: साप्ताहिक बाजार में दुकानें लगाने वाले अधिकांश विक्रेता खुद ही ये उत्पाद बनाते भी हैं जैसे कि घर का बना अचार। यह विश्वास स्थापित करता है क्योंकि वे हर हफ्ते उसी मार्केट में आते हैं, जिससे एक कम्युनिटी की भावना भी विकसित होती है।

2. विशेषज्ञ सलाह: अक्सर उनके पास उस उत्पाद की गहरी समझ होती है, जिसे वे बेचते हैं क्योंकि वे और उनके परिवार वर्षों से उसी व्यवसाय में हैं। वे ग्राहकों के साथ यह ज्ञान साझा करते हैं, ताकि वे सोच-समझकर निर्णय ले सकें। अगर यह फूड वैरायटी भी है, तो भी वे नई ग्रामीण रेसिपी भी साझा करते हैं।

3. कहानी सुनाना: कई विक्रेता उत्पाद के निर्माण की कहानी, उसकी प्रेक्टिस के साथ ये भी बताते हैं कि कैसे उनके उत्पाद सस्टेनिबिलटी को बढ़ावा देते हैं, ये ऐसा विषय है, जो शहरवासियों के लिए दिलचस्प है। यह खरीदारी में मानवीय तत्व जोड़ता है और ग्राहक भी इन उत्पादों के पीछे के श्रम और परवाह को देखकर उनकी सराहना करते हैं। इस विषय पर बात करने की एक वजह है।

गर्मियों की छुट्टियों के बाद सोमवार को टीचर्स ने स्कूल जॉइन कर लिए हैं, ऐसे में मैंने इस बात पर जोर दिया कि साहित्य विशेषज्ञ बनने के लिए भाषा पर महारत जरूरी है। पर जिनकी भाषा में कम रुचि है, उन्हें बेहतर संवाद के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए क्योंकि संचार ही अधिकांश चीजों की कुंजी है।

फंडा यह है कि बच्चों के वाक्य निर्माण में, शिक्षकों को उनकी मदद करनी चाहिए, ताकि वे भी श्रोताओं का ध्यान खींच सकें। समय के साथ, कुछ लोग भाषा पर भी महारत हासिल कर सकते हैं।

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