गणगौर व्रत कब है? जानिए तिथि, पूजा विधि, महत्व और इसका सही नियम
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गणगौर व्रत कब है? जानिए तिथि, पूजा विधि, महत्व और इसका सही नियम

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Gangaur Vrat 2025: गणगौर व्रत हिंदू धर्म में बहुत खास माना जाता है। इसे तृतीया तीज के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन देवी गौरी और भगवान शंकर की पूजा-अर्चना की जाती है। यह व्रत खासतौर पर शादीशुदा महिलाओं और कुंवारी लड़कियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। सुहागिनें इस व्रत को अपने पति की लंबी उम्र और खुशहाल दांपत्य जीवन के लिए रखती हैं, जबकि कुंवारी लड़कियां मनचाहा वर पाने की कामना से इसे करती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं इस साल गणगौर का व्रत कब रखा जाएगा…

कब रखा जाएगा गणगौर व्रत?

हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 31 मार्च की सुबह 9:11 बजे से शुरू होकर 1 अप्रैल की सुबह 5:42 बजे तक रहेगी। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, इस साल गणगौर व्रत 31 मार्च को रखा जाएगा। यह पर्व खासतौर पर राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। राजस्थान में तो यह त्योहार 16 से 18 दिनों तक चलता है।

गणगौर व्रत की पूजा विधि

गणगौर व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान कर व्रत का संकल्प लें। फिर पूजा घर को गंगाजल से शुद्ध करें और वहां लाल कपड़ा बिछाकर शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें। फिर देवी गौरी को सोलह श्रृंगार की चीजें चढ़ाएं। इसके अलावा, चंदन, अक्षत, रोली, कुमकुम और दूर्वा चढ़ाकर माता की पूजा करें। भगवान शिव और माता गौरी के सामने धूप-दीप जलाएं और उन्हें चूरमे का भोग लगाएं। एक थाली में चांदी का सिक्का, सुपारी, पान, दूध, दही, गंगाजल, हल्दी, कुमकुम और दूर्वा रखकर विशेष जल तैयार करें। इस जल को पहले भगवान शिव और माता पार्वती पर छिड़कें और फिर घर के सदस्यों को इस जल का आशीर्वाद दें।

गणगौर व्रत महत्व

मान्यता है कि इस व्रत को करने से शादीशुदा महिलाओं को अखंड सौभाग्य और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। वहीं, कुंवारी लड़कियों को योग्य जीवनसाथी पाने का वरदान मिलता है। शिव-पार्वती की कृपा से घर में खुशहाली बनी रहती है और जीवन में हर तरह की परेशानियां दूर होती हैं।

गणगौर व्रत के नियम

इस दिन घर में भक्ति का माहौल बनाए रखना चाहिए और किसी से विवाद करने से बचना चाहिए। इस दिन माता गौरी को जल से भरा कलश अर्पित करना शुभ माना जाता है। व्रत के दौरान गरीबों को दान-दक्षिणा देना भी फलदायी होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गणगौर के दिन नकारात्मक विचारों और अपशब्दों से दूर रहना चाहिए। साथ ही, इस दिन मांसाहार, नशा और झूठ बोलने से बचना जरूरी है।

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डिसक्लेमर- इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या फिर धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इसके किसी भी तरह के उपयोग करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।





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