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सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
घाटमपुर डाकघर में एजेंट और कर्मचारियों की मिलीभगत से ग्राहक के आठ लाख रुपये से अधिक हड़पने का मामला सामने आया है। एजेंट ने महिला के माता-पिता के नाम खाता खोलकर डाकघर की मुहर लगाकर महिला को फर्जी पासबुक दे रखी थी। इसमें वह रकम की प्रविष्टियां भरता रहा लेकिन धन डाकघर में जमा करने के बजाय खुद रखता था। शिकायत पर डाक विभाग ने तीन सदस्यीय टीम गठित कर जांच शुरू कर दी है। मामले में तत्कालीन उपडाकपाल राकेश मिश्रा और क्लर्क शिवम सचान को निलंबित कर दिया गया है।
मूलरूप से घाटमपुर निवासी और वर्तमान में शहर में रहने वाली आकांक्षा चौरसिया के पिता जितेंद्र चौरसिया ने वर्ष 2007 में एजेंट शैलेंद्र पांडेय के माध्यम से डाकघर में खाता खुलवाया था। वर्ष 2012 में उनके पिता की मृत्यु के बाद एजेंट ने खाता मां के नाम स्थानांतरित कराने की बात कही। वर्ष 2024 में मां की मृत्यु के बाद आकांक्षा ने जमा रकम निकालने के लिए एजेंट से संपर्क किया लेकिन वह टालमटोल करता रहा। कुछ दिन पहले पासबुक लेकर डाकघर पहुंचने पर पता चला कि माता-पिता के नाम कोई खाता ही नहीं है।
इसके बाद उन्होंने प्रधान डाकघर में शिकायत दर्ज कराई। डाक निदेशक अनुसुइया प्रसाद के मुताबिक, मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है। पासबुक जारी होने और उस पर मुहर लगने की भी जांच हो रही है। एक नवंबर को महिला और एजेंट के बीच समझौते तथा बैंक चेक दिए जाने की चर्चा है। ठगी की वास्तविक रकम जांच के बाद स्पष्ट होगी।






