7 घंटे पहले
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आज (गुरुवार, 29 अक्टूबर) कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी है, इस तिथि पर करवा चौथ का व्रत किया जाता है। विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सौभाग्य की कामना से निर्जला व्रत रखती हैं। निर्जला व्रत यानी महिलाएं पूरे दिन अन्न और जल का त्याग करती हैं, रात में चंद्र दर्शन, चंद्र को अर्घ्य और पूजा के बाद ही जल और भोजन ग्रहण करती हैं।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, करवा चौथ पर गणेश जी, चौथ माता और चंद्र देव की विशेष पूजा की जाती है। चतुर्थी तिथि के स्वामी भगवान गणेश माने गए हैं। इस दिन पति-पत्नी को साथ बैठकर गणपति पूजन करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और वैवाहिक जीवन में प्रेम बढ़ता है।
सूर्य को अर्घ्य देकर करें दिन की शुरुआत
करवा चौथ पर सुबह सूर्य देव को जल अर्पित करके दिन की शुरुआत करनी चाहिए। इसके बाद घर के मंदिर में पूजा करें और फिर करवा चौथ व्रत करने का संकल्प लें। व्रत करने वाली महिलाएं दिनभर पूजा-पाठ और धार्मिक परंपराओं का पालन करती हैं।
शाम को पति-पत्नी एक साथ करें पूजा
- शाम को पति-पत्नी एक साथ भगवान गणेश और चौथ माता की पूजा करने की तैयारी करें। घर के मंदिर को साफ करके गणेश जी और चौथ माता की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- पूजा में 21 दूर्वा दल गणेश जी को चढ़ाएं। इसके साथ गणपति के 12 नामों के मंत्रों का जाप कम से कम 108 बार किया जा सकता है।
- गणेश जी को जनेऊ अर्पित करें। इसके बाद चंदन, सिंदूर, अबीर, गुलाल, इत्र और पूजा का धागा चढ़ाएं। अक्षत यानी साबुत चावल अर्पित करें।
- भगवान को लड्डुओं का भोग लगाएं। इसके बाद कर्पूर जलाकर आरती करें।
- चौथ माता को भी पूजन सामग्री चढ़ाएं, देवी को सुहाग का सामान जैसे लाल चुनरी, लाल चूड़ियां, कुमकुम आदि चढ़ाएं। पूजा में करवा चौथ की व्रत कथा पढ़ें।
- पूजा पूरी होने पर भगवान से जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगें। सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य भी करें।
- शाम को चंद्र उदय के बाद चंद्र देव को जल-दूध चढ़ाएं। मिठाई का भोग लगाएं। आरती करें। ऊँ सों सोमाय नम: मंत्र का जप करें।
गणेश जी के इन मंत्रों का कर सकते हैं जप
- ऊँ गणाधिपतये नमः
- ऊँ उमापुत्राय नमः
- ऊँ विघ्ननाशनाय नमः
- ऊँ विनायकाय नमः
- ऊँ ईशपुत्राय नमः
- ऊँ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः
- ऊँ एकदन्ताय नमः
- ऊँ इभवक्त्राय नमः
- ऊँ मूषकवाहनाय नमः
- ऊँ कुमारगुरवे नमः
चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद पूरा होता है व्रत
करवा चौथ की पूजा में चंद्र दर्शन सबसे महत्वपूर्ण परंपराओं में से एक है। रात में चंद्रमा दिखाई देने पर जल से अर्घ्य देकर पूजा की जाती है। इसके बाद पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए व्रत खोला जाता है। चंद्रमा के दर्शन से पहले करवा चौथ माता की कथा सुनना या पढ़ना चाहिए। करवा चौथ व्रत पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक भी माना जाता है।








