एन. रघुरामन का कॉलम:  सोशलाइजिंग का जरिया ‘नाइट वाइब्स’ की जगह अब ‘कॉफी रेव्स’ बन गया है
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एन. रघुरामन का कॉलम: सोशलाइजिंग का जरिया ‘नाइट वाइब्स’ की जगह अब ‘कॉफी रेव्स’ बन गया है

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9 घंटे पहले

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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

14 मार्च 2026 को उस वीडियो कॉल में मेरे परिवार की अगली पीढ़ी एक पार्टी में थी। यह ‘द बंड’ नाम की जगह पर आयोजित हुई, जो चीन के सेंट्रल शंघाई में हुआंगपू नदी के पश्चिमी किनारे पर स्थित 1.5 किमी लंबा मशहूर वॉटरफ्रंट प्रोमेनेड है। यह एक ओपन-एयर पार्टी थी, जिसे चीन में ‘रेव.एएम’ कहते हैं।

दुबई और सिंगापुर में इसे ‘माचा रेव्स’ और सियोल व टोरंटो में ‘कॉफी शॉप डांस ऑफ्स’ कहा जाता है। दुनिया भर में यह पार्टी अलग-अलग स्थानीय नामों से तेजी से मशहूर हो रही है, जैसे ‘कैफे रेव्स’। हालांकि, मैंने हमारे यहां इसे अभी लोकप्रिय होते नहीं देखा।

जब चीन में बच्चे अपने पैरेंट्स से कहते हैं कि वे वीकेंड पर इस पार्टी में जा रहे हैं तो वे परेशान नहीं होते कि बच्चे देर से लौटेंगे। वे 9 बजे निकलते हैं और 3 बजे से पहले लौट आते हैं। बल्कि माता-पिता तो उन्हें ज्यादा पीने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। सोच रहे हैं ये कैसी पार्टी है?

यह पार्टी शनिवार रात से रविवार तड़के तक नहीं चलती। यह शनिवार या रविवार को सुबह 9 बजे शुरू होती है और दोपहर 12 बजने से पहले खत्म हो जाती है। कई लोग वहां लंच करने तक मजे लेते हैं और दोपहर की नींद लेने के लिए 3 बजे से पहले घर लौट आते हैं।

यहां तेज लाइटों की चकाचौंध नहीं होती, क्योंकि धूप खिली होती है। जबरदस्त म्यूजिक होता है, लेकिन शराब बिल्कुल नहीं। जी हां, शराब और लेट नाइट पार्टीज को छोड़ कर जेन-जी अब सोशलाइजिंग के नए तरीके ढूंढ रही है। सोच रहे हैं बिना ड्रिंक्स के वे कैसे सोशलाइज करते हैं?

तो यहां इसका मेनू देखिए। हमारे नाइट क्लब्स की तरह वे सब भी एक-दूसरे से अनजान होते हैं। लगभग सभी स्पोर्ट्स शूज में आते हैं। योग से शुरुआत करते हैं, फिर रनिंग होती है और कुछ लोग बॉक्सिंग करते हैं।

कुछ हेल्थ कॉन्शस युवा एचआईआईटी चुनते हैं- एक वर्कआउट स्टाइल, जिसमें अधिकतम 80-95% हार्ट रेट वाली तेज एक्सरसाइज के छोटे-छोटे दौर और बीच-बीच में छोटे रेस्ट या लो-इंटेंसिटी रिकवरी पीरियड्स होते हैं।

वे यहां हाई कैलोरी बर्न करने और बाद के कई घंटों तक मेटाबॉलिज्म बढ़ाने के लिए आते हैं। इससे उनकी कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस बेहतर होती है और फैट तेजी से कम होता है। वे एक-दूसरे से बात करते हुए हाथ में गिलास भी थामे रखते हैं, लेकिन उसमें मौजूद सामग्री चीप नहीं, बल्कि हाई-एंड कॉफी होती है।

पुरानी पीढ़ी जहां इस सोच में भरोसा रखती थी कि नेटवर्किंग या मसलों को सुलझाने के लिए साथ में पीना जरूरी होता है, वहीं जेन-जी मानती है कि अल्कोहल-फ्री सोशलाइजिंग उनकी पीढ़ी में लोकप्रिय विकल्प होगी और वे तब भी नेटवर्किंग कर पाएंगे।

वीडियो कॉल पर मुझसे बातचीत में उनमें से एक युवती ने कहा कि शुरू में उसे ‘सोबर पार्टी’ का मतलब तक पता नहीं था। फिर उसे महसूस हुआ कि ‘कॉफी रेव’ सच में उसे सचेत और जीवंत महसूस कराता है। रात में नींद भी अच्छी आती है।

अलग-थलग होती दुनिया में जहां कई लाेग, खासकर जेन-जी कनेक्ट होने के तरीके ढूंढ रही है, वहीं कई सुपर क्लब्स द्वारा आयोजित कॉफी रेव्स उन्हें म्यूजिक के जरिए दोस्त बनाने में मदद कर रहे हैं। कई महिला पार्टिसिपेंट्स भी इस जबरदस्त म्यूजिक का आनंद लेती हैं, लेकिन दो चीजों के कारण खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं- दिन की रोशनी और शराब न होना। बिना ड्रिंक्स के अजनबियों से कनेक्ट करना उन्हें ज्यादा सुरक्षित और बेहतर लगता है। इससे पैरेंट्स भी तनाव मुक्त रहते हैं।

यह तथ्य है कि दुनिया भर में पारंपरिक क्लब्स अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं, कॉफी रेव्स का बढ़ता चलन इसी से जुड़ा हुआ है। दुनियाभर में, मेलबर्न से टोक्यो तक और क्लबिंग के लिए सर्वाधिक ख्यातनाम बर्लिन में भी रात 3 बजे तक चलने वाले क्लब्स की संख्या घट गई है।

फंडा यह है कि भारत के आंत्रप्रेन्योर्स को भी इस वैश्विक चलन का फायदा उठाना चाहिए। उन्हें ऐसे कॉफी रेव्स शुरू करने चाहिए, जो परोक्ष रूप से भावी पीढ़ी को सेहतमंद रहने के लिए प्रेरित कर सकें।

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