ओला की सेल दूसरी तिमाही में 44% कम हुई:  रेवेन्यू 43% कम होकर ₹​​​​​​​690 करोड़ रहा; एक महीने में 10% गिरा शेयर
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ओला की सेल दूसरी तिमाही में 44% कम हुई: रेवेन्यू 43% कम होकर ₹​​​​​​​690 करोड़ रहा; एक महीने में 10% गिरा शेयर

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मुंबई2 घंटे पहले

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कंपनी बोली- खर्चे में 52% कटौती से सपोर्ट मिला - Dainik Bhaskar

कंपनी बोली- खर्चे में 52% कटौती से सपोर्ट मिला

भारत की तीसरी बड़ी इलेक्ट्रिक टू व्हीलर मैन्युफैक्चरर ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ने जुलाई-सितंबर तिमाही में 55,000 गाड़ियां बेची हैं। सालाना आधार पर कंपनी की सेल में 44% की कमी आई है। वहीं, पिछली तिमाही यानी अप्रैल-जून के मुकाबले 19% कम रही।

इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू भी सालाना आधार पर 43.16% कम होकर 690 करोड़ रुपए पर आ गया है। पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी ने 1,214 करोड़ रुपए का रेवेन्यू जनरेट किया था। वस्तुओं और सेवाओं को बेचने से मिलने वाली राशि रेवेन्यू है। वहीं, कमाई भी सालाना आधार पर 42.47% कम हुई है।

हालांकि Q2 में ओला का घाटा (कॉन्सोलिडेटेड नेट लॉस) सालाना आधार पर 15.56% कम होकर 418 करोड़ रुपए पर आ गया है। पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी को 495 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था।

क्या होता है स्टैंडअलोन और कॉन्सोलिडेटेड?

कंपनियों के रिजल्ट दो भागों में आते हैं- स्टैंड अलोन और कॉन्सोलिडेटेड। स्टैंडअलोन में केवल एक यूनिट का वित्तीय प्रदर्शन दिखाया जाता है। जबकि कॉन्सोलिडेटेड या समेकित फाइनेंशियल रिपोर्ट में पूरी कंपनी की रिपोर्ट दी जाती है।

कंपनी बोली- खर्चे में 52% कटौती से सपोर्ट मिला

कंपनी ने शेयरहोल्डर्स को लिखे लेटर में बताया कि ओला इलेक्ट्रिक का ऑटो बिजनेस पहली बार EBITDA में मुनाफा देने लायक हो गया, ये 30.7% ग्रॉस मार्जिन की वजह से हुआ और ऑपरेटिंग खर्चे में करीब 52% की कटौती से सपोर्ट मिला। बिजनेस अब कैश भी जनरेट करने लगा है। ऑपरेशंस से अंडरलाइंग कैश फ्लो 15 करोड़ रुपए का रहा।

कंपनी ने कहा ‘हाल ही में खत्म हुए फेस्टिव सीजन में सेल्स साल भर पहले जितनी ही रहीं। हम इसे एक साकारात्मक बदलाव का फेज मानते हैं। इस दौरान हमारा फोकस खर्चे कंट्रोल करने और प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करने, ऑपरेशंस को स्ट्रिमलाइन करने और फंडामेंटल्स को मजबूत बनाने और ऑटो एवं एनर्जी दोनों में अगले ग्रोथ फेज के लिए तैयार होने पर रहा।

EBITDA क्या है?

EBITDA एक कंपनी की कमाई देखने का एक आसान तरीका है जो उसके मुख्य कारोबार से होने वाले मुनाफे को मापता है। इसमें ब्याज, टैक्स, डेप्रीशिएशन (समय के साथ मशीनों और संपत्तियों की वैल्यू कम होना) और अमोर्टाइजेशन (लोन और अन्य खर्चे) जैसे अतिरिक्त बोझ शामिल नहीं होते हैं। आसान शब्दों में कहें तो, यह बताता है कि कंपनी का बिजनेस कितना मजबूत चल रहा है, क्योंकि यह उन खर्चों को हटाकर सिर्फ कोर ऑपरेशंस पर फोकस करता है।

जैसे कि अगर आपकी दुकान से रोज कितना मुनाफा हो रहा है, बिना किराया, टैक्स या पुरानी मशीनों के रखरखाव के खर्च को कैलकुलेट किए। कंपनी का मैनेजमेंट और निवेशक उसकी असली ताकत को समझने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। इसमें ध्यान देने वाली बात यह है कि इससे कंपनी का पूरा हालचाल नहीं पता चलता, यह सिर्फ एक झलक देता है।

एक साल में 37% गिरा है ओला का शेयर

नतीजों के बाद आज यानी 6 नवंबर को ओला का शेयर 5% गिरकर 47.57 के स्तर पर बंद हुआ। बीते एक महीने में कंपनी का शेयर 10%, 6 महीने में 3.4% और एक साल में 37% गिरा है। हालांकि बीते 3 महीने में शेयर ने करीब 16% का रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप करीब 21 हजार करोड़ रुपए है।

2017 में ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की हुई थी स्थापना

बेंगलुरु स्थित ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की स्थापना 2017 में हुई थी। कंपनी मुख्य रूप से ओला फ्यूचर फैक्ट्री में इलेक्ट्रिक व्हीकल, बैटरी पैक, मोटर्स और व्हीकल फ्रेम बनाती है।

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