चैत्र मास के कृष्ण पक्ष का चतुर्थी व्रत आज:  शुक्रवार और चतुर्थी के योग में भगवान गणेश और शिव जी के साथ करें शुक्र ग्रह की पूजा
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चैत्र मास के कृष्ण पक्ष का चतुर्थी व्रत आज: शुक्रवार और चतुर्थी के योग में भगवान गणेश और शिव जी के साथ करें शुक्र ग्रह की पूजा

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13 घंटे पहले

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आज (6 मार्च) चैत्र मास के कृष्ण पक्ष का चतुर्थी व्रत है। इस तिथि पर भगवान गणेश की कृपा पाने की कामना से व्रत-उपवास किया जाता है। इस बार ये व्रत शुक्रवार को होने से इस दिन भगवान गणेश के साथ ही शुक्र ग्रह की भी पूजा करनी चाहिए। शुक्र ग्रह की पूजा शिवलिंग रूप में की जाती है। इसलिए शिव जी की विधिवत पूजा करें।

ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, ज्योतिष में शुक्र को शुक्रवार का कारक ग्रह माना जाता है। जिन लोगों की कुंडली में शुक्र ग्रह की स्थिति अच्छी है, उन्हें घर-परिवार और वैवाहिक जीवन में सुख मिलता है, जबकि अशुभ शुक्र की वजह से वैवाहिक जीवन में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। शुक्रवार को देवी लक्ष्मी की भी विशेष पूजा करने की परंपरा है। चतुर्थी तिथि पर गणेश जी के लिए व्रत भी करें। सुबह भगवान के सामने व्रत और पूजा करने का संकल्प लें। इसके बाद पूरे दिन निराहार रहें, शाम को चंद्र उदय के बाद चंद्र और गणेश जी की पूजा करें। इसके बाद भोजन करें। इस तरह चतुर्थी व्रत पूरा होता है।

चतुर्थी पर ऐसे सकते हैं गणेश पूजा

चतुर्थी तिथि पर स्नान के बाद सोने, चांदी, तांबे, पीतल या मिट्टी से बनी भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करें।

गणेश जी को स्नान कराएं। जनेऊ पहनाएं। अबीर, गुलाल, चंदन, सिंदूर, इत्र आदि चढ़ाएं।

वस्त्र अर्पित करें। चावल चढ़ाएं। फूलों से श्रृंगार करें। गणेश मंत्र बोलते हुए दूर्वा चढ़ाएं।

भगवान को लड्डू का भोग लगाएं। कर्पूर जलाएं। धूप-दीप से आरती करें। पूजा के बाद भगवान से क्षमा याचना करें।

अंत में प्रसाद अन्य भक्तों को बांटें। अगर संभव हो सके तो घर में ब्राह्मणों को भोजन कराएं। दक्षिणा दें।

गणेश जी के 12 नाम मंत्रों का करें जप

गणेश पूजन में भगवान के 12 नाम वाले मंत्रों का जप करेंगे तो पूजा जल्दी सफल हो सकती है। ऊँ गणाधिपतयै नम:, ऊँ उमापुत्राय नम:, ऊँ विघ्ननाशनाय नम:, ऊँ विनायकाय नम:, ऊँ ईशपुत्राय नम:, ऊँ सर्वसिद्धप्रदाय नम:, ऊँ एकदन्ताय नम:, ऊँ इभवक्त्राय नम:, ऊँ मूषकवाहनाय नम:, ऊँ कुमारगुरवे नम:।

ऐसे करें शुक्र ग्रह की पूजा- शुक्र की पूजा शिवलिंग रूप में की जाती है। इसलिए शिवलिंग पर दूध चढ़ाएं और सफेद फूलों से श्रृंगार करें। बिल्व पत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल भी चढ़ाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें। शुक्र मंत्र ऊँ शुक्राय नम: का जप करें।

शुक्रवार को महालक्ष्मी और विष्णु जी की पूजा भी कर सकते हैं। विष्णु-लक्ष्मी की प्रतिमा का अभिषेक करें। वस्त्र अर्पित करें, हार-फूल से श्रृंगार करें। तुलसी के साथ मिठाई का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें। पूजा में विष्णु जी के मंत्र ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें।

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