5 नवंबर को गुरु नानक देव जयंती:  नानक जी की सीख- अच्छाई-बुराई को परखें और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लें, तभी जीवन में सुख-शांति आएगी
जीवन शैली/फैशन लाइफस्टाइल

5 नवंबर को गुरु नानक देव जयंती: नानक जी की सीख- अच्छाई-बुराई को परखें और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लें, तभी जीवन में सुख-शांति आएगी

Spread the love


  • Hindi News
  • Jeevan mantra
  • Dharm
  • Guru Nanak Dev Jayanti On 5th November, Significance Of Gurunanak Dev Jayanti, Life Management Tips Of Gurunanak Hindi

20 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

5 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा है और इस दिन सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानकदेव जी की जयंती है। गुरु नानक हमेशा यात्रा करते रहते थे और अपने सरल आचरण और उपदेशों से शिष्यों के साथ ही समाज को भी सुखी जीवन जीने के तौर-तरीके सिखाते थे। नानक जी के जीवन के कई ऐसे किस्से हैं, जिनमें बताए गए सूत्रों को जीवन में उतार लेने से हमारी सभी समस्याएं दूर हो सकती हैं। यहां जानिए नानक जी का एक ऐसा चर्चित किस्सा, जिसमें उन्होंने संदेश दिया है कि अच्छाई को हर जगह फैलाना चाहिए और बुराई को एक रोक रोक देना चाहिए।

एक बार गुरु नानक अपने शिष्यों के साथ एक गांव पहुंचे। जैसे ही गांव के लोगों को गुरु नानक के आगमन का पता चला, सभी उनके डेरे पर प्रणाम करने पहुंचे। उन्होंने सोचा कि गुरु नानक के दर्शन और आशीर्वाद से उनके जीवन में सुख और शांति आएगी।

गुरु नानक ने गांव के लोगों के एक समूह को देखा और कहा कि बस जाओ, यानी यहीं ठहरो और अपने जीवन को यहीं जीते रहो। कुछ देर बाद गांव का दूसरा समूह आया, तो नानक जी ने कहा कि उजड़ जाओ, यानी बिखर जाओ और अपने-अपने मार्ग पर चलो।

ये आशीर्वाद सुनकर शिष्यों को आश्चर्य हुआ। गांव के लोगों के जाने के बाद शिष्यों ने नानक जी से पूछा कि गुरु जी, ये कैसा आशीर्वाद है? एक समूह को आप बस जाने का आशीर्वाद देते हैं और दूसरे को उजड़ जाने का। इसका क्या अर्थ है?

गुरु नानक ने धैर्यपूर्वक समझाया कि पहले समूह के लोग बुरे कर्मों में लगे रहते हैं। अगर ऐसे लोग एक ही जगह रुक जाएं, तो समाज में बुराई नहीं फैलेगी। यही कारण है कि मैंने उन्हें यहीं बस जाने का आशीर्वाद दिया। दूसरे समूह के लोग अच्छे और धर्म के अनुसार काम करने वाले थे। उन्हें उजड़ जाने का आशीर्वाद दिया ताकि वे अलग-अलग जगहों में जाएं और अच्छाई फैलाएं। उनके कर्मों से समाज का भला होगा और लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा।

गुरु नानक की सीख

गुरु नानक ने संदेश दिया कि हमें अच्छाई को हर जगह फैलाना चाहिए और बुराई को सीमित या समाप्त कर देना चाहिए। समाज और व्यक्तिगत जीवन की भलाई तभी संभव है जब हम सही निर्णय लें और अपने कर्मों से सकारात्मक बदलाव लाएं।

  • अच्छाई-बुराई को परखें

जैसे गुरु नानक ने अच्छाई और बुराई को अलग-अलग समूहों में देखा, वैसे ही हमें अपने जीवन में महत्वपूर्ण और अनावश्यक कार्यों को अलग-अलग करना चाहिए। अपने समय और ऊर्जा को केवल उन कार्यों में लगाएं जो जीवन और समाज के लिए लाभकारी हैं।

  • सकारात्मकता पर ध्यान दें

जीवन प्रबंधन केवल योजना बनाने तक सीमित नहीं है। यह भी सुनिश्चित करना है कि हमारे कार्य दूसरों पर सकारात्मक प्रभाव डालें। छोटे-छोटे अच्छे कर्म भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। इसलिए सकारात्मकता पर ध्यान देना चाहिए।

  • बुराई और अनावश्यकता को सीमित करें

गुरु नानक ने बुरे लोगों को एक जगह पर बस जाने का आशीर्वाद दिया ताकि बुराई फैल न सकें। हमें भी बुरी आदतों, विचारों और लोगों से दूरी बनानी चाहिए, जो नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।

  • परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लें

जीवन हमेशा योजनानुसार नहीं चलता। कभी-कभी अप्रत्याशित परिस्थितियां सामने आती हैं। गुरु नानक ने स्थिति के अनुसार अलग-अलग आशीर्वाद दिए। हमें भी अपने समय और प्रयास को परिस्थितियों के अनुसार बदलना चाहिए, परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेंगे तो कई समस्याएं दूर हो जाएंगी।

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *