कार्तिक मास 8 अक्टूबर से 5 नवंबर तक:  दीपोत्सव का महीना है कार्तिक, इस महीने में नदी स्नान और दान-पुण्य करने की है परंपरा
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कार्तिक मास 8 अक्टूबर से 5 नवंबर तक: दीपोत्सव का महीना है कार्तिक, इस महीने में नदी स्नान और दान-पुण्य करने की है परंपरा

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7 घंटे पहले

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हिन्दी पंचांग का आठवां महीना कार्तिक 8 अक्टूबर से शुरू हो रहा है, ये महीना 5 नवंबर तक रहेगा। इस महीने में साल का सबसे बड़ा उत्सव दीपावली 20 अक्टूबर को है। हालांकि इस साल कार्तिक मास की अमावस्या दो दिन है, इस वजह से दीपावली की तारीख को लेकर पंचांग भेद हैं, लेकिन ज्योतिषियों का मत है कि 20 तारीख को ये पर्व मनाना ज्यादा शुभ है। इसके बाद 21 अक्टूबर को स्नान-दान की कार्तिक अमावस्या रहेगी।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, कार्तिक मास में ऋतु परिवर्तन का समय रहता है। वर्षा ऋतु के बाद शीत ऋतु की शुरुआत होती है। इन दिनों में सुबह जल्दी जागना चाहिए और स्नान के बाद सूर्य पूजा के साथ दिन की शुरुआत करनी चाहिए। ठंड के दिनों में सुबह जल्दी उठेंगे तो आलस दूर होगा। सुबह-सुबह की ताजी हवा हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक रहती है।

सूर्य को अर्घ्य देकर करें दिन की शुरुआत

सुबह जल्दी उठें, कुछ देर योग-ध्यान और व्यायाम करें। स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल भरें और उसमें चावल, कुमकुम, लाल फूल डालें। ऊँ सूर्याय नम: मंत्र जपते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित करें। सुबह कुछ देर सूर्य की रोशनी में खड़े रहने से शरीर को विटामिन डी मिलती है। इस तरह दिन की शुरुआत करेंगे तो दिनभर सकारात्मकता बनी रहेगी।

कार्तिक मास में करें तीर्थ दर्शन और नदी स्नान

कार्तिक महीने में नदी स्नान, तीर्थ दर्शन करने की परंपरा है। इस महीने में गंगा, यमुना, नर्मदा, शिप्रा, कावेरी जैसी पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए। नदी में स्नान करना संभव न हो तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। अगर घर में गंगाजल भी नहीं है तो पवित्र नदियों का ध्यान करते हुए स्नान कर सकते हैं।

कई भक्त पूरे कार्तिक मास में रोज सुबह नदी स्नान करते हैं। नदी स्नान के अलावा इस महीने में भगवान श्रीकृष्ण, शिव जी, विष्णु जी के पौराणिक मंदिरों में दर्शन-पूजन करना चाहिए। इस महीने में मथुरा, प्रयागराज, वाराणसी, उज्जैन, नासिक, देवघर जैसे पौराणिक महत्व वाले शहरों में दर्शन कर सकते हैं।

घर के बाहर रोज जलाएं दीपक

कार्तिक मास में रोज शाम को पवित्र नदियों के किनारों पर दीपक जलाने की भी परंपरा है। इसे दीपदान करना कहते हैं। इसके अलावा अपने घर के बाहर भी रोज दीपक जलाना चाहिए। सूर्यास्त के बाद घर के आंगन में तुलसी के पास दीपक जलाएं। घर के आसपास जो मंदिर हो, वहां भी दीपक जला सकते हैं।

पूजा-पाठ के साथ ही दान-पुण्य भी जरूर करें

कार्तिक मास में जरूरतमंद लोगों को अनाज, ऊनी वस्त्र, जूते-चप्पल, खाना, धन का दान करना चाहिए। इस महीने में कई त्योहार मनाए जाते हैं, ऐसे में जरूरतमंद लोगों की मदद करेंगे तो वे लोग भी त्योहारों का आनंद ले पाएंगे।

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