5 घंटे पहले
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कल करवा चौथ है और बाजारों में गहनों की खूब खरीदारी हो रही है। इस बार खदान से निकलने वाले असली हीरों के मुकाबले लैब-ग्रोन डायमंड यानी लैब में तैयार हीरों की काफी डिमांड है।
लैब में बने हीरे असली हीरों से करीब 70% तक सस्ते मिलते हैं। खास बात तो ये है कि इनकी चमक, मजबूती और बनावट में रत्ती भर भी फर्क नहीं होता।
अगर आप भी इस करवा चौथ लैब में बने डायमंड की ज्वेलरी खरीदने की सोच रहे हैं, तो टैक्स, GST, मेकिंग चार्ज और रीसेल से जुड़े नियम पहले जरूर समझ लें।

1. लैब-ग्रोन डायमंड क्या होते हैं , क्या ये असली हीरे हैं?
ऑकेरा की सह-संस्थापक और सीईओ लिसा मुखेड़कर के अनुसार, लैब में बने हीरे 100% असली होते हैं। चमक, मजबूती और बनावट में ये खदान वाले हीरों जैसे ही होते हैं।
- दोनों में अंतर क्या है?: खदान वाले हीरे कुदरती रूप से जमीन के नीचे बनते हैं, जबकि लैब-ग्रोन हीरे वैज्ञानिकों द्वारा लैब में मशीनों की मदद से तैयार किए जाते हैं।
- कीमत में कितना फर्क?: लैब वाले हीरे बहुत सस्ते होते हैं। सोने की अंगूठी में 1 कैरेट का लैब हीरा आपको ₹60,000 से ₹1.2 लाख में मिल जाएगा, जबकि खदान वाला असली हीरा ₹3 लाख या उससे भी महंगा मिलता है।

2. लैब-ग्रोन हीरे की ज्वेलरी पर कितना GST लगता है?
फाइनेंशियल एजुकेटर और सीए साक्षी जैन के मुताबिक, लैब वाले हीरों पर भी टैक्स की दरें आम हीरों और सोने की तरह ही हैं।
- तैयार ज्वेलरी पर GST: अगर आप अंगूठी, हार या कान की बाली जैसी तैयार ज्वेलरी खरीदते हैं, तो पूरी ज्वेलरी पर 3% GST लगेगा। यही रेट सोने और नेचुरल डायमंड की ज्वेलरी पर भी लागू होता है।
- लूज डायमंड:अगर आप अंगूठी में जड़े बिना सिर्फ लूज डायमंड यानी अकेला हीरा खरीदते हैं, तो उस पर सिर्फ 0.25% GST लगता है। लेकिन जब उस हीरे को सोने की अंगूठी या हार में जड़वाएंगे, तो टैक्स बढ़कर 3% हो जाएगा।
3. खरीदारी करते समय सर्टिफिकेट और हॉलमार्क की जांच कैसे करें?
खरीदारी करते समय डायमंड और सोने दोनों के कंपोनेंट को अलग-अलग चेक करना चाहिए:
- डायमंड सर्टिफिकेट: हीरे की शुद्धता के लिए IGI, SGL या GIA जैसी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का ग्रेडिंग सर्टिफिकेट जरूर मांगें।
- नए लेबलिंग नियम: BIS के मुताबिक, सर्टिफिकेट पर पूरा नाम ‘Laboratory-Grown Diamond’ लिखा होना जरूरी है। शॉर्टकट में LGD या Lab Diamond लिखना मान्य नहीं है।
- सोने की शुद्धता: सोने पर सरकारी हॉलमार्क जरूर देखें। 750 नंबर का मतलब 18 कैरेट और 916 नंबर का मतलब 22 कैरेट (22K) सोना होता है। डायमंड ज्वेलरी ज्यादातर 18K या 14K सोने में ही बनाई जाती है।
4. मेकिंग चार्ज कितना है और बिल बनवाते समय किन बातों का ध्यान रखें?
ज्वेलरी की बनवाई का कोई एक पक्का रेट नहीं होता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि डिजाइन कितना बारीक है, गहना हाथ से बना है या मशीन से, और आप उसे किसी ब्रांडेड शोरूम से खरीद रहे हैं या स्थानीय सुनार से।
- मेकिंग चार्ज का हिसाब: आमतौर पर बनवाई शुल्क सोने की कुल कीमत का 10% से 25% तक होता है, या फिर सुनार प्रति ग्राम सोने के हिसाब से एक तय रेट लगाता है।
- खरीदारी के समय जरूरी सलाह: ज्वेलरी खरीदने से पहले सुनार से उसकी वापस बेचने और एक्सचेंज बदलने की पॉलिसी कागज पर लिखित रूप में जरूर ले लें।
5. लैब-ग्रोन डायमंड बेचने पर कितने पैसे वापस मिलेंगे?
लैब वाले हीरे बहुत तेजी से और भारी तादाद में बन रहे हैं, इसलिए पुराना हीरा बेचने पर नेचुरल (खदान वाले) हीरे के मुकाबले कम पैसे वापस मिलते हैं:
- कितने पैसे मिलेंगे?: पुराना लैब हीरा बेचने पर उसकी खरीदारी की कीमत का सिर्फ 20% से 30% हिस्सा ही वापस मिलता है। वहीं खदान वाले हीरे पर 40% से 60% तक मिल जाता है।
- उदाहरण से समझें: अगर आप ₹1 लाख की लैब-ग्रोन डायमंड ज्वेलरी खरीदते हैं, तो 1 से 5 साल बाद बेचने पर हीरे के बदले सिर्फ ₹20,000 से ₹35,000 ही मिलेंगे। हालांकि, ज्वेलरी में लगे सोने की कीमत उस समय के बाजार रेट के हिसाब से अलग से मिलेगी।
- जरूरी सलाह: पुराना हीरा किसी दूसरे सुनार को बेचने के बजाय उसी दुकान पर वापस बेचें जहां से खरीदा था, वहां बायबैक पॉलिसी के तहत थोड़े बेहतर पैसे मिल सकते हैं।
6. बेचने पर कैपिटल गेंस टैक्स कितना लगेगा?
2024 के बजट के बाद लैब में बने और खदान से निकले- दोनों तरह के हीरों पर एक जैसा ही कैपिटल गेंस टैक्स लगता है। टैक्स इस बात पर निर्भर करता है कि आपने हीरा कितने समय पास रखकर बेचा:
- 2 साल से पहले बेचने पर: हीरा खरीदने के 2 साल के अंदर बेचने पर जो भी मुनाफा होगा, उस पर आपकी कमाई की कैटेगरी के हिसाब से टैक्स लगेगा।
- 2 साल के बाद बेचने पर: अगर आप 2 साल बाद हीरा बेचते हैं, तो मुनाफे पर फ्लैट 12.5% का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (LTCG) टैक्स देना होगा।







