काम के साथ में आनंद से जीने के 7 सूत्र:  105 साल की उम्र में ड्यूटी करने वाले डॉक्टर की सीख; हर छोटी तकलीफ पर घबराना और लगातार जांच कराते रहना तनाव बढ़ाता है
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काम के साथ में आनंद से जीने के 7 सूत्र: 105 साल की उम्र में ड्यूटी करने वाले डॉक्टर की सीख; हर छोटी तकलीफ पर घबराना और लगातार जांच कराते रहना तनाव बढ़ाता है

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लंबी और स्वस्थ उम्र का राज अपने काम के साथ आनंद से जीने में है। यह सीख जापान के विश्व प्रसिद्ध डॉक्टर शिगेकी हिनोहारा ने उनके क्लीनिक आने वाले लाखों मरीजों को दी। उन्होंने खुद 105 वर्ष की आयु तक सक्रिय जीवन जिया। बढ़ती उम्र में सार्थक जिंदगी के जरूरी सूत्र जानिए। डॉ. हिनोहारा कहते थे कि हर छोटी तकलीफ पर घबराना और लगातार जांच कराते रहना तनाव बढ़ाता है। डॉक्टर की सलाह जरूर लें, लेकिन अपने शरीर पर भरोसा रखें। उनका मानना था कि कई बार अच्छा संगीत पालतू जानवर या सकारात्मक सोच दवाओं से ज्यादा असर करती है। आपको युवा रखेंगी ये बातें 1. पूरी तरह रिटायर न हों, व्यस्त रहें।
2. भूख से 80% ही पेट भरें।
3. रोज चलें, सीढ़ियां चढ़ें।
4. सेहत पर ओवरथिंकिंग से बचें।
5. हर दिन का उद्देश्य तय करें।
6. बिना अपेक्षा दूसरों की मदद करें।
7. जीवन का आनंद लें। यही स्वस्थ जीवन की सबसे बड़ी दवा है। संतुलित भोजन करें हिनोहारा अपनी डाइट में ‘हारा हाची बु’ का पालन करते थे। यानी भूख से 20% कम खाना। उनका मानना था कि अत्यधिक भोजन शरीर पर अनावश्यक दबाव डालता है। हर दिन पैदल जरूर चलें जिम जरूरी नहीं, लेकिन शरीर को चलाते रहना जरूरी है। हिनोहारा पैदल चलने, सीढ़ियां चढ़ने और हल्के व्यायाम की सलाह देते थे। 100 की उम्र के बाद भी वे सीढ़ियां चढ़ते थे। वे कहते थे कि रक्तसंचार और लचीलापन बनाए रखना ही बुढ़ापे की असली दवा है। स्वास्थ्य के डर से दूर रहें डॉ. हिनोहारा कहते थे कि हर छोटी तकलीफ पर घबराना और लगातार जांच कराते रहना तनाव बढ़ाता है। डॉक्टर की सलाह जरूर लें, लेकिन अपने शरीर पर भरोसा रखें। उनका मानना था कि कई बार अच्छा संगीत पालतू जानवर या सकारात्मक सोच दवाओं से ज्यादा असर करती है।



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