7 घंटे पहले
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एक वन में एक गुरु अपने शिष्यों के साथ रहते थे। गुरु हमेशा अपने शिष्यों को एक बात हमेशा सिखाते थे कि मनुष्य को अपना काम स्वयं करना चाहिए। जो लोग हर छोटी-बड़ी समस्या के लिए दूसरों का इंतजार करते हैं, वे कभी आत्मनिर्भर नहीं बन पाते हैं।
सभी शिष्य गुरु की बातें ध्यान से सुनते और सिर हिलाकर सहमति जताते थे। उन्हें लगता था कि वे गुरु की सीख को पूरी तरह समझ चुके हैं।
एक दिन गुरु अपने शिष्यों के साथ पास के गांव की जा रहे थे। रास्ते में एक छोटा-सा नाला पड़ा। सभी उसे पार करने के लिए आगे बढ़ने लगे। गुरु आगे-आगे चल रहे थे और शिष्य उनके पीछे। तभी अचानक गुरु के हाथ से उनका कमंडल फिसलकर नाले में गिर गया।
गुरु वहीं रुक गए। शिष्य भी ये देखकर वहीं खड़े हो गए। सबकी नजरें नाले में गिरे कमंडल पर टिक गईं, लेकिन उसे निकालने के लिए कोई आगे नहीं बढ़ा। कुछ शिष्य आपस में बात करने लगे कि अब क्या करें? कमंडल कैसे निकलेगा? पानी गहरा तो नहीं है? तभी एक शिष्य बोला कि मैं गांव जाकर किसी सफाईकर्मी को बुलाता हूं, वही निकाल देगा। यह कहकर वह गांव की ओर चल पड़ा।
बाकी शिष्य किनारे बैठकर तरह-तरह की योजनाएं बनाने लगे। कोई लकड़ी ढूंढ़ने की बात कर रहा था, तो कोई रस्सी लाने की। गुरु चुपचाप यह सब देख रहे थे। उनके चेहरे पर हल्की उदासी थी। वे स्वयं कमंडल निकाल सकते थे, पर वे शिष्यों की परीक्षा लेना चाहते थे।
काफी समय बीत गया। अंत में एक शिष्य अचानक उठा। उसने बिना कुछ कहे नाले में हाथ डालकर कमंडल खोजने की कोशिश की, वह धीरे-धीरे नाले में उतर गया। थोड़ी देर खोजने के बाद उसे कमंडल मिल गया। वह उसे लेकर बाहर आ गया।
गुरु के चेहरे पर मुस्कान आ गई। उन्होंने उस शिष्य की प्रशंसा की और कहा कि तुमने ही मेरी सीख को समझा और उसे जीवन में उतारा। यही आत्मनिर्भरता है।
बाकी शिष्य अपनी गलती समझ चुके थे। उस दिन उन्हें जीवन का सबसे बड़ी सीख मिली कि सफलता उन्हीं को मिलती है, जो अपने काम खुद करते हैं।
प्रसंग की सीख
- अपनी जिम्मेदारी खुद लें
जीवन में जो भी स्थिति आती है, उसकी जिम्मेदारी लेने की आदत डालें। दूसरों को दोष देने या मदद का इंतजार करने से समस्या हल नहीं होती है।
- समस्या से भागें नहीं, सामना करें
जब भी कोई कठिनाई आए, तुरंत समाधान खोजने की कोशिश करें। छोटी-छोटी समस्याओं को टालने से वे बड़ी बन जाती हैं।
- निर्णय लेने की आदत विकसित करें
हर बार दूसरों से पूछकर निर्णय लेने की आदत आत्मविश्वास कम करती है। सोच-समझकर छोटे फैसले खुद लेना शुरू करें।
- आत्मविश्वास बढ़ाएं
खुद पर भरोसा रखें। अगर आप प्रयास करेंगे तो सीखेंगे और सीखेंगे तो आगे बढ़ेंगे।
- कार्य को टालना बंद करें
कोई और कर देगा या बाद में देखेंगे- ऐसी सोच सफलता में सबसे बड़ी बाधा है। जो काम जरूरी है, उसे तुरंत शुरू करें।
- सीख को व्यवहार में उतारें
केवल अच्छी बातें सुनना काफी नहीं है। उन्हें अपने दैनिक जीवन में लागू करना ही असली समझदारी है।
- समाधान पर ध्यान दें
समस्या पर चर्चा करने से ज्यादा जरूरी है समाधान पर ध्यान देना। खुद से पूछें कि मैं इस समस्या को कैसे हल कर सकता हूं?
- स्वअनुशासन अपनाएं
समय पर उठना, काम पूरा करना और लक्ष्य पर टिके रहना- ये आदतें आपको आत्मनिर्भर बनाती हैं।
- छोटे प्रयासों से शुरुआत करें
आत्मनिर्भरता एक दिन में नहीं आती। रोज छोटे-छोटे काम खुद करने की आदत डालें।
- सम्मान और सफलता का सूत्र
जो लोग अपनी मदद खुद करते हैं, वही घर, परिवार और समाज में सम्मान पाते हैं। आत्मनिर्भर व्यक्ति ही सच्ची सफलता प्राप्त करता है।
जीवन प्रबंधन का मूल मंत्र यही है- दूसरों का इंतजार छोड़िए, खुद कदम बढ़ाइए। जब आप अपनी जिम्मेदारी उठाते हैं, तभी जीवन सही दिशा में आगे बढ़ता है।









