देव दीपावली: कार्तिक पूर्णिमा आज:  संध्या काल में जलाएं दीपक; मंदिर के अलावा रसोई, आंगन और तुलसी के पास भी करें दीपदान
जीवन शैली/फैशन लाइफस्टाइल

देव दीपावली: कार्तिक पूर्णिमा आज: संध्या काल में जलाएं दीपक; मंदिर के अलावा रसोई, आंगन और तुलसी के पास भी करें दीपदान

Spread the love


27 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

देवउठनी एकादशी के बाद आने वाली कार्तिक पूर्णिमा को देवताओं की दिवाली माना जाता है। इसी दिन हम भी दीपदान कर सालभर के सुख-समृद्धि, आरोग्य और मंगल की कामना करते हैं। तैयारी में घी का दीप सर्वोत्तम माना गया है; यदि घी उपलब्ध न हो तो तिल या सरसों के तेल के दीप जला सकते हैं। दीपक की संख्या आमतौर पर विषम रखी जाती है। 5, 7, 11, 21, 51 या 101— और चाहें तो प्रतीक रूप में 365 बातियों वाला एक दीप भी जलाया जा सकता है, जिसका अर्थ पूरे वर्ष प्रकाश और कल्याण है।

दीपदान का क्रम: कब, कहां और कैसे दीपदान का क्रम सरल रखें। ब्रह्ममुहूर्त में गृह-मंदिर के सामने पहला दीप प्रज्ज्वलित करें और प्रदोषकाल यानी संध्या समय में दीपदान करें। घर के मंदिर, मुख्य द्वार, आंगन, रसोई और तुलसी के पास दीप अवश्य रखें ताकि घर का हर कोना उजियारा रहे। मुख्य द्वार पर अंदर-बाहर दो छोटे दीप रख देने से शुभागमन की भावना मानी जाती है, और तुलसी के पास रखा दीप आरोग्य-मंगल का संकेत देता है। शिव-आराधना की भावना से 8 या 12 मुख वाला घी का दीप भी जलाया जा सकता है। संभव हो तो शाम की आरती के बाद नजदीकी नदी/तालाब पर पर्यावरण-अनुकूल (बायोडिग्रेडेबल) दीप प्रवाहित करें।

फल और सावधानियां परंपरा में माना गया है कि व्यवस्थित दीपदान से घर में शांति, समृद्धि और सकारात्मकता बढ़ती है। अंधेरे कोनों में भी दीप रखने से नकारात्मकता का क्षय होता है और विष्णु-लक्ष्मी स्मरण के साथ 11/21/51/108 दीप जलाने से धन-धान्य की मंगल कामना की जाती है। सुरक्षा का ध्यान रखते हुए दीप पर्दों और सजावट से दूर रखें। हवा से बचाने के लिए छोटी बत्ती उपयोग में लें। बच्चों-वरिष्ठों की निगरानी रखें। नदी में प्लास्टिक या गंदगी न डालें।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *