कार्तिक पूर्णिमा 5 नवंबर को:  भगवान शिव ने किया था त्रिपुरासुर का वध, नदी किनारे दीपक जलाने की परंपरा, जानिए कार्तिक पूर्णिमा से जुड़ी खास बातें
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कार्तिक पूर्णिमा 5 नवंबर को: भगवान शिव ने किया था त्रिपुरासुर का वध, नदी किनारे दीपक जलाने की परंपरा, जानिए कार्तिक पूर्णिमा से जुड़ी खास बातें

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14 घंटे पहले

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बुधवार, 5 नवंबर को कार्तिक मास की पूर्णिमा पड़ रही है। इस तिथि को कार्तिक पूर्णिमा, त्रिपुरारी पूर्णिमा और देव दीपावली के नाम से जाना जाता है। इसी दिन श्री गुरु नानक देव जी की जयंती भी मनाई जाती है। इस दिन के साथ कार्तिक मास समाप्त हो जाएगा और अगले दिन 6 नवंबर से मार्गशीर्ष मास का प्रारंभ होगा।

भगवान शिव ने किया था त्रिपुरासुर का वध

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा का संबंध भगवान शिव से है। मान्यता है कि इसी तिथि पर भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था। इस कारण इस तिथि को त्रिपुरारी पूर्णिमा कहा जाता है। ये तिथि धर्म की अधर्म पर विजय का प्रतीक मानी जाती है।

मान्यता – देव दीपावली पर देवता मनाते हैं दीपोत्सव

जैसे कार्तिक अमावस्या को मनुष्य दीपावली मनाते हैं, वैसे ही कार्तिक पूर्णिमा को देवता दीपावली मनाते हैं। जब शिव जी ने त्रिपुरासुर का वध किया था, तब शिव जी का स्वागत करने के लिए देवताओं ने दीप जलाए थे। मान्यता है कि इस दिन समस्त देवता पृथ्वी पर आते हैं गंगा तटों पर दीप प्रज्ज्वलित करते हैं।

नदी स्नान और दीपदान करने की परंपरा

कार्तिक पूर्णिमा नदी स्नान करने की परंपरा है। इस दिन कार्तिक मास के स्नान भी समाप्त होते हैं। कई भक्त पूरे कार्तिक मास में नदी स्नान करते हैं और पूर्णिमा के दिन इस मास का अंतिम स्नान किया जाता है। पूर्णिमा पर सूर्यास्त के बाद नदी के किनारे दीपदान करने की परंपरा है। भक्त जल में दीप प्रवाहित कर भगवान विष्णु और शिव का ध्यान करते हैं। जो लोग नदी तक नहीं पहुंच पाते हैं, वे घर में ही गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से तीर्थ-स्नान के समान पुण्य प्राप्त होता है।

कथा पढ़े-सुनें और पूजन-दान करें

  • देव दीपावली पर प्रातःकाल सूर्यदेव को अर्घ्य देने का विशेष महत्व है। इसके लिए तांबे के लोटे में जल, कुमकुम, चावल और पुष्प डालकर ॐ सूर्याय नमः मंत्र का जप करते हुए अर्घ्य अर्पित करना चाहिए।
  • इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा का पढ़नी-सुननी चाहिए। साथ ही, जरूरतमंद लोगों को फल, अनाज, दाल, चावल और गर्म वस्त्रों का दान करना चाहिए।
  • दीपदान से पहले दीपक की पूजा करनी चाहिए। घी या तेल का दीप जलाकर उसे नदी किनारे प्रवाहित किया जा सकता है या नदी किनारे रखा जा सकता है। यदि घर में दीपदान करना हो तो दीपक को आंगन, तुलसी के पास या मंदिर में रखकर भगवान विष्णु का ध्यान करना चाहिए।
  • कार्तिक पूर्णिमा प्रकाश, भक्ति और सेवा का पर्व है। देव दीपावली हमें ये संदेश देती है कि अंधकार चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो, भक्ति और ज्ञान का प्रकाश उसे अवश्य मिटा देता है। श्रद्धा, स्नान, दीपदान और दान-पुण्य के माध्यम से ये पर्व जीवन में सद्भाव, शांति और समृद्धि का संचार करता है।

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