धान कटाई के साथ ही पराली दहन पर रोक के लिए प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। प्रधानों को पत्र भेजकर जागरुक किया जा रहा है और तहसील-विकासखंड स्तर पर समितियों के साथ सचल दस्ते सक्रिय किए गए हैं।
एनजीटी के आदेश से फसल अवशेष जलाना दंडनीय है। राजस्व विभाग के अनुसार दो एकड़ से कम क्षेत्र में पराली दहन पर 5 हजार, 2 से 5 एकड़ तक 10 और 5 एकड़ से अधिक क्षेत्र में 30 हजार रुपये तक क्षतिपूर्ति वसूली जा सकती है।
नियम के पालन के लिए कृषि, राजस्व, पंचायती राज, ग्राम्य विकास, खाद्य एवं रसद, नगर विकास, पशुपालन, शिक्षा और पुलिस विभाग को जिम्मेदारी सौंपी है। जिला स्तरीय मॉनीटरिंग सेल भी गठित किया है। कंबाइन हार्वेस्टर मालिकों को बिना एसएमएस लगाए धान कटाई न करने के निर्देश दिए हैं। उप निदेशक कृषि आवेश कुमार सिंह ने किसानों से फसल अवशेष नहीं जलाने की अपील की है।







