महज 50 रुपये में एक दिन एक गोवंश के लिए बजट दिया जा रहा है। इतनी कम धनराशि में गोवंश के लिए भोजन का इंतजाम करना मुश्किल हो रहा है। अलीगढ़ जिले में सूखे भूसे और धान के पुआल के सहारे इन गो आश्रय स्थलों में गोवंश का पेट भरा जा रहा है।
मथुरा के फरसा वाले बाबा कांड के बाद प्रदेशभर में गोवंश और गो आश्रय स्थल फिर सुर्खियों में आ गए। आनन फानन 21 मार्च शाम मुख्यमंत्री ने बैठक कर सुरक्षा व संसाधनों को लेकर निर्देश जारी किए। मगर अपने जिले में अधिकांश गोआश्रय स्थलों में गोवंश को भरपेट खाना नहीं मिल रहा। अमर उजाला ने 22 मार्च को जिले भर के गो आश्रय स्थलों की तस्वीर देखी। जिनके हालात देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार की मंशा के अनुरूप गोवंश की सेवा नहीं हो पा रही है। अधिकारी गोवंश के पालन और सुरक्षा के नाम पर कागज भरने में लगे हैं।
नगर निगम के दोनों गो आश्रय स्थलों में चारा, भूसा आदि की व्यवस्था है। साथ में चिकित्सक निगरानी के लिए आते हैं। किसी तरह की समस्या नहीं है। सीसीटीवी से भी निगरानी होती है। रविवार को हरा चारा क्यों नहीं आया, ये दिखवाया जाएगा।– डाॅ. राजेश कुमार वर्मा, पशु कल्याण अधिकारी, नगर निगम
जिले में पंचायत स्तर पर गो आश्रय स्थलों की देखरेख व संचालन का जिम्मा संबंधित पंचायत सचिव का है। उनके द्वारा निगरानी की जाती है। हमारे द्वारा चारे का बजट जारी किया जाता है। फिर भी जहां कमियां हैं, वहां निगरानी की जाएगी।– डाॅ. दिवाकर त्रिपाठी, सीवीओ