आज से शुरू होंगे कैलाश मानसरोवर के लिए रजिस्ट्रेशन।
कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए आज से रजिस्ट्रेशन शुरू हो गए है। इसी को लेकर उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस बार भी यात्रा उत्तराखंड के लिपुलेख और सिक्किम के नाथुला दर्रे से संचालित होगी।
.
दोनों दर्रों से 10-10 दलों में 500-500 शिवभक्त कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाएंगे। कुमाऊं के पिथौरागढ़ स्थित लिपुलेख दर्रे से यात्रा संचालन को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
दिल्ली में 27 अप्रैल को विदेश मंत्रालय, केएमवीएन और आईटीबीपी के साथ हुई बैठक में इस पर सहमति बनी। बैठक में पिथौरागढ़ जिले से धारचूला के एसडीएम भी शामिल हुए थे।

3 प्वाइंट्स में जानिए कैसे कर सकते हैं रजिस्ट्रेशन
- ऑनलाइन आवेदन से शुरू होती है प्रक्रिया: मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स की वेबसाइट https://kmy.gov.in पर जाकर पहले रजिस्ट्रेशन करना होता है। नया अकाउंट बनाकर आवेदन फॉर्म में व्यक्तिगत जानकारी, पासपोर्ट डिटेल्स भरनी होती हैं। साथ ही पासपोर्ट की स्कैन कॉपी, फोटो और जरूरी दस्तावेज अपलोड कर फॉर्म सबमिट किया जाता है। इसके बाद आवेदन प्रक्रिया पूरी मानी जाती है।
- लॉटरी सिस्टम से होता है चयन: आवेदन पूरे होने के बाद उनकी जांच की जाती है और कंप्यूटरीकृत ड्रॉ के जरिए यात्रियों का चयन होता है। इस प्रक्रिया में किसी तरह का मैनुअल हस्तक्षेप नहीं होता। चयनित लोगों को SMS और Email के माध्यम से सूचना दी जाती है, जिसके बाद वे आगे की प्रक्रिया के लिए पात्र होते हैं।
- मेडिकल जांच के बाद मिलता है कन्फर्मेशन: लॉटरी में चयनित यात्रियों को दिल्ली में मेडिकल परीक्षण से गुजरना होता है। ITBP और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम स्वास्थ्य जांच करती है। पूरी तरह फिट पाए जाने और निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद ही यात्रा का अंतिम कन्फर्मेशन दिया जाता है।

कैलाश पर्वत को देख जमीन पर लेट नमन करते श्रद्धालु।
जून पहले सप्ताह से यात्रा, 10 बैच जाएंगे
पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी आशीष भटगांई के अनुसार कैलाश मानसरोवर यात्रा जून के पहले सप्ताह से शुरू होगी। लिपुलेख दर्रे से कुल 10 बैच भेजे जाएंगे और हर दल में 50 यात्री शामिल रहेंगे। प्रशासन स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं और विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
केएमवीएन करता है यात्रा का संचालन
कैलाश मानसरोवर यात्रा का संचालन कुमाऊं मंडल विकास निगम द्वारा किया जाता है। वर्ष 1981 से निगम यात्रा का संचालन कर रहा है, जिसमें यात्रियों के आने-जाने और ठहरने की व्यवस्था शामिल रहती है। भारत तिब्बत सीमा पुलिस भी यात्रियों की सुरक्षा में सहयोग करती है।

गुंजी में स्वास्थ्य परीक्षण, फिट होने पर ही आगे अनुमति
पहले यह यात्रा हल्द्वानी और अल्मोड़ा से होकर संचालित होती थी, लेकिन अब रूट टनकपुर से कर दिया गया है। इस वर्ष भी यात्रा दिल्ली से शुरू होकर टनकपुर-चंपावत होते हुए पिथौरागढ़ पहुंचेगी। धारचूला में रात्रि विश्राम के बाद यात्री वाहन से गुंजी जाएंगे, जहां आईटीबीपी के डॉक्टरों द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा।
अब सड़क मार्ग से पूरी यात्रा, पैदल दूरी लगभग खत्म
वर्ष 2019 से पहले यात्रियों को 60 किलोमीटर से अधिक दूरी पैदल तय करनी पड़ती थी। रास्ते में केएमवीएन के अलग-अलग पड़ाव होते थे और ऑक्सीजन की कमी के कारण दिक्कतें आती थीं। कई जगह घोड़े-खच्चरों का सहारा लेना पड़ता था। अब लिपुलेख तक सड़क बनने के बाद अधिकांश पड़ाव समाप्त हो गए हैं और लगभग पूरी यात्रा वाहन से होती है। सीमा पर केवल करीब 400-400 मीटर पैदल चलना होता है।

2025 में पहली बार था जब यात्री लिपुलेख तक गाड़ियों में गए थे, इस बार ये दूसरा मौका होगा।
ओम पर्वत के दर्शन भी कर सकते हैं ऋद्धालु
यात्रा के दौरान गुंजी से आगे नाभीढांग में ओम पर्वत के दर्शन होते हैं। इसके बाद लिपुलेख दर्रा पार कर यात्री चीन में प्रवेश करते हैं और तकलाकोट, दार्चिन होते हुए मानसरोवर पहुंचते हैं।
कैलाश मानसरोवर को भगवान शिव का निवास स्थल माना जाता है। यह हिंदू, बौद्ध और जैन धर्मों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। वर्ष 1962 से पहले इस यात्रा पर कोई प्रतिबंध नहीं था, लेकिन भारत-चीन युद्ध के बाद इसे बंद कर दिया गया। बाद में विदेश मंत्रालय के सहयोग से यात्रा दोबारा शुरू हुई और पासपोर्ट अनिवार्य किया गया।








