गुड हैबिट्स- माइंडफुल ईटिंग की आदत:  खाने को धीरे–धीरे चबाकर, स्वाद लेकर खाएं, कम खाने में भरेगा पेट, जानें इसके 10 बड़े फायदे
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गुड हैबिट्स- माइंडफुल ईटिंग की आदत: खाने को धीरे–धीरे चबाकर, स्वाद लेकर खाएं, कम खाने में भरेगा पेट, जानें इसके 10 बड़े फायदे

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3 घंटे पहले

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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग खाना बेहद जल्दबाजी में खाते हैं। सुबह जल्दी-जल्दी नाश्ता, लंच टाइम पर फोन स्क्रॉल करते हुए दो-चार बाइट्स और रात का डिनर टीवी के सामने ऐसे गटक लिया जैसे कोई रेस हो रही हो। हम जो खा रहे हैं, उसका असली स्वाद तो महसूस ही नहीं कर पाते हैं। बस पेट भरने के नाम पर चीजें निगल जाते हैं। अगर हम थोड़ा रुककर खाने के कलर, फ्रैगरेंस, स्वाद और बनावट पर ध्यान दें, तो न सिर्फ खाना मजेदार लगेगा, बल्कि सेहत भी बोहतर हो जाएगी।

माइंडफुल ईटिंग यानी खाना खाते समय पूरा ध्यान भोजन पर होना चाहिए। हमने बचपन में किताबों में पढ़ा होगा, खाना खूब चबा-चबाकर खाओ, तभी पोषण मिलेगा। ये माइंडफुल ईटिंग की ही बात थी।

आज ‘गुड हैबिट्स’ कॉलम में माइंडफुल ईटिंग की आदत के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • माइंडफुल ईटिंग क्यों जरूरी है?
  • माइंडफुल ईटिंग के क्या फायदे हैं?
  • माइंडफुल ईटिंग कैसे करें?

माइंडफुल ईटिंग क्यों जरूरी है?

माइंडफुल ईटिंग का मतलब है कि खाते समय पूरा ध्यान सिर्फ खाने पर हो। बौद्ध दर्शन में इसे सचेतन भोजन कहते हैं। यह अवधारणा आजकल तनाव, मोटापा और खाने की गड़बड़ियों से जूझते लोगों के लिए रामबाण साबित हो रही है। ज्यादातर लोग मोबाइल, लैपटॉप या काम के बीच खाना खाते हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, ब्रेन को ये सिग्नल देने में 20 मिनट लगते हैं कि पेट भर गया है। अगर हम तेजी से खाना निगल रहे हैं तो ओवरईटिंग का खतरा रहता है।

माइंडफुल ईटिंग हमें सिखाती है कि असली भूख क्या है और भावनात्मक भूख क्या है। यह आदत हमें खाने को सिर्फ जरूरी फ्यूल नहीं, बल्कि आनंद का सोर्स बनाती है। जब हम धीरे-धीरे खाते हैं, तो शरीर के संकेत महसूस करते हैं, कब रुकना है, कब और क्या खाना है।

माइंडफुल ईटिंग के फायदे

माइंडफुल ईटिंग के फायदे इतने ज्यादा हैं कि इसे अपनाने के बाद आपका खाने के साथ रिश्ता ही बदल जाएगा। यह वजन कंट्रोल करने से लेकर मानसिक शांति तक सब देता है। इसके मुख्य फायदे ग्राफिक में देखिए-

इनमें से कुछ पॉइंट्स विस्तार से समझिए-

वजन घटाने में मदद मिलती है

माइंडफुल ईटिंग वेट मैनेजमेंट का शानदार तरीका है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ में पब्लिश 2019 की एक स्टडी के मुताबिक, पारंपरिक डाइट से भी यह ज्यादा असरदार साबित हुई। 34 महिलाओं पर हुए एक छोटे अध्ययन में पता चला कि 12 हफ्तों के इस अभ्यास से औसतन 1.9 किलो वजन कम हुआ। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि हम धीरे खाते हैं, तो ब्रेन को सही सिग्नल मिलता है।

इमोशनल ईटिंग पर काबू मिलता है

कभी-कभी बहुत निराश होने पर आइसक्रीम या मीठी चीज खाई होगी। यह आदत सिखाती है कि असली भूख पेट की है, मन की नहीं है। माइंडफुल ईटिंग इमोशनल ईटिंग को 30-40% तक कम कर देती है। इससे ट्रिगर्स पहचान में आ जाते हैं, तो आप रिएक्ट करने से पहले सोचते हैं।

पाचन बेहतर होता है

धीरे चबाने से खाना अच्छे से पचता है। यह डाइजेशन को बूस्ट करता है, गैस और ब्लोटिंग कम होती है। आयुर्वेद में भी हाथ से खाने को माइंडफुल ईटिंग कहा गया है।

तनाव और चिंता कम होती है

खाते समय माइंडफुल रहने से दमाग शांत होता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ में पब्लिश 2021 की एक स्टडी में बिंज ईटिंग वाले लोगों पर यह थैरेपी की गई, तो एंग्जायटी 25% तक घट गई। डॉ. चेउंग की किताब ‘सेवर’ में लिखा है कि यह मेडिटेशन जैसा काम करता है।

खाने का आनंद बढ़ता है

इससे साधारण रोटी-सब्जी भी स्वादिष्ट लगने लगती है। सेंसेज का इस्तेमाल करें- खाने के रंग ध्यान से देखना, गंध सूंघना- इससे हर बाइट स्पेशल हो जाती है। इससे फूड एप्रीशिएशन बढ़ता है।

शरीर के संकेतों को समझना आसान होता है

यह भूख और पेट भरने के बीच फर्क सिखाती है। इससे हेल्दी चॉइसेज बढ़ती हैं।

ओवरईटिंग रुकती है

डिस्ट्रैक्शन कम होने से हम ज्यादा खाना नहीं खाते हैं। हार्वर्ड की स्टडी में पाया गया कि माइंडफुल ईटर्स 10-15% कम कैलोरी लेते हैं।

मानसिक स्वास्थ्य सुधरता है

डिप्रेशन और ईटिंग डिसऑर्डर में मददगार है। यह सेल्फ-कंट्रोल और पॉजिटिव इमोशंस बढ़ाती है।

इम्यूनिटी मजबूत होती है

स्ट्रेस कम होने से बॉडी का डिफेंस सिस्टम यानी इम्यूनिटी स्ट्रॉन्ग होती है।इससे मोटापे से लड़ने में मदद मिलती है।

माइंडफुल ईटिंग का सही तरीका

यह मुश्किल नहीं, बस थोड़ी प्रैक्टिस चाहिए। रोज एक मील से शुरू करें।

असली भूख चेक करें

पूछें खुद से, क्या मैं सच में भूखा हूं?

खास जगह

डेस्क पर न खाएं, टेबल पर।

माइंडफुल ईटिंग की आदत कैसे बनाएं?

छोटे स्टेप्स से शुरू करें, धैर्य रखें।

इन टिप्स को अपनाएं-

एक मील से शुरू: लंच को माइंडफुल बनाएं।

रिमाइंडर: स्लो ईट के लिए रिमाइंडर सेट करें।

शॉपिंग: प्रोसेस्ड फूड अवॉइड करें।

फैमिली: साथ में सेंसेज शेयर करें।

डायरी: लिखें आज क्या फील हुआ।

रिवॉर्ड: अच्छा किया तो फेवरेट फ्रूट खाएं।

ट्रिगर्स: स्ट्रेस में वॉक करें।

माइंडफुल ईटिंग न करने के नुकसान

अगर हम अनमाइंडफुल खाते रहें, तो वजन बढ़ता है, पाचन खराब होता है। इमोशनल ईटिंग से डिप्रेशन गहरा जाता है। ओवरईटिंग से डायबिटीज, हाई बीपी का खतरा। रिश्ते भी प्रभावित होते हैं, फैमिली टाइम कम हो जाता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन की स्टडी कहती है कि यह 80% वेट रिगेन का कारण भी है।

छोटी, लेकिन जादुई आदत

माइंडफुल ईटिंग एक छोटी आदत है, लेकिन इसके फायदे जीवन बदल देते हैं। यह हमें खाने से प्यार करना सिखाती है, सेहत को संभालती है और मन को शांति देती है। आज से शुरू करें, अगले मील में फोन साइड रखें, एक बाइट को महसूस करें।

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