2 दिन पहले
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आज 23 अप्रैल को वैशाख शुक्ल सप्तमी पर गंगा सप्तमी मनाई जाती है। इस दिन गंगा, यमुना, नर्मदा और शिप्रा जैसी पवित्र नदियों में स्नान, दान, मंत्र जप और तप करने की परंपरा है। आज किए गए धर्म-कर्म से भक्त को अक्षय पुण्य मिलता है, ऐसा पुण्य असर जीवनभर बना रहता है। आज भी भगवान चित्रगुप्त का प्रकट उत्सव भी मनाया जाएगा। मान्यता है कि चित्रगुप्त हमारे कर्मों का हिसाब रखते हैं और मृत्यु के आत्मा को कर्मों के हिसाब से स्वर्ग-नर्क मिलता है।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, गंगा सप्तमी पर गंगा स्नान का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से व्यक्ति के पाप धुल जाते हैं। जो लोग गंगा नदी तक नहीं पहुंच पाते, वे यमुना, नर्मदा, शिप्रा जैसी अन्य पवित्र नदियों में स्नान कर सकते हैं। अगर नदी में स्नान करना संभव न हो, तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी समान पुण्य देने वाला माना गया है।
इन चीजों का कर सकते हैं दान
आज नदी स्नान के बाद जरूरतमंद लोगों को अनाज, कपड़े, जूते-चप्पल, भोजन, पानी, मटका और धन का दान करना चाहिए। मान्यताओं है कि इस दिन किया गया दान कई गुना फल देता है और व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि लाता है।
गंगा सप्तमी की पौराणिक कथा
गंगा सप्तमी से जुड़ी कथा के अनुसार वैशाख शुक्ल सप्तमी पर महर्षि जह्नु तपस्या कर रहे थे। गंगा के तेज प्रवाह से उनका ध्यान बार-बार भंग हो रहा था। क्रोधित होकर उन्होंने अपने तपोबल से गंगा को पी लिया। बाद में देवताओं के आग्रह पर उन्होंने अपने दाहिने कान से गंगा को पुनः पृथ्वी पर प्रवाहित किया। इसी घटना की वजह से गंगा को जाह्नवी नाम मिला और इस तिथि को भी गंगा के प्राकट्य का दिन माना गया है। गंगा को महर्षि जह्नु की पुत्री के रूप में भी पूजा जाता है।
गंगा नदी से जुड़ी मान्यताएं
- मान्यता है कि गंगाजल के स्पर्श, सेवन और स्नान से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है। कहा जाता है कि गंगा जल में आस्था रखने मात्र से व्यक्ति के पापों का नाश होता है।
- गंगा स्नान से दस प्रकार के पापों के नष्ट होने की मान्यता है। इन पापों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। कायिक, वाचिक और मानसिक। धार्मिक दृष्टि से इन तीनों प्रकार के दोषों को जीवन में अशुद्धि का कारण माना गया है, जिन्हें गंगा स्नान से समाप्त किया जा सकता है।
- कायिक यानी शारीरिक पापों में दूसरे का धन लेना, हिंसा करना और परस्त्री गमन शामिल हैं। वाचिक पापों में झूठ बोलना, कटु वचन कहना, पीठ पीछे निंदा करना और व्यर्थ बातें करना आता है। वहीं मानसिक पापों में दूसरों का अहित सोचना, अन्याय की इच्छा रखना और असत्य पर अड़े रहना शामिल है। इन सभी पापों से मुक्ति पाने के लिए गंगा स्नान को प्रभावी माना गया है।
- ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार गंगा का उद्गम देवताओं से जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि देवताओं की स्तुति और दिव्य प्रभाव से उत्पन्न जल ही गंगा के रूप में प्रकट हुआ, जो बाद में पृथ्वी पर प्रवाहित हुआ।
- नारद पुराण में गंगा सप्तमी के दिन व्रत और पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और गंगाजल से भरे पात्रों का दान करने से भक्त का कल्याण और उसके पितरों को मोक्ष मिल सकता है।
- पद्म पुराण में इस तिथि पर गंगा स्नान और पितरों के तर्पण को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन तर्पण करने से पितरों को शांति मिलती है और व्यक्ति को देवी गंगा की कृपा प्राप्त होती है।
- जो लोग गंगा नदी से दूर रहते हैं, उनके लिए भी इस दिन का महत्व कम नहीं है। मान्यता है कि श्रद्धा के साथ ‘गंगा’ का स्मरण करने से भी पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। सुबह, दोपहर और शाम को गंगा का नाम लेकर प्रणाम करने से भी पुण्य मिलता है।









